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विकास भवन के बाहर एनआरएलएम कर्मियों का धरना
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फर्रुखाबाद। एनआरएलएम कर्मियों ने नौ सूत्री मांगों को लेकर बुधवार को विकास भवन के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। सीडीओ व डीडीओ को ज्ञापन सौंपकर समस्याएं निस्तारित करने की मांग की।
राष्ट्रीय/राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के आउटसोर्स पर तैनात जिला मिशन प्रबंधक डॉ. महेंद्र सिंह नामदेव के नेतृत्व में सभी 18 कर्मचारी विकास भवन में एकत्र हुए। प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी एम. अरून्मोली व डीडीओ योगेंद्र कुमार पाठक को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन दिया।
इसमें वर्ष 2015 से सात प्रतिशत वार्षिक मानदेय वृद्धि व एरियर का भुगतान, एक सप्ताह में भत्तों का भुगतान, बीमा व ईपीएफ का लाभ देने, गृह जनपद में समायोजन, आउटसोर्स समाप्त कर विभागीय संविदा पर तैनाती देने, कंप्यूटर आपरेटरों का 12 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपये मानदेय करने की मांग की। कहाकि 18 सितंबर तक मांगें न माने जाने पर 19 सितंबर से सभी कैडर व समूह की महिलाओं को भी कार्य बहिष्कार में शामिल करने की चेतावनी दी। इसके बाद सभी कर्मचारी विकास भवन गेट के पास दरी बिछाकर अनिश्चित कालीन धरने पर बैठ गए।
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अनुज शुक्ला, वीरेंद्र कुशवाहा, अवनीश कुमार, अंबुज कुमार, मेराज वारिश, बृजेंद्र वर्मा, त्रिभुवन राजपूत, नरेंद्र सिंह आदि कर्मचारी धरने में शामिल रहे।
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राष्ट्रीय/राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के आउटसोर्स पर तैनात जिला मिशन प्रबंधक डॉ. महेंद्र सिंह नामदेव के नेतृत्व में सभी 18 कर्मचारी विकास भवन में एकत्र हुए। प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी एम. अरून्मोली व डीडीओ योगेंद्र कुमार पाठक को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन दिया।
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इसमें वर्ष 2015 से सात प्रतिशत वार्षिक मानदेय वृद्धि व एरियर का भुगतान, एक सप्ताह में भत्तों का भुगतान, बीमा व ईपीएफ का लाभ देने, गृह जनपद में समायोजन, आउटसोर्स समाप्त कर विभागीय संविदा पर तैनाती देने, कंप्यूटर आपरेटरों का 12 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपये मानदेय करने की मांग की। कहाकि 18 सितंबर तक मांगें न माने जाने पर 19 सितंबर से सभी कैडर व समूह की महिलाओं को भी कार्य बहिष्कार में शामिल करने की चेतावनी दी। इसके बाद सभी कर्मचारी विकास भवन गेट के पास दरी बिछाकर अनिश्चित कालीन धरने पर बैठ गए।
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अनुज शुक्ला, वीरेंद्र कुशवाहा, अवनीश कुमार, अंबुज कुमार, मेराज वारिश, बृजेंद्र वर्मा, त्रिभुवन राजपूत, नरेंद्र सिंह आदि कर्मचारी धरने में शामिल रहे।