{"_id":"612d0fed8ebc3e7a21130ad1","slug":"panchavati-burnt-in-the-fire-of-corruption-farrukhabad-news-knp64917702","type":"story","status":"publish","title_hn":"भ्रष्टाचार की ‘आग’ में ‘जल’ गई पंचवटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भ्रष्टाचार की ‘आग’ में ‘जल’ गई पंचवटी
विज्ञापन
गांव राजेपुर में पौधों की सुरक्षा के लिए एंगल की जगह लगा बांस व कटीले तार की जगह बंधा बान।
- फोटो : FARRUKHABAD
भ्रष्टाचार की आग में जल गई पंचवटी
राजेपुर। राजेपुर में 2.91 लाख रुपये से बनाई गई पंचवटी भ्रष्टाचार की आग में जल गई है। इसमें जिले की नोडल अधिकारी द्वारा रोपा गया पौधा भी नहीं बच सका है। जो 50 पौधे बचे हैं, वे भी भगवान भरोसे हैं। लोहे के एंगल की जगह बांस लगाकर कटीले तार के स्थान पर बान बांध दिया गया है।
विद्युत उपकेंद्र राजेपुर की खाली पड़ी जमीन पर पंचवटी लगाने के लिए जमीन को समतल करने, 294 पौधे खरीदने व उनकी देखभाल करने के लिए मनरेगा के तहत 2.91 लाख रुपये का इस्टीमेट पास हुआ था।
चार जुलाई को जिले की नोडल अधिकारी अनुराधा शुक्ला ने पीपल का पौधा लगाकर पंचवटी का शुभारंभ किया। डीएम मानवेंद्र सिंह , मुख्य विकास अधिकारी एम. अरून्मोली व अन्य अधिकारियों ने वहां पौधे लगाए थे।
विज्ञापन
शुरू से ही गड़बड़ हो गई जब 294 पौधों के स्थान पर 200 ही लगाए गए। इनकी सुरक्षा के लिए चारों ओर लोहे के एंगल और कटीले तार के स्थान पर बांस लगाकर चारों ओर बान बांध दिया गया। उनके पास बबूल के कांटे लगा दिए गए। पौधों की कोई देखभाल नहीं की गई।
पंचवटी में लगाए करीब 200 पौधों में से 150 सूख गए हैं। करीब 50 पौधे ही बचे हैं। इसमें जिलाधिकारी द्वारा लगाया गया अशोक का पौधा अभी ठीक है। वहीं नोडल अधिकारी द्वारा लगाया गया पौधा सूख गया है। जमीन पर बड़ी-बड़ी घास उग आई है। इससे बचे हुए पौधे भी बीमार दिखाई देते हैं। इन पौधों की कोई देखभाल नहीं करता है। धरा को हरा-भरने के लिए बनाई गई पंचवटी भ्रष्टाचार के भेट चढ़ गई है।
‘जिस स्थान पर पौधे रोपे गए थे, वहां ठीक तरीके से नहीं चलते हैं। वहां पहले भी कई बार पौधे लगवाए गए थे। मैं खुद पंचवटी का निरीक्षण व जांच करूंगा। इसमें जो दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।’-गगनदीप सिंह, खंड विकास अधिकारी राजेपुर
विज्ञापन
राजेपुर। राजेपुर में 2.91 लाख रुपये से बनाई गई पंचवटी भ्रष्टाचार की आग में जल गई है। इसमें जिले की नोडल अधिकारी द्वारा रोपा गया पौधा भी नहीं बच सका है। जो 50 पौधे बचे हैं, वे भी भगवान भरोसे हैं। लोहे के एंगल की जगह बांस लगाकर कटीले तार के स्थान पर बान बांध दिया गया है।
विद्युत उपकेंद्र राजेपुर की खाली पड़ी जमीन पर पंचवटी लगाने के लिए जमीन को समतल करने, 294 पौधे खरीदने व उनकी देखभाल करने के लिए मनरेगा के तहत 2.91 लाख रुपये का इस्टीमेट पास हुआ था।
विज्ञापन
चार जुलाई को जिले की नोडल अधिकारी अनुराधा शुक्ला ने पीपल का पौधा लगाकर पंचवटी का शुभारंभ किया। डीएम मानवेंद्र सिंह , मुख्य विकास अधिकारी एम. अरून्मोली व अन्य अधिकारियों ने वहां पौधे लगाए थे।
विज्ञापन
शुरू से ही गड़बड़ हो गई जब 294 पौधों के स्थान पर 200 ही लगाए गए। इनकी सुरक्षा के लिए चारों ओर लोहे के एंगल और कटीले तार के स्थान पर बांस लगाकर चारों ओर बान बांध दिया गया। उनके पास बबूल के कांटे लगा दिए गए। पौधों की कोई देखभाल नहीं की गई।
पंचवटी में लगाए करीब 200 पौधों में से 150 सूख गए हैं। करीब 50 पौधे ही बचे हैं। इसमें जिलाधिकारी द्वारा लगाया गया अशोक का पौधा अभी ठीक है। वहीं नोडल अधिकारी द्वारा लगाया गया पौधा सूख गया है। जमीन पर बड़ी-बड़ी घास उग आई है। इससे बचे हुए पौधे भी बीमार दिखाई देते हैं। इन पौधों की कोई देखभाल नहीं करता है। धरा को हरा-भरने के लिए बनाई गई पंचवटी भ्रष्टाचार के भेट चढ़ गई है।
‘जिस स्थान पर पौधे रोपे गए थे, वहां ठीक तरीके से नहीं चलते हैं। वहां पहले भी कई बार पौधे लगवाए गए थे। मैं खुद पंचवटी का निरीक्षण व जांच करूंगा। इसमें जो दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।’-गगनदीप सिंह, खंड विकास अधिकारी राजेपुर