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Farrukhabad News: भूमि मिली न किसान, बंटा लाखों का क्लेम, नहीं मिला भुगतान

Mon, 03 Nov 2025 11:52 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद Updated Mon, 03 Nov 2025 11:52 PM IST
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Neither the land nor the farmer was found, claims worth lakhs were distributed, but no payment was received.
फर्रुखाबाद। गत वर्ष रबी की फसल के दौरान प्राकृतिक आपदा से फसलों को नुकसान के बाद बीमा कंपनी ने 232 किसानों को 2.25 करोड़ रुपये मुआवजा बांट दिया।
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महोबा में हुए घपले के बाद जांच कराई गई तो यहां भी गोलमाल से पर्दा उठने लगा। जांच में मौके पर न भूमि मिली और न ही कई किसान, जबकि उनके खाते में लाखों का भुगतान किया गया है।

जनपद में गत वर्ष रबी की फसल के दौरान गेहूं, आलू आदि फसलों का केसीसी के आधार पर 8780 किसानों का फसल बीमा किया गया। जबकि 69 किसानों ने स्वयं फसल बीमा कराया। दैवीय आपदा बारिश, ओलावृष्टि आदि से फसलों में नुकसान हुआ।
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बीमा कंपनी एचडीएफसी अर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के कर्मचारियों ने सर्वे किया। इसके बाद पात्र पाए गए 232 किसानों को दो करोड़ 25 लाख 92 हजार रुपये उनके खाते में मुआवजा धनराशि भेज दी। जबकि बीमा की प्रीमियम धनराशि 99 लाख 55 हजार रुपये जमा हुई थी।
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जनपद महोबा में फसल बीमा योजना में दिए गए मुआवजे में घपलेबाजी की पोल खुलने के बाद जिले में सतर्कता बढ़ी। उपकृषि निदेशक अरविंद मोहन मिश्र के अनुरोध पर जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर एक लाख से अधिक भुगतान पाने वाले किसानों की जांच के आदेश दिए।

30 किसानाें की गांव में भूमि ही नहीं मिली
चकबंदी वाले तीन गांवों में बंथलशाहपुर, बलीपट्टी रानी गांव व गुड़ेरा के कुल 35 किसानों के भुगतान की जांच की गई। सूत्रों के अनुसार कमेटी को 30 किसानाें की निर्धारित गांव में भूमि ही नहीं मिली। दो किसान गांव के निवासी ही नहीं बताए गए।
इन किसानों के खातों में एक लाख से लेकर चार लाख रुपये तक मुआवजा धनराशि भेजी गई है। कुछ किसान ऐसे भी मिले जिनके खाते में बीमा कंपनी द्वारा दो-दो लाख से अधिक धनराशि भेजना दिखाया गया, लेकिन किसानों के खाते में धनराशि पहुंची ही नहीं है। इससे फसल बीमा के नाम पर लाखों का घोटाला होने की आशंका है।

तहसीलवार जांच कमेटी गठित
बीमा कंपनी द्वारा 232 किसानों के खाते में 2.25 करोड़ रुपये मुआवजा भेजना दर्शाया गया है। चकबंदी वाले गांवों की जांच में गोलमाल की आशंका को देखते हुए जिलाधिकारी ने सभी किसान लाभार्थियों की जांच के लिए तीनों तहसीलों के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। कमेटी में शामिल कानूनगो, नायब तहसीलदार व एडीओ कृषि को सात नवंबर तक जांच पूरी कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं।

बैंकों से भी मांगा जवाब
बैंकों से केसीसी के आधार पर फसल बीमा प्रीमियम की धनराशि काटी गई है। कई किसानों की गांव में भूमि न मिलने पर बैंकों से भी जवाब मांगा गया है। डीडीए अरविंद मोहन मिश्र ने बताया कि बैंकों ने किस आधार पर किसान क्रेडिट कार्ड बनाए और फसल का बीमा कराया। बैंकाें की रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और साफ हो जाएगी। घपला पाए जाने पर दोषी के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
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