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Farrukhabad News: मानसिक रोगी व नाक-कान-गला की जांच छलावा
Sun, 10 Mar 2024 01:23 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Sun, 10 Mar 2024 01:23 AM IST
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फर्रुखाबाद। हेल्थ वेलनेस सेंटरों पर मानसिक रोगी व नाक-कान-गला की जांच के नाम पर छलावा हो रहा है। यहां से रेफर होने के बाद मरीज भटकते हैं। स्वास्थ्य विभाग में जब डॉक्टर ही नहीं तो मरीजों को इलाज कैसे मिले। अधिकांश सेंटरों पर बीपी मशीन ठप हैं, दवाओं का भी टोटा है।
जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में 165 हेल्थ वेलनेस सेंटर संचालित हैं। इन पर तैनात सीएचओ को 14 प्रकार की जांच करने के आदेश हैं। इसमें शुगर, प्रेग्नेंसी, यूरिन, आयोडीन, गर्भवती की एचआईबी, एचबीएफएजी, सिफिलिस के अलावा डेंगू, मलेरिया, बीपी, स्पुटम -टीबी बलगम आदि शामिल हैं।
ई-संजीवनी सेवा के तहत मरीजों को ऑनलाइन डॉक्टर से संपर्क कर उनका इलाज करना भी इनकी जिम्मेदारी है। सभी सीएचओ को मरीजों के मोतियाबिंद, मानसिक रोग और नाक-कान-गला की जांच का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इससे सीएचओ मरीजों की जांच कर उन्हें सीएचसी व लोहिया अस्पताल रेफर कर रहे हैं। हालातों पर नजर डालें तो स्वास्थ्य विभाग में मानसिक रोग विशेषज्ञ व ईएनटी सर्जन की तैनाती न होने से जांच के बाद मरीज सीएचसी से लेकर लोहिया अस्पताल तक भटकते हैं, लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिल पाता। इसके अलावा हेल्थ वेलनेस सेंटरों पर डायरिया की दवाई, खुजली व दर्द का ट्यूब मिलता ही नहीं है। अधिकांश सेंटरों पर बीपी मशीन खराब हैं। इससे मानक में शामिल 14 के बजाय 10 जांचें होना भी मुश्किल हैं। कई सेंटरों पर तो पानी पीने के लिए हैंडपंप तक की व्यवस्था नहीं है। इससे मरीजों के साथ सीएचओ भी परेशान हैं।
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सीएमओ ने बताया कि शासन के निर्देश पर सीएचओ को मानसिक रोगी व नाक-कान-गला की जांच करने का प्रशिक्षण दिया गया है। डॉक्टरों की भी तैनाती करने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा अन्य व्यवस्थाओं को भी सुधारने का प्रयास किया जाएगा।
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जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में 165 हेल्थ वेलनेस सेंटर संचालित हैं। इन पर तैनात सीएचओ को 14 प्रकार की जांच करने के आदेश हैं। इसमें शुगर, प्रेग्नेंसी, यूरिन, आयोडीन, गर्भवती की एचआईबी, एचबीएफएजी, सिफिलिस के अलावा डेंगू, मलेरिया, बीपी, स्पुटम -टीबी बलगम आदि शामिल हैं।
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ई-संजीवनी सेवा के तहत मरीजों को ऑनलाइन डॉक्टर से संपर्क कर उनका इलाज करना भी इनकी जिम्मेदारी है। सभी सीएचओ को मरीजों के मोतियाबिंद, मानसिक रोग और नाक-कान-गला की जांच का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इससे सीएचओ मरीजों की जांच कर उन्हें सीएचसी व लोहिया अस्पताल रेफर कर रहे हैं। हालातों पर नजर डालें तो स्वास्थ्य विभाग में मानसिक रोग विशेषज्ञ व ईएनटी सर्जन की तैनाती न होने से जांच के बाद मरीज सीएचसी से लेकर लोहिया अस्पताल तक भटकते हैं, लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिल पाता। इसके अलावा हेल्थ वेलनेस सेंटरों पर डायरिया की दवाई, खुजली व दर्द का ट्यूब मिलता ही नहीं है। अधिकांश सेंटरों पर बीपी मशीन खराब हैं। इससे मानक में शामिल 14 के बजाय 10 जांचें होना भी मुश्किल हैं। कई सेंटरों पर तो पानी पीने के लिए हैंडपंप तक की व्यवस्था नहीं है। इससे मरीजों के साथ सीएचओ भी परेशान हैं।
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सीएमओ ने बताया कि शासन के निर्देश पर सीएचओ को मानसिक रोगी व नाक-कान-गला की जांच करने का प्रशिक्षण दिया गया है। डॉक्टरों की भी तैनाती करने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा अन्य व्यवस्थाओं को भी सुधारने का प्रयास किया जाएगा।