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Farrukhabad News: स्वच्छता की गूंज के बीच सामुदायिक शौचालयों में ताले
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कायमगंज/राजेपुर। स्वच्छता की गूंज के बीच सामुदायिक शौचालयों में ताला न खुलने से सन्नाटा पसरा रहा। चारों तरफ प्रेरणा मिलने के बाद भी शौच के लिए खेतों का रुख करना ग्रामीणों की मजबूरी है। केयर टेकर व रखरखाव सामग्री पर प्रति माह नौ हजार रुपये खर्च हो रहे हैं।
कायमगंज ब्लाॅक क्षेत्र के गांव जिजपुरा में कंपिल रोड पर सामुदायिक शौचालय बना है। करीब डेढ़ बजे इस शौचालय में ताला पड़ा था। केयर टेकर का अता पता नहीं था। ग्रामीणों से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि यहां गांव की सोनी तैनात हैं। सामुदायिक शौचालय मात्र दिखावा बनकर रह गया है। ग्रामीणों को शौच की सुविधा नहीं मिल पा रही। यही हाल गांव लखनपुर, सत्तार नगर, पितौरा का था। गांव जिजपुरा निवासी बलवीर सिंह ने बताया कि सामुदायिक शौचालय अक्सर बंद रहता है।
गांव में बहुत से लोगों के पास शौचालय नहीं है। इससे मजबूर होकर ग्रामीणों को खुले में शौच जाना पड़ रहा है। गांव के ही सुमित कुमार ने बताया कि सुबह कुछ देर के लिए शौचालय खुलता है। इसके बाद ताला ही लगा रहता है। न खुलने का पता और न ही बंद होने का कोई समय है। सरकार के लाखों करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी बने शौचालय बिना इस्तेमाल के ही कंडम हो रहे हैं। सचिव विवेक बाबू मिश्रा ने बताया कि इस मामले में जानकारी की जाएगी। ग्रामीणों को सामुदायिक शौचालय की सुविधा दी जाएगी।
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वहीं, राजेपुर ब्लॉक क्षेत्र के गांव हमीरपुर सोमवंशी में सामुदायिक शौचालय ताला लगा था। शौचालय के आसपास कूड़ा के ढेर लगे थे। क्षेत्रीय ग्रामीणों की मानें बाढ़ प्रभावित अधिकतर ग्राम पंचायतों के सामुदायिक शौचालयों का लाेगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। जरूरत के समय अक्सर शौचालय में ताला लगा मिलता है। कई गांव में केयर टेकर सुबह देरी से शौचालय का ताला खोलते हैं। इससे ग्रामीणों को खेतों में शौच जाना मजबूरी होता है।
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कायमगंज ब्लाॅक क्षेत्र के गांव जिजपुरा में कंपिल रोड पर सामुदायिक शौचालय बना है। करीब डेढ़ बजे इस शौचालय में ताला पड़ा था। केयर टेकर का अता पता नहीं था। ग्रामीणों से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि यहां गांव की सोनी तैनात हैं। सामुदायिक शौचालय मात्र दिखावा बनकर रह गया है। ग्रामीणों को शौच की सुविधा नहीं मिल पा रही। यही हाल गांव लखनपुर, सत्तार नगर, पितौरा का था। गांव जिजपुरा निवासी बलवीर सिंह ने बताया कि सामुदायिक शौचालय अक्सर बंद रहता है।
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गांव में बहुत से लोगों के पास शौचालय नहीं है। इससे मजबूर होकर ग्रामीणों को खुले में शौच जाना पड़ रहा है। गांव के ही सुमित कुमार ने बताया कि सुबह कुछ देर के लिए शौचालय खुलता है। इसके बाद ताला ही लगा रहता है। न खुलने का पता और न ही बंद होने का कोई समय है। सरकार के लाखों करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी बने शौचालय बिना इस्तेमाल के ही कंडम हो रहे हैं। सचिव विवेक बाबू मिश्रा ने बताया कि इस मामले में जानकारी की जाएगी। ग्रामीणों को सामुदायिक शौचालय की सुविधा दी जाएगी।
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वहीं, राजेपुर ब्लॉक क्षेत्र के गांव हमीरपुर सोमवंशी में सामुदायिक शौचालय ताला लगा था। शौचालय के आसपास कूड़ा के ढेर लगे थे। क्षेत्रीय ग्रामीणों की मानें बाढ़ प्रभावित अधिकतर ग्राम पंचायतों के सामुदायिक शौचालयों का लाेगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। जरूरत के समय अक्सर शौचालय में ताला लगा मिलता है। कई गांव में केयर टेकर सुबह देरी से शौचालय का ताला खोलते हैं। इससे ग्रामीणों को खेतों में शौच जाना मजबूरी होता है।