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Farrukhabad News: मरम्मत में लापरवाही, रास्ते में दगा दे रहीं बसें

Mon, 23 Sep 2024 05:04 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 23 Sep 2024 05:04 AM IST
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Negligence in repairs, buses betraying on the way
फर्रुखाबाद। रोडवेज डिपो की कार्यशाला में बसों की मरम्मत में लापरवाही बरती जा रही है। यही वजह है कि आए दिन बसें रास्ते में ब्रेकडाउन हो रही हैं। कहीं स्टीयरिंग फेल और कहीं प्रेशर लीक होने से बसों में बैठे यात्रियों के जीवन पर बन आती है।
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राज्य सड़क परिवहन निगम ने कई सालों से कार्यशाला में मरम्मत का काम ठेका कर्मियों को सौंप दिया है। इसी के बाद से बसों की मरम्मत में लापरवाही बरती जा रही है। मरम्मत वाली बसों की संख्या अधिक दर्शाने के चक्कर में आधा अधूरा काम किया जा रहा है। संविदा चालकों पर दबाव बनाकर बसें रूट पर भेज दी जाती हैं। परिणाम रास्ते में ब्रेकडाउन होने पर यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।
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19 सितंबर को एक बस आगरा जा रही थी। उसमें करीब 50 यात्री सवार थे। बेवर से पहले काली नदी के पास अचानक बस की स्टीयरिंग फेल हो गई। गनीमत रही कि बस की रफ्तार कम थी। चालक पूरन प्रकाश ने ब्रेक लगाकर बस को खाई में जाने से रोक लिया। इस बस की स्टेयरिंग की दो सितंबर को मरम्मत की गई थी। इसके बाद भी फेल हो गई। दो बसोे में यात्रियों को गंतव्य के लिए रवाना किया जा सका। करीब एक घंटे तक यात्री परेशान रहे।
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इसी तरह इसी महीने की शुरुआत में हरदोई से लौट रही एक बस का सवायजपुर से निकलते ही अचानक प्रेशर लीक हो गया। चालक बमुश्किल बस को रूपापुर तक लाया। करीब एक घंटे बाद बस को धीरे-धीरे चलाकर कार्यशाला तक लाया जा सका। शनिवार रात दिल्ली जा रही एक बस का सिकंदराराऊ के पास अचानक अगला टायर फट गया। चालक ने तत्परता दिखाकर बस को कंट्रोल करके सवार करीब 40 यात्रियों की जान बचाई। इसके बाद रविवार सुबह कार्यशाला से दूसरा टायर भेजा गया। इससे साफ है कि कार्यशाला में इसकी सही से जांच नहीं की गई।
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बिना वाइपर बारिश में दौड़ रहीं बसें
बुधवार को एक बस को बिना वाइपर के ही दिल्ली के लिए रवाना कर दिया गया। बुलंदशहर निकलने के बाद भीषण बारिश हुई। इस दौरान बस को चलाने में चालक को दिक्कत हुई। लिहाजा उसने बारिश के दौरान बस चलाते हुए एक वीडियो विभागीय ग्रुप में शेयर किया। वाइपर न होना भी दुर्घटना का कारण बन सकता है।

महीने में औसतन आठ-दस बसें रास्ते में ब्रेकडाउन हो रही हैं। वह ब्रेकडाउन होने के कारणों की जांच कराते हैं। यदि कार्यशाला कर्मी की लापरवाही सामने आती है, तो उसकी जवाबदेही तय करते हैं। कोशिश रहती है कि ब्रेकडाउन होने वाली बसों की संख्या कम से कम रहे। उम्र पूरी कर चुकी बसों में अधिक दिक्कत आ रही है।



-सक्षम कुमार, सीनियर फोरमैन, फर्रुखाबाद डिपो कार्यशाला।
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