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वरर ष्ठ लिपिक की गिरफ्तारी को एसपी ने विशेष सचिव गृह को भेजा पत्र

Sun, 06 Dec 2020 10:53 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 06 Dec 2020 10:53 PM IST
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Permission sought for arrest of senior clerk
वरिष्ठ लिपिक की गिरफ्तारी के लिए मांगी अनुमति
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फर्रुखाबाद। बिना ड्यूटी के साढ़े तीन वर्ष तक सिपाही का वेतन निकलने के मामले में वरिष्ठ लिपिक की गिरफ्तारी के लिए एसपी ने विशेष सचिव गृह (पुलिस) को पत्र भेजकर अनुमति मांगी है। पत्र के साथ में केस डायरी व अन्य प्रपत्र भी भेजे गए हैं। इस मामले में एडीजी पीएसी ने विवेचक के पत्र पर अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
कानपुर नगर के थाना शिवराजपुर के गांव कपूरपुर निवासी सिपाही नरेश यादव का साढ़े तीन वर्ष तक बिना ड्यूटी के वेतन निकलता रहा था। 13 दिसंबर 2019 को सिपाही की पत्नी सीमा ने पति की मृत्यु की जानकारी आरआई किश्वर अली को दी थी। तब तत्कालीन एसपी डॉ. अनिल मिश्रा के आदेश पर तत्कालीन एएसपी त्रिभुवन सिंह ने जांच कर रिपोर्ट दे दी थी।
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इस पर कैश पटल के एचसीपी अशोक शुक्ला, मुंशी शाहिद, गणना कार्यालय के दीवान कोमल को एसपी ने निलंबित कर दिया था। सिपाही नरेश के बिना आए उसका प्रमोशन फार्म भरने व चरित्र पंजिका में एंट्री करने में तत्कालीन वरिष्ठ लिपिक प्रेमचंद्र राजपूत(वर्तमान में महानगर पीएसी लखनऊ में पटल संख्या पांच पर तैनात) के खिलाफ फतेहगढ़ कोतवाली में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया गया था।
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जांच कर रहे दरोगा दिनेश यादव ने पीएसी महानगर लखनऊ के एडीजी को पत्र भेजकर प्रेमचंद्र की गिरफ्तारी की अनुमति मांगी थी। एडीजी पीएसी ने जांच पर सवाल खड़े करते हुए गिरफ्तारी की अनुमति देने से इनकार कर शासन में पत्राचार कर दिया था।
एसपी अशोक कुमार मीणा ने विशेष सचिव गृह(पुलिस) अनुभाग-1 को पत्र भेजकर तत्कालीन वरिष्ठ लिपिक प्रेमचंद्र की गिरफ्तारी व न्यायालय में अभियोग चलाए जाने के लिए स्वीकृति मांगी है। मुकदमे की केस डायरी व अन्य प्रपत्र भी भेजे हैं।
सिपाही की पत्नी की नहीं बनी पेंशन
सिपाही की पत्नी सीमा की अब तक पेंशन नहीं बन सकी है। पति की मौत के बाद मिलने वाला कोई भुगतान भी नहीं मिला है। वह कई बार अधिकारियों के कार्यालय के चक्कर काट चुकी है।
चार आरआई व सीओ लाइन की जांच एएसपी के यहां लंबित
वर्तमान आरआई किश्वर अली समेत चार आरआई ने अपने-अपने कार्यकाल में वेतन बिल (कब्जुल रसूल) में हस्ताक्षर किए थे। इन पर तत्कालीन सीओ लाइन (चार सीओ) ने भी संस्तुति की थी। जांच में इन लोगों की भी लापरवाही पाई गई थी। एसपी ने इनके खिलाफ भी विभागीय जांच बैठा दी थी।
जांच सीओ कायमगंज राजवीर सिंह गौर को दी गई थी। उन्होंने अपने समकक्ष अधिकारी के खिलाफ जांच का हवाला देकर प्रपत्र एसपी के यहां भेज दिए थे। इसके बाद से जांच एएसपी अजय प्रताप के यहां ठंडे बस्ते में है।

वेतन के बीस लाख की वसूली नहीं
बिना ड्यूटी के सिपाही का बीस लाख रुपये वेतन निकल गया। जांच में यह भी पता चला था कि वेतन पुलिस लाइन के गेट पर लगे एटीएम व कन्नौज के एटीएम से निकला। इसके बाद भी यह जानने का प्रयास नहीं किया गया कि वेतन कौन निकाल रहा था। इसके बाद भी वेतन के बीस लाख रुपये की वसूली की कार्रवाई भी नहीं हो रही है।
‘वरिष्ठ लिपिक की गिरफ्तारी के लिए पत्र भेजकर अनुमति मांगी है। इस मामले से जुड़े जो भी अन्य पक्ष हैं उन्हें देखा जाएगा।’
अशोक कुमार मीणा, पुलिस अधीक्षक फर्रुखाबाद
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