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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   National Green Corps : The schools were selected , sent Rs 2500-2500

नेशनल ग्रीन कोर: स्कूलों का हुआ चयन, 2500-2500 रुपये भेजे गए

Mon, 02 Feb 2015 11:02 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद Updated Mon, 02 Feb 2015 11:02 PM IST
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पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन को 250 स्कूलों को रंग बिरंगे फूलों और
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फलदार पौधों से हरा भरा किया जाएगा। पौधों की देखभाल करने की जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन और बच्चों को दी गई है। भारत सरकार की नेशनल ग्रीन कोर योजना के तहत स्कूली बच्चों को ऐसे अवसर प्रदान किए जाएंगे, जिससे वह अपनी संवेदनशीलता व जागरूकता से टिकाऊ पर्यावरण की रचना कर सकें। योजना के तहत स्कूलों में 2500-2500 रुपये भेजे गए हैं।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन को भारत सरकार ने नेशनल ग्रीन कोर योजना प्रारंभ की है। इसके तहत स्कूली बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा। इससे कि स्कूलों के पर्यावरण में सुधार हो सके। इसके लिए 250 स्कूलों का चयन किया गया है। इनमें 2500-2500 रुपये भेजे गए हैं। इस योजना में चयनित 250 स्कूलों में कार्य शुरू कर दिया गया है।

इनमें प्राइमरी व माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूल शामिल हैं। योजना में स्कूलों में गठित इको क्लब के माध्यम से बच्चों को पर्यावरण के संबंध में जागरूक किया जाएगा। इसमें 30 से 50 विद्याथियों को शामिल किया  गया है। एक प्रभारी शिक्षक अपनी रुचि व पर्यावरण विषय के जुड़ाव के आधार पर इको क्लब की गतिविधियों का संचालन करेगा। इसके लिए

इंचार्ज व मास्टर ट्रेनर तैनात किए गए हैं। स्कूलों को दी गई धनराशि से स्कूलों में पर्यावरण सुधार को प्रतियोगिताएं होंगी। इसकी रिपोर्ट तैयार कर हर माह नोडल अधिकारी को देनी होगी। जिला विद्यालय निरीक्षक भगवत पटेल ने बताया कि नेशनल ग्रीन कोर कार्यक्रम के तहत 250 स्कूलों का चयन किया गया है।  इन स्कूलों में इको क्लब का गठन हो गया है। अब पर्यावरण के प्रति बच्चों को जागरूक किया जाएगा।

योजना का यह है उद्देश्य
- बच्चों को पर्यावरण एवं पर्यावरणीय समस्याओं के प्रति अवगत कराना।

- स्कूली बच्चों को पर्यावरणीय शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराना।

- समाज में बड़े पैमाने पर जागरूकता  उत्पन्न करने को स्कूली बच्चों की अद्भुत शक्ति का उपयोग करना।

- पर्यावरणीय समस्याओं से बच्चों का सीधा संपर्क करना एवं उनके निदान हेतु उनके विचार जानना।

- बच्चों को उनके आसपास होने वाले पर्यावरण से संबंधित क्रियान्वयन कार्यक्रम से जोड़ना।
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