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लोहिया अस्पताल रात में खुद नजर आता है बेबस सा

Wed, 24 Jun 2015 11:23 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद Updated Wed, 24 Jun 2015 11:23 PM IST
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Lohia hospital overnight mirrored themselves helpless little
फर्रुखाबाद डा. राममनोहर लोहिया की कर्मभूमि रही है। उन्हीं के नाम पर आवास
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विकास में सरकारी अस्पताल चल रहा है। लोहिया को आदर्श मानने वाली समाजवादी पार्टी की सरकार है। मंगलवार की सुबह डीएम एनकेएस चौहान पिता को दिखाने लोहिया अस्पताल ले गए थे। उन्हें कई खामियां मिलीं। लगा कि उनकी नाराजगी के बाद रात को हालात सुधरे मिलेंगे,

लेकिन ऐसा हुआ कतई नहीं। हकीकत में लोहिया अस्पताल रात को लावारिस सा रहता है। बिजली गुल हुई नहीं कि अस्पताल में घुप अंधेरा हो जाता है। वार्डों से उमस के भभके निकलते हैं। पंखे हांफ रहे होते हैं। पहले तल के वार्डों तक

पहुंचाने वाली सीढ़ियों पर अंधेरा सोया मिलता है। जरा सा चूके तो वार्डों तक जाने केे बजाय नीचे गिरकर चुटहिल हो सकते हैं। ठंडे पानी की चाहत में वाटर कूलर खौलता पानी देकर आपसे मजाक करेगा। मंगलवार की रात अमर उजाला ने लोहिया अस्पताल की पड़ताल की। पेश है आंखों देखी रिपोर्ट।
 
मंगलवार, रात 10.01 बजे
मेन गेट पर अंधेरा है। यहां से मालूम करना मुश्किल होता कि इमरजेंसी किधर है। मेन गेट से सीधी ओर लोगों की आवाजाही से उस ओर इमरजेंसी का अहसास किया सकता है। यहां अंदर जाने वाले गेट के ऊपर दो लाइटें जल रही हैं। इसके दोनों ओर लगी लाइटें बंद हैं। इमरजेंसी गेट के सामने और आसपास बाइकें खड़ी हैं। बाहर अंधेरे में जगह-जगह

तीमारदारों की अड्डेबाजी है। यह अस्पताल प्रशासन को कोस रहे हैं। तीमारदार जसकरन, विपिन कहते हैं कि रैन बसेरा में ताले पड़े हैं। ऐसे में कहां जाएं। यहीं जगते सोते रात काटेंगे।

मंगलवार, रात 10.11 बजे
इमरजेंसी गेट पार करने के बाद रिसेप्शन है। इस पर खाकी पहने कुछ लोगों का कब्जा है।  अंधेरे में समझ में नहीं आता कि यह सिपाही हैं, होमगार्ड या कुछ और। फर्श पर एक मां बच्चे के साथ लेटी है। दूसरी ओर युवक सो रहा है। खासी उमस है। सभी पसीने से तर हैं। सामने वाटर कूलर दिखता है। पानी पीने के लिए बढ़ते हैं तो लगता कि नल का पानी खौला सा

लगता है। आगे जनरल वार्ड है। यहां तीमारदारों का हुजूम है। यह हाथ से पंखा कर रहे हैं। ऊपर नजर जाती है तो पंखा बंद है। कछुआ गाढ़ा के रामसेवक कहते हैं कि वार्डों का हाल और बुरा है। आगे महिला वार्ड हैं। यहां प्रसूताओं के तीमारदार जमीन पर सोते मिलते हैं।

मंगलवार, रात 10.22 बजे
ग्राउंड फ्लोर से पहले माले के वार्डों तक जाने के लिए सीढ़ियां हैं। यहां अंधेरा है। सीढ़ियों की फर्श नहीं दिखती। यहां लगी ट्यृूब लाइटें बंद हैं। दीवार के सहारे ऊपर पहुंचते हैं। सामने से बिल्ली चूहा को दबाए चली आ रही है। आखिरी  सीढ़ी पर

हमें देख वह रुकती है, फिर हमलावर होने के अंदाज में गुर्राने लगती। इसकेे बाद वह सीढ़ियों पर छलांग लगा देती। इस शोर में पास के वार्ड से तीमारदार राकेेश निकलते हैं। यह बताने लगते, बिल्ली रात को परेशान करती है। बिजली नहीं होने से मरीजों के लिए लाया सामान बिखेर देती है।

मंगलवार , रात 10.31 बजे
जनरल वार्ड एफ 16 के सामने अंधेरा है। यही हाल वार्ड एफ 12 के सामने है। स्वाइन फ्लू वार्ड के सामने पानी की टंकी रखी है। इसमें न टोंटी हैं और न पानी। यहां लगे पंखे बंद हैं। पास के वार्ड में फर्श पर वार्ड के गेट पर ढिपिन के प्रेमपाल लेटे हैं। इनका आधा हिस्सा वार्ड के अंदर है, और आधा हिस्सा बाहर। यह कहते हैं कि अस्पताल में सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं है। कई बार मरीजों और तीमारदारों का सामान पार हो चुका है।

मंगलवार , रात 10.40 बजे
बिजली गुल। करीब 6 मिनट के बाद जनरेटर चलता है। वापसी में गैलरी की कई लाइटें और गुल मिलती हैं। वार्डों में बेड पर मरीज और फर्श पर तीमारदार। कोई देखने वाला नहीं। सीढ़ियों पर अंधेरे से जूझ कर नीचे पहुंचते हैं। तब तक जनरेटर बंद हो जाता है। पूरे कैंपस में अंधेरा पसर जाता है। इमरजेंसी गेट की लाइटें भी बुझ जाती हैं। इस बीच बिजली कड़कने लगती। बरसात और आंधी की आहट से तीमारदार परेशान होने लगते हैं।

बयान
रात को अस्पताल का भ्रमण किया जाएगा। इस दौरान बंद पड़ी लाइटों को चिन्हित कर बदलवाया जाएगा। बाकी बदइंतजामियां भी दूर होंगी। रात में रोशनी के लिए जनरेटर है। इसे चलाया जाता है। कहीं कोई दिक्कत है तो दिखवाएंगे। - डा. रतन कुमार, सीएमएस , डा. राममनोहर लोहिया अस्पताल
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