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Farrukhabad News: दो साल बाद मिला आईआईटी पास बेटा तो भर आईं आंखें
Thu, 12 Jun 2025 10:23 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Thu, 12 Jun 2025 10:23 PM IST
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गढि़या ढिलावल स्थित आश्रय गृह में परिजनों के साथ नीलेश सचान (लाल टीशर्ट में)
- फोटो : संवाद
फर्रुखाबाद। कानपुर निवासी रुड़की से आईआईटी करने वाले अधेड़ का मानसिक संतुलन बिगड़ गया। बरेली की संस्था को करीब नौ माह पहले भटकते हुए मिले। संस्था ने अस्पताल में इलाज कराया। पिछले महीने उन्हें देवी अहिल्याबाई मानसिक मंदित आश्रयगृह फर्रुखाबाद भेजा गया। याददाश्त वापस आने पर उन्होंने अपना पता बताया। सूचना पर पहुंचे परिजन उन्हें अपने साथ ले गए।
कानपुर के थाना घाटमपुर के गांव मवई भच्छन निवासी रामबाबू सचान मुंबई रेलवे से रिटायर हैं। उनका बड़े बेटे नीलेश सचान (52) ने रुड़की से आईआईटी पास किया। शादी भी हो गई। कुछ दिन बाद उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया। दो साल पहले वह घर से लापता हो गए। परिजनों ने काफी खोजबीन की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
11 सितंबर 2024 को बरेली की संस्था मनोसमर्पण सेवा संस्थान की टीम ने उन्हें बरामद किया। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम बरेली के आदेश पर मानसिक अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां इलाज के साथ संस्था के फाउंडर शैलेश शर्मा काउंसलिंग करते रहे। कुछ आराम होने पर 23 मई 2025 को फर्रुखाबाद के मऊदरवाजा थाने के गांव गढि़या ढिलावल स्थित देवी अहिल्याबाई मानसिक मंदित आश्रय गृह में शिफ्ट कर दिया गया।
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काउंसलिंग के दौरान नीलेश ने मुंबई में ठाणे जिले के थाना खड़कपाड़ा के निवासी होने की जानकारी दी। ढिलावल के आश्रयगृह प्रबंधक रामप्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने दो जून को पुलिस से संपर्क किया, तो उन्होंने नीलेश के एमबीबीएस एमडी छोटे भाई अवनीश सचान का नंबर दिया। बातचीत होने के बाद वीडियो कॉल पर पहचान करवा दी।
रविवार को एसडीएम रजनीकांत पांडेय और तहसीलदार श्रद्धा पांडेय ने आश्रय गृह पहुंचकर नीलेश से बात की। गुरुवार सुबह उनके पिता रामबाबू सचान और चचेरा भाई अभिषेक सचान आश्रय गृह पहुंचे। दो साल बाद अपने पुत्र को देख पिता व परिजनों की आंखें भर आईं। इसके बाद वह अपने साथ लेकर चले गए।
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कानपुर के थाना घाटमपुर के गांव मवई भच्छन निवासी रामबाबू सचान मुंबई रेलवे से रिटायर हैं। उनका बड़े बेटे नीलेश सचान (52) ने रुड़की से आईआईटी पास किया। शादी भी हो गई। कुछ दिन बाद उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया। दो साल पहले वह घर से लापता हो गए। परिजनों ने काफी खोजबीन की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
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11 सितंबर 2024 को बरेली की संस्था मनोसमर्पण सेवा संस्थान की टीम ने उन्हें बरामद किया। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम बरेली के आदेश पर मानसिक अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां इलाज के साथ संस्था के फाउंडर शैलेश शर्मा काउंसलिंग करते रहे। कुछ आराम होने पर 23 मई 2025 को फर्रुखाबाद के मऊदरवाजा थाने के गांव गढि़या ढिलावल स्थित देवी अहिल्याबाई मानसिक मंदित आश्रय गृह में शिफ्ट कर दिया गया।
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काउंसलिंग के दौरान नीलेश ने मुंबई में ठाणे जिले के थाना खड़कपाड़ा के निवासी होने की जानकारी दी। ढिलावल के आश्रयगृह प्रबंधक रामप्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने दो जून को पुलिस से संपर्क किया, तो उन्होंने नीलेश के एमबीबीएस एमडी छोटे भाई अवनीश सचान का नंबर दिया। बातचीत होने के बाद वीडियो कॉल पर पहचान करवा दी।
रविवार को एसडीएम रजनीकांत पांडेय और तहसीलदार श्रद्धा पांडेय ने आश्रय गृह पहुंचकर नीलेश से बात की। गुरुवार सुबह उनके पिता रामबाबू सचान और चचेरा भाई अभिषेक सचान आश्रय गृह पहुंचे। दो साल बाद अपने पुत्र को देख पिता व परिजनों की आंखें भर आईं। इसके बाद वह अपने साथ लेकर चले गए।