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मिलिए एक और ‘रैंचो’ से
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
Updated Sun, 04 Sep 2016 11:04 PM IST
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मास्टर श्रीराम वर्मा।
- फोटो : अमर उजाला
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फिल्म थ्री इडियट का रैंचो तो याद होगा आपको...अपने पैसों से गरीब बच्चों की पढ़ाई, उनकी जरूरतों को पूरा करता था। ठीक एक ऐसा ही रैंचो शहर में भी है। शिक्षक पद से रिटायर हुए मास्टर श्रीराम वर्मा बिना किसी स्वार्थ अपनी कमाई का आधा हिस्सा बच्चों की शिक्षा पर खर्च कर रहे हैं। उनके पढ़ाए छात्रों की सूची में जिले के पूर्व कमिश्नर राजीव सिंह का नाम भी शामिल है।
1964 में बेसिक शिक्षा विभाग में अध्यापक के पद पर तैनात हुए मास्टर श्रीराम वर्मा का पूरा समय अपने गृह क्षेत्र के स्कूल राजेपुर प्राथमिक विद्यालय में बीत गया। नौकरी के शुरूआती दौर से ही गरीब बच्चों को अपने पैसे से कापी-किताबें तथा विद्यालय के समय के बाद नि:शुल्क शिक्षा अध्ययन कराने का काम शुरू किया। प्रधानाध्यापक बनने के बाद भी मास्टर श्रीराम गुरु की भूमिका निभाते रहे।
मास्टर श्रीराम वर्मा को फर्रुखाबाद के गांधी के रूप में बच्चे जानते थे। सेवानिवृत्त होने के बाद भी वह गंगातट पांचाल घाट पर रहकर शिक्षा अध्ययन करा रहे हैं। पूर्व कमिश्नर राजीव सिंह का कहना है कि श्रीराम वर्मा ने उनका ही नहीं, बल्कि न जाने कितने बच्चों का भविष्य तराश कर उन्हें बिना किसी लोभ-लालच के अपने पैरों पर खड़ा कर दिया।
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80 साल के मास्टर श्रीराम वर्मा का जोश और जुनून किसी युवा से कम नहीं है। आज भी वह अपने गांव राजेपुर से साइकिल से आकर गंगातट पांचाल घाट पर रहकर गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं। इस संबंध में जब मास्टर श्रीराम वर्मा से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि वह बच्चों का भविष्य संभालने के लिए जीवन भर कार्य करते रहे और जब तक सांस है, तब तक गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देकर उनके भविष्य को तराशने का काम करेंगे।
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1964 में बेसिक शिक्षा विभाग में अध्यापक के पद पर तैनात हुए मास्टर श्रीराम वर्मा का पूरा समय अपने गृह क्षेत्र के स्कूल राजेपुर प्राथमिक विद्यालय में बीत गया। नौकरी के शुरूआती दौर से ही गरीब बच्चों को अपने पैसे से कापी-किताबें तथा विद्यालय के समय के बाद नि:शुल्क शिक्षा अध्ययन कराने का काम शुरू किया। प्रधानाध्यापक बनने के बाद भी मास्टर श्रीराम गुरु की भूमिका निभाते रहे।
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मास्टर श्रीराम वर्मा को फर्रुखाबाद के गांधी के रूप में बच्चे जानते थे। सेवानिवृत्त होने के बाद भी वह गंगातट पांचाल घाट पर रहकर शिक्षा अध्ययन करा रहे हैं। पूर्व कमिश्नर राजीव सिंह का कहना है कि श्रीराम वर्मा ने उनका ही नहीं, बल्कि न जाने कितने बच्चों का भविष्य तराश कर उन्हें बिना किसी लोभ-लालच के अपने पैरों पर खड़ा कर दिया।
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80 साल के मास्टर श्रीराम वर्मा का जोश और जुनून किसी युवा से कम नहीं है। आज भी वह अपने गांव राजेपुर से साइकिल से आकर गंगातट पांचाल घाट पर रहकर गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं। इस संबंध में जब मास्टर श्रीराम वर्मा से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि वह बच्चों का भविष्य संभालने के लिए जीवन भर कार्य करते रहे और जब तक सांस है, तब तक गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देकर उनके भविष्य को तराशने का काम करेंगे।