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मंदी में भी लखपति बना गया हालैंड आलू
अमर उजाला ब्यूरो, फर्रुखाबाद।
Updated Fri, 22 Jan 2016 11:19 PM IST
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फर्रुखाबाद। आलू पर छाई मंदी से जहां किसानों का करोड़ों रुपया डूब गया वहीं विकास खंड कमालगंज के गांव टाडा बहरामपुर के किसान मुंशीलाल हालैंड प्रजाति के आलू से माला पाल हो गए। उनको इस आलू की पैदावार से 1 लाख 38 हजार 600 रुपये का लाभ हुआ है। यह आलू नेपाल के काठमांडू को निर्यात किया जा रहा है।
इस वक्त आलू 350 रुपये प्रति क्विंटल आलू बिक रहा है।
मुंशीलाल बताते हैं कि एक बीघा में पुखराज, 3797, चिप्सोना आलू तैयार करने में तकरीबन पांच सौ रुपये की लागत लगती है। दाम कम होने से किसानों को डेढ़ सौ रुपये प्रति क्विंटल घाटा उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि गत वर्ष हालैंड आलू की मांग पाकिस्तान में होने पर दाम किसानों को अच्छे मिले थे। इस साल उन्होंने चालीस बीघा खेत में हालैंड आलू की फसल को तैयार किया। 15 क्विंटल बीघा आलू निकलने के कारण चालीस बीघा में छह सौ क्विंटल आलू तैयार हुआ। मंडी समिति में उन्हें इस आलू की कीमत 731 रुपया प्रति क्विंटल मिली जिससे 4 लाख 38 हजार 600 रुपये के दाम आये।
मंदी के बाद भी उन्होंने 1 लाख 38 हजार 600 रुपया शुद्ध लाभ कमाया है। आलू निर्यात संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश आलू निर्यात सहायता समिति के सदस्य सुधीर शुक्ला का कहना है कि आलू को विदेश में निर्यात करने के लिए उन्हें शासन की ओर से लाइसेंस मिला है। ताज ब्रांड लगाकर वह आलू को मौजूदा समय में नेपाल के काठमांडू के लिए निर्यात कर रहे हैं। मुंशीलाल के आलू की काठमांडू में मांग बढ़ने से उन्हें आलू के अच्छे दाम मिले हैं।
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पाकिस्तानियों को भा गया हालैंड आलू
फर्रुखाबाद। आलू आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश वर्मा का कहना है कि हालैंड प्रजाति का आलू पिछले साल पाकिस्तान के लिए निर्यात किया गया था। पाकिस्तानियों को हालैंड आलू अधिक पसंद आ रहा है। इस वजह से नेपाल के माध्यम से यह आलू पाकिस्तान पहुंच रहा है। यही वजह है कि इसकी कीमत मंडी में बढ़ गई है।
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इस वक्त आलू 350 रुपये प्रति क्विंटल आलू बिक रहा है।
मुंशीलाल बताते हैं कि एक बीघा में पुखराज, 3797, चिप्सोना आलू तैयार करने में तकरीबन पांच सौ रुपये की लागत लगती है। दाम कम होने से किसानों को डेढ़ सौ रुपये प्रति क्विंटल घाटा उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि गत वर्ष हालैंड आलू की मांग पाकिस्तान में होने पर दाम किसानों को अच्छे मिले थे। इस साल उन्होंने चालीस बीघा खेत में हालैंड आलू की फसल को तैयार किया। 15 क्विंटल बीघा आलू निकलने के कारण चालीस बीघा में छह सौ क्विंटल आलू तैयार हुआ। मंडी समिति में उन्हें इस आलू की कीमत 731 रुपया प्रति क्विंटल मिली जिससे 4 लाख 38 हजार 600 रुपये के दाम आये।
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मंदी के बाद भी उन्होंने 1 लाख 38 हजार 600 रुपया शुद्ध लाभ कमाया है। आलू निर्यात संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश आलू निर्यात सहायता समिति के सदस्य सुधीर शुक्ला का कहना है कि आलू को विदेश में निर्यात करने के लिए उन्हें शासन की ओर से लाइसेंस मिला है। ताज ब्रांड लगाकर वह आलू को मौजूदा समय में नेपाल के काठमांडू के लिए निर्यात कर रहे हैं। मुंशीलाल के आलू की काठमांडू में मांग बढ़ने से उन्हें आलू के अच्छे दाम मिले हैं।
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पाकिस्तानियों को भा गया हालैंड आलू
फर्रुखाबाद। आलू आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश वर्मा का कहना है कि हालैंड प्रजाति का आलू पिछले साल पाकिस्तान के लिए निर्यात किया गया था। पाकिस्तानियों को हालैंड आलू अधिक पसंद आ रहा है। इस वजह से नेपाल के माध्यम से यह आलू पाकिस्तान पहुंच रहा है। यही वजह है कि इसकी कीमत मंडी में बढ़ गई है।