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न पर्याप्त कंबल और न हीटर की व्यवस्था
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लोहिया अस्पतात के जनरल वार्ड में सर्दी में घर से आई रजाई ओढ़े लेटे मरीज। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल में कड़ाके की सर्दी में भी मरीजों को न तो पर्याप्त कंबल मिल रहे और न ही हीटर की सुविधा। ऐसे में मरीज घरों से लाए कंबल और रजाई के सहारे समय काटने के लिए मजबूर हैं। मरीजों के लिए खरीदे 14 रूम हीटरों से कर्मचारी ठंड दूर कर रहे हैं।
सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुविधाओं पर सरकार मोटी रकम खर्च कर रही है, मगर इसका मरीजों को कोई आराम नहीं मिल रहा है। मरीजों को ठंड से बचाने के लिए दिसंबर में 14 रूम हीटर खरीदे गए, मगर ये मरीजों को नहीं मिल रहे। इसका लाभ सरकारी मुलाजिम उठा रहे हैं। गुरुवार शाम 6:27 बजे जनरल वार्ड में तीमारदार सपना और मरीज घर से लाई रजाई में लेटी थीं। सपना ने बताया कि पांच दिन से यहां हैं, मगर एक दिन भी हीटर नहीं दिया गया। लिहाजा रात ठंड में ही काटनी पड़ रही है।
ठंड से बचाने के नहीं इंतजाम
शाम 6 बजकर 10 मिनट पर अल्हागंज की पूनम एसएनसीयू वार्ड के बाहर घर से लाई रजाई में बैठी थीं। कहा कि बहू ने बेटी को जन्म दिया है। वार्ड में भर्ती हैं। ऐसे में समय काटना है। बरामदे में ही रात काटते हैं। रैनबसेरा की व्यवस्था नहीं है। ठंड से बचने के कोई इंतजाम नहीं हैं।
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शाम 6 बजकर 18 मिनट पर आर्थो वार्ड में विजाधरपुर की सुनीता जमीन पर पति राजकुमार के बेड के नीचे लेटी थी। बताया कि 15 दिन से भर्ती हैं। रात में ठंड लगने पर कई बार हीटर के लिए कहा, मगर हड़का दिया गया। कोई सुनने वाला नहीं है। घर से रजाई न लाएं तो एक कंबल से ठंड बचने वाली नहीं है।
तीमारदारों के लिए महिला और पुरुष अस्पताल में रैन बसेरा की व्यवस्था तक नहीं है। महिला अस्पताल में बने रैन बसेरा के भवन में वन स्टाप सेंटर खोल दिया गया, जबकि पुरुष अस्पताल के रैन बसेरा भवन में रसोई चल रही है। ऐसे में तीमारदार बरामदों में रातें काटने को मजबूर हैं।
वर्जन...
डॉक्टर जिसे हीटर के लिए कहते हैं, उन्हें दिए जाते हैं। कोई भी कर्मचारी इसका उपयोग नहीं कर सकता। यदि डॉक्टर के कहने पर भी मरीज को हीटर नहीं दिया तो वह इसकी जांच कराएंगे। -डॉ. राजकुमार गुप्त, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।
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सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुविधाओं पर सरकार मोटी रकम खर्च कर रही है, मगर इसका मरीजों को कोई आराम नहीं मिल रहा है। मरीजों को ठंड से बचाने के लिए दिसंबर में 14 रूम हीटर खरीदे गए, मगर ये मरीजों को नहीं मिल रहे। इसका लाभ सरकारी मुलाजिम उठा रहे हैं। गुरुवार शाम 6:27 बजे जनरल वार्ड में तीमारदार सपना और मरीज घर से लाई रजाई में लेटी थीं। सपना ने बताया कि पांच दिन से यहां हैं, मगर एक दिन भी हीटर नहीं दिया गया। लिहाजा रात ठंड में ही काटनी पड़ रही है।
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ठंड से बचाने के नहीं इंतजाम
शाम 6 बजकर 10 मिनट पर अल्हागंज की पूनम एसएनसीयू वार्ड के बाहर घर से लाई रजाई में बैठी थीं। कहा कि बहू ने बेटी को जन्म दिया है। वार्ड में भर्ती हैं। ऐसे में समय काटना है। बरामदे में ही रात काटते हैं। रैनबसेरा की व्यवस्था नहीं है। ठंड से बचने के कोई इंतजाम नहीं हैं।
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शाम 6 बजकर 18 मिनट पर आर्थो वार्ड में विजाधरपुर की सुनीता जमीन पर पति राजकुमार के बेड के नीचे लेटी थी। बताया कि 15 दिन से भर्ती हैं। रात में ठंड लगने पर कई बार हीटर के लिए कहा, मगर हड़का दिया गया। कोई सुनने वाला नहीं है। घर से रजाई न लाएं तो एक कंबल से ठंड बचने वाली नहीं है।
तीमारदारों के लिए महिला और पुरुष अस्पताल में रैन बसेरा की व्यवस्था तक नहीं है। महिला अस्पताल में बने रैन बसेरा के भवन में वन स्टाप सेंटर खोल दिया गया, जबकि पुरुष अस्पताल के रैन बसेरा भवन में रसोई चल रही है। ऐसे में तीमारदार बरामदों में रातें काटने को मजबूर हैं।
वर्जन...
डॉक्टर जिसे हीटर के लिए कहते हैं, उन्हें दिए जाते हैं। कोई भी कर्मचारी इसका उपयोग नहीं कर सकता। यदि डॉक्टर के कहने पर भी मरीज को हीटर नहीं दिया तो वह इसकी जांच कराएंगे। -डॉ. राजकुमार गुप्त, सीएमएस, लोहिया पुरुष अस्पताल।