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Farrukhabad News: लोहिया का ऑक्सीजन प्लांट बंद, खरीद रहे सिलिंडर
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फर्रुखाबाद। कोरोना के दौरान लोहिया अस्पताल सहित बरौन, मोहम्मदाबाद, कमालगंज, राजेपुर, एलटू में लगे ऑक्सीजन प्लांट कागजों में चल रहे हैं। लोहिया अस्पताल का एक प्लांट दो माह से खराब है, जबकि दूसरे में लिक्विड ऑक्सीजन नहीं भरवाई गई। आपातकाल के लिए आए ऑक्सीजन कंसन्टेटर में से 30 पीकू वार्ड में धूल फांक रहे हैं। अस्पतालों में बाजार से महंगे दामों पर ऑक्सीजन सिलिंडर खरीदे जा रहे हैं।
कोरोना के दौरान ऑक्सीजन न मिलने से कई ने जान गंवा दीं। इससे सबक लेते हुए शासन ने करोड़ों रुपये खर्च कर छह अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगवाए थे। इनके संचालन की जिम्मेदारी कोविड कर्मियों को दी गई थी। कोविड कर्मियों की नौकरी जाने के बाद ऑक्सीजन प्लांटों पर संकट के बादल मंडरा गए।
लोहिया अस्पताल का प्लांट जून में खराब हो गया था, जो अब तक चालू नहीं किया जा सका। अस्पताल में करीब एक साल पहले लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगा। उसमें भरी गैस कुछ दिन चलने के बाद खत्म हो गई। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने न तो खराब प्लांट सही कराने की जरूरत समझी और न ही लिक्विड ऑक्सीजन मंगवाई।
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अस्पताल में अकेली इमरजेंसी में रोजाना तीन जम्बो सिलिंडर खर्च हो जाते हैं। इसके अलावा जीरियाट्रिक, पीडियाट्रिक, ओटी आदि में भी ऑक्सीजन खर्च होती है। रोजाना पांच से छह सिलिंडर आक्सीजन की खपत है। एक सिलिंडर की कीामत 450 रुपये बताई जा रही है।
शासन ने बाजार से सिलिंडर न खरीदने पड़ें, इसके लिए 40 ऑक्सीजन कंसन्टेटर उपलब्ध कराए थे। इनमें से करीब 10 कंसन्टेटर इमरजेंसी और वार्ड में लगे हैं। जबकि अन्य 30 पीकू वार्ड के एक कमरे में धूल फांक रहे हैं। जिम्मेदारों की लापरवाही की वजह से प्लांट की मरम्मत नहीं कराई जा रही है।
सीएमएस डॉ. अशोक प्रियदर्शी ने बताया कि इंजीनियर ने एक पार्ट खराब बताया। वह काफी कीमती है। लिहाजा विभाग के लिए लिखा गया है। लिक्विड ऑक्सीजन भी काफी महंगी आती है। वह परामर्श करके बजट के अनुसार आगे का काम करेंगे। मरीजों को ऑक्सीजन की कोई दिक्कत नहीं है।
प्लांट से नहीं दी जाती ऑक्सीजन
फर्रुखाबाद। सीएचसी फतेहगढ़ (एल-2 अस्पताल) में भले ही ऑक्सीजन प्लांट लगा है, लेकिन यहां कभी किसी मरीज को ऑक्सीजन दी ही नहीं गई। खास बात तो यह है कि इस अस्पताल में मरीज भर्ती ही नहीं किए जाते। प्रसव की सुविधा भी नहीं है। इससे प्लांट का संचालन मॉक डि्रल तक सीमित है। सीएचसी राजेपुर में औसतन प्रति माह 10 से लेकर 50 ऑक्सीजन सिलिंडर की खपत है। क्योंकि प्लांट से ऑक्सीजन दी ही नहीं जाती।
सीएचसी प्रभारी डॉ.आरिफ सिद्दीकी का कहना है कि प्लांट से कोविड वार्ड में मरीजों को ऑक्सीजन देने की व्यवस्था है। जबकि आक्सीजन इमरजेंसी व लेबर रूम में जरूरत पड़ती है। इसलिए सिलिंडर से ही ऑक्सीजन दी जाती है। कुछ ऐसा ही हाल सीएचसी बरौन व मोहम्मदाबाद का है। मोहम्मदाबाद में तो प्लांट पर लगा जनरेटर लोड ही नहीं उठा पाता है। यहां भी प्लांट से किसी मरीज को ऑक्सीजन नहीं दी गई।
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ऑक्सीजन प्लांट व कंसन्टेटर शोपीस, सिलिंडरों से चल रहा काम
फोटो- 27,
कमालगंज। सीएचसी के जिम्मेदारों को संसाधनों के उपयोग पर कम, खरीद करने में अधिक रुचि है। अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट व कंसन्टेटर शोपीस बने हैं। जबकि बाजार से सिलिंडर खरीदकर काम चलाया जा रहा है।
हालांकि डॉ. मान सिंह वर्मा व फार्मासिस्ट पवन सिंह प्लांट को चालू करने का दावा करते हैं। अस्पताल में 68 ऑक्सीजन कंसन्टेटर, छह बड़े व छोटे 10 सिलिंडर हैं। इनमें चार खाली हैं। प्लांट व मशीनों के बावजूद सिलिंडर के सहारे मरीज रहते हैं। फार्मासिस्ट पवन कुमार ने बताया कि 26 जुलाई को छोटे सात सिलिंडरों में ऑक्सीजन भरवाई थी। बिजली न आने पर इमरजेंसी मरीजों को सिलिंडर से ऑक्सीजन दी जाती है। भर्ती मरीजों के लिए प्लांट व कंसन्टेटर का प्रयोग करते हैं। (संवाद)
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कोरोना के दौरान ऑक्सीजन न मिलने से कई ने जान गंवा दीं। इससे सबक लेते हुए शासन ने करोड़ों रुपये खर्च कर छह अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगवाए थे। इनके संचालन की जिम्मेदारी कोविड कर्मियों को दी गई थी। कोविड कर्मियों की नौकरी जाने के बाद ऑक्सीजन प्लांटों पर संकट के बादल मंडरा गए।
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लोहिया अस्पताल का प्लांट जून में खराब हो गया था, जो अब तक चालू नहीं किया जा सका। अस्पताल में करीब एक साल पहले लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगा। उसमें भरी गैस कुछ दिन चलने के बाद खत्म हो गई। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने न तो खराब प्लांट सही कराने की जरूरत समझी और न ही लिक्विड ऑक्सीजन मंगवाई।
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अस्पताल में अकेली इमरजेंसी में रोजाना तीन जम्बो सिलिंडर खर्च हो जाते हैं। इसके अलावा जीरियाट्रिक, पीडियाट्रिक, ओटी आदि में भी ऑक्सीजन खर्च होती है। रोजाना पांच से छह सिलिंडर आक्सीजन की खपत है। एक सिलिंडर की कीामत 450 रुपये बताई जा रही है।
शासन ने बाजार से सिलिंडर न खरीदने पड़ें, इसके लिए 40 ऑक्सीजन कंसन्टेटर उपलब्ध कराए थे। इनमें से करीब 10 कंसन्टेटर इमरजेंसी और वार्ड में लगे हैं। जबकि अन्य 30 पीकू वार्ड के एक कमरे में धूल फांक रहे हैं। जिम्मेदारों की लापरवाही की वजह से प्लांट की मरम्मत नहीं कराई जा रही है।
सीएमएस डॉ. अशोक प्रियदर्शी ने बताया कि इंजीनियर ने एक पार्ट खराब बताया। वह काफी कीमती है। लिहाजा विभाग के लिए लिखा गया है। लिक्विड ऑक्सीजन भी काफी महंगी आती है। वह परामर्श करके बजट के अनुसार आगे का काम करेंगे। मरीजों को ऑक्सीजन की कोई दिक्कत नहीं है।
प्लांट से नहीं दी जाती ऑक्सीजन
फर्रुखाबाद। सीएचसी फतेहगढ़ (एल-2 अस्पताल) में भले ही ऑक्सीजन प्लांट लगा है, लेकिन यहां कभी किसी मरीज को ऑक्सीजन दी ही नहीं गई। खास बात तो यह है कि इस अस्पताल में मरीज भर्ती ही नहीं किए जाते। प्रसव की सुविधा भी नहीं है। इससे प्लांट का संचालन मॉक डि्रल तक सीमित है। सीएचसी राजेपुर में औसतन प्रति माह 10 से लेकर 50 ऑक्सीजन सिलिंडर की खपत है। क्योंकि प्लांट से ऑक्सीजन दी ही नहीं जाती।
सीएचसी प्रभारी डॉ.आरिफ सिद्दीकी का कहना है कि प्लांट से कोविड वार्ड में मरीजों को ऑक्सीजन देने की व्यवस्था है। जबकि आक्सीजन इमरजेंसी व लेबर रूम में जरूरत पड़ती है। इसलिए सिलिंडर से ही ऑक्सीजन दी जाती है। कुछ ऐसा ही हाल सीएचसी बरौन व मोहम्मदाबाद का है। मोहम्मदाबाद में तो प्लांट पर लगा जनरेटर लोड ही नहीं उठा पाता है। यहां भी प्लांट से किसी मरीज को ऑक्सीजन नहीं दी गई।
ऑक्सीजन प्लांट व कंसन्टेटर शोपीस, सिलिंडरों से चल रहा काम
फोटो- 27,
कमालगंज। सीएचसी के जिम्मेदारों को संसाधनों के उपयोग पर कम, खरीद करने में अधिक रुचि है। अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट व कंसन्टेटर शोपीस बने हैं। जबकि बाजार से सिलिंडर खरीदकर काम चलाया जा रहा है।
हालांकि डॉ. मान सिंह वर्मा व फार्मासिस्ट पवन सिंह प्लांट को चालू करने का दावा करते हैं। अस्पताल में 68 ऑक्सीजन कंसन्टेटर, छह बड़े व छोटे 10 सिलिंडर हैं। इनमें चार खाली हैं। प्लांट व मशीनों के बावजूद सिलिंडर के सहारे मरीज रहते हैं। फार्मासिस्ट पवन कुमार ने बताया कि 26 जुलाई को छोटे सात सिलिंडरों में ऑक्सीजन भरवाई थी। बिजली न आने पर इमरजेंसी मरीजों को सिलिंडर से ऑक्सीजन दी जाती है। भर्ती मरीजों के लिए प्लांट व कंसन्टेटर का प्रयोग करते हैं। (संवाद)