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Farrukhabad News: ऑक्सीजन प्लांट बंद, बाजार से खरीदी जा रही
Mon, 22 Sep 2025 12:11 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Mon, 22 Sep 2025 12:11 AM IST
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फर्रुखाबाद। शासन ने हर मरीज को बेड पर ही ऑक्सीजन मुहैया कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर लोहिया अस्पताल में दो ऑक्सीजन प्लांट लगवाए। मगर करीब एक साल से दोनों बंद पड़े हैं।
संचालन की व्यवस्था न होने से अस्पताल प्रशासन हर रोज तीन हजार रुपये की ऑक्सीजन बाजार से खरीद रहा है। भर्ती मरीजों को रात में दिक्कत होती है।
लोहिया अस्पताल में कोरोना की दूसरी लहर में सादा और लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे। इनके संचालन की जिम्मेदारी टेक्नीशियन की बजाय कोरोना कर्मचारियों की थी। करीब एक साल पहले कोरोना कर्मियों की नौकरी खत्म हो गई।
इसके बाद से दोनों ही प्लांट बंद पड़े हैं। अस्पताल के 200 से बेडों तक डाली गई ऑक्सीजन लाइनें दिखावा साबित हो रही हैं। भर्ती मरीजों को छोटे सिलिंडर से ऑक्सीजन दी जा रही है। रात के वक्त कई बार कर्मचारी दूसरा सिलिंडर लगाने में लेटलतीफी करते हैं।
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अस्पताल में हर रोजाना औसतन छह जंबो ऑक्सीजन सिलिंडर खर्च होते हैं। एक सिलिंडर की कीमत 500 रुपये है। करीब एक साल से बंद ऑक्सीजन प्लांट की वजह से तीन हजार रुपये रोजाना खर्च करना पड़ रहा है। इस ओर जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं।
पांच-छह माह पहले प्लांट में करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च कर मरम्मत कराई गई थी। इसके बाद अस्पताल के तीन वार्डबॉय को संचालन का प्रशिक्षण दिया गया, मगर उन्होंने प्लांट के एक दिन भी नहीं चलाया।
ऑक्सीजन प्लांट के सर्वो में कुछ दिक्कत है। इंजीनियर ने क्वाइल फुंकने की बात बताई है। प्लांट में भी कुछ तकनीकी दिक्कत बताई गई, तो संबंधित कंपनी को मेल भेज दिया है। शीघ्र ही व्यवस्थाएं दुरुस्त होंगी।
-डॉ. जगमोहन शर्मा, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।
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संचालन की व्यवस्था न होने से अस्पताल प्रशासन हर रोज तीन हजार रुपये की ऑक्सीजन बाजार से खरीद रहा है। भर्ती मरीजों को रात में दिक्कत होती है।
लोहिया अस्पताल में कोरोना की दूसरी लहर में सादा और लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए थे। इनके संचालन की जिम्मेदारी टेक्नीशियन की बजाय कोरोना कर्मचारियों की थी। करीब एक साल पहले कोरोना कर्मियों की नौकरी खत्म हो गई।
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इसके बाद से दोनों ही प्लांट बंद पड़े हैं। अस्पताल के 200 से बेडों तक डाली गई ऑक्सीजन लाइनें दिखावा साबित हो रही हैं। भर्ती मरीजों को छोटे सिलिंडर से ऑक्सीजन दी जा रही है। रात के वक्त कई बार कर्मचारी दूसरा सिलिंडर लगाने में लेटलतीफी करते हैं।
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अस्पताल में हर रोजाना औसतन छह जंबो ऑक्सीजन सिलिंडर खर्च होते हैं। एक सिलिंडर की कीमत 500 रुपये है। करीब एक साल से बंद ऑक्सीजन प्लांट की वजह से तीन हजार रुपये रोजाना खर्च करना पड़ रहा है। इस ओर जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं।
पांच-छह माह पहले प्लांट में करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च कर मरम्मत कराई गई थी। इसके बाद अस्पताल के तीन वार्डबॉय को संचालन का प्रशिक्षण दिया गया, मगर उन्होंने प्लांट के एक दिन भी नहीं चलाया।
ऑक्सीजन प्लांट के सर्वो में कुछ दिक्कत है। इंजीनियर ने क्वाइल फुंकने की बात बताई है। प्लांट में भी कुछ तकनीकी दिक्कत बताई गई, तो संबंधित कंपनी को मेल भेज दिया है। शीघ्र ही व्यवस्थाएं दुरुस्त होंगी।
-डॉ. जगमोहन शर्मा, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।