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कर्बला में मोहर्रम की 10 तारीख को नहीं होगा लंगर
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फर्रुखाबाद। हजरत इमाम हुसैन की याद का महीना मोहर्रम की 10 तारीख को कर्बला में होने वाला सामूहिक लंगर इस बार नहीं होगा। घरों और इमामबाड़ों में ताजियादारी और मजलिसें की जाएंगी।
इमाम हुसैन की याद में शिया मुस्लिम अलम जुलूस निकालकर मातम करके कर्बला पहुंचते हैं। इस बार कोरोना के चलते सरकार ने रोक लगा दी है। घेर शामू खां से उठने वाला अलम जुलूस भी नहीं निकलेगा। मोहर्रम की 10 तारीख को जुलूस के पीछे शिया महिलाएं रंज-ओ-गम के साथ अली असगर का झूला लेकर कर्बला आती हैं। कर्बला में मौजूद महिला-पुरुष अली असगर का झूला देखते ही आंखों से आंसू बहाने लगते। इस बार कर्बला में ऐसा नहीं हो सकेगा।
शिया धर्मगुरु मौलाना फरहत अली जैदी ने कहा कि हम सब लोग घरों और इमामबाड़ा में इमाम हुसैन की शहादत का गम मनाएं। सरकारी गाइडलाइन का पालन करना है। कोरोना की वजह से इस बार भी मोहर्रम पर हालों का ताजिया नहीं दिखेगा। मोहर्रम शुरू होने मे सिर्फ दो दिन बचे हैं। शिया इमामबाड़ा और घरों को साफ सफाई करने में लगे हैं। इस बार पानी और शरबत की सबीले भी नहीं लगाई जाएंगी।
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इमाम हुसैन की याद में शिया मुस्लिम अलम जुलूस निकालकर मातम करके कर्बला पहुंचते हैं। इस बार कोरोना के चलते सरकार ने रोक लगा दी है। घेर शामू खां से उठने वाला अलम जुलूस भी नहीं निकलेगा। मोहर्रम की 10 तारीख को जुलूस के पीछे शिया महिलाएं रंज-ओ-गम के साथ अली असगर का झूला लेकर कर्बला आती हैं। कर्बला में मौजूद महिला-पुरुष अली असगर का झूला देखते ही आंखों से आंसू बहाने लगते। इस बार कर्बला में ऐसा नहीं हो सकेगा।
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शिया धर्मगुरु मौलाना फरहत अली जैदी ने कहा कि हम सब लोग घरों और इमामबाड़ा में इमाम हुसैन की शहादत का गम मनाएं। सरकारी गाइडलाइन का पालन करना है। कोरोना की वजह से इस बार भी मोहर्रम पर हालों का ताजिया नहीं दिखेगा। मोहर्रम शुरू होने मे सिर्फ दो दिन बचे हैं। शिया इमामबाड़ा और घरों को साफ सफाई करने में लगे हैं। इस बार पानी और शरबत की सबीले भी नहीं लगाई जाएंगी।
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