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Farrukhabad News: पशुपालकों को नहीं मिल रहा बीमा क्लेम
Tue, 20 Jan 2026 01:28 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Tue, 20 Jan 2026 01:28 AM IST
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फोटो-5 बीमार पशु का इलाज करते पशु चिकित्साधिकारी डाॅ. अनुज दुबे। स्रोत: कर्मचारी
फर्रुखाबाद। फसल बीमा में घोटाले के बाद अब पशुपालकों को भी बीमा का लाभ देने में गच्चा दिया जा रहा है। जनपद में इस साल 14 ऐसे पशुओं की मौत हो चुकी है, जिनका बीमा कराया गया था। पशुपालकों ने क्लेम किया पर उन्हें अभी तक क्लेम नहीं मिला। पशुपालक अब मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। बीमा कंपनी के अधिकारी नियमों की दुहाई देकर क्लेम रिजेक्ट कर रहे हैं।
सरकार दुग्ध उत्पादन और गोवंश की नस्ल सुधार को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। इसमें अनुदान भी मिल रहा है। पशुपालकों को विषम परिस्थितियों से उबरने के लिए पशु बीमा कराया जा रहा है। इससे पशु की मौत पर पालक क्लेम लेकर घाटे से उबर सकें। जनपद में एचआईवीएल बीमा कंपनी पशुओं का बीमा कर रही है। जिले में करीब 2,000 पशुओं का बीमा कराया गया है। नियमानुसार बीमा होने के 21 दिन बाद पशु की मौत हो जाती है तो वह बीमा क्लेम लेने का हकदार बन जाता है। इसकी बैंक में 500 रुपये एक वर्ष की किस्त जमा होती है।
बताया कि पशु के जीवित रहने पर यह धनराशि बीमा कंपनी की हो जाती है। पशु पालन विभाग की ओर से पशुपालकों को बीमा कराने के लिए प्रेरित किया जाता है, जिससे उन्हें पशुधन में घाटा न हो। हालात यह हैं कि जनपद के बीमित 14 पशुओं की मौत होने पर पशु पालकों ने बीमा कंपनी के कर्मचारियों को सूचना दी।
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इसके बाद बीमा कर्मियों ने सर्वे कर फोटो ली और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ पशुपालकों ने क्लेम के लिए आवेदन किया। बीमा कंपनी ने सभी आवेदन रिजेक्ट कर दिए और नो क्लेम की रिपोर्ट भेज दी। इससे पशुपालक अब क्लेम लेने के लिए पशुपालन विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। जबकि पशुपालकों ने पशुओं की टैगिंग कराने के साथ नियमित टीकाकरण और बीमार होने पर उनका उपचार कराया है। योजना के तहत गाय के लिए 60 हजार रुपये और भैंस के लिए 70 हजार रुपये क्लेम निर्धारित है।
इन पशुपालकों को नहीं मिला क्लेम
पशुपालन विभाग के रिकार्ड के अनुसार 14 पशुपालकों को बीमा क्लेम नहीं मिला। इसमें रामदास, ओमप्रकाश, अखिलेश कुमार, मुन्नू सिंह, रामवीर, आरती, नन्हीं देवी, आदर्श कुमार, विजय प्रकाश, सुमंगल दीक्षित, आदित्य पांडेय, मंजू देवी, प्रतिमा मिश्रा, नन्हीं देवी शामिल हैं। खास बात तो यह है कि अब पशु पालक पशु चिकित्सकों को बीमा क्लेम दिलाने के लिए घेर रहे हैं।
इनकी भी सुनें
एचआईवीएल बीमा कंपनी के एजेंट अभिषेक राजपूत ने बताया कि उन्हें 50 रुपये प्रति बीमा पर कमीशन मिलता है। उन्होंने तीन पशुओं का क्लेम के लिए आवेदन किया है। किसी भी पशुपालक को मुआवजा नहीं दिया है। बीमा कंपनी के जिला स्तरीय अधिकारी भानु प्रताप और प्रदेश स्तर पर कमल तिवारी बेवजह के नियम बताकर आवेदन रिजेक्ट कर नो क्लेम लिखकर भेज रहे हैं।
वर्जन
वह इन मामलों को दिखवाएंगे। औपचारिकता पूरी कराकर पशुपालकों को नियमानुसार बीमा क्लेम दिलाया जाएगा। -कमल तिवारी, स्टेट मैनेजर बीमा कंपनी।
वर्जन
पशुपालकों को बीमा योजना का लाभ न मिलने की जानकारी मिली है। टीकाकरण की रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल पर फीड की जाती है। बीमा न मिलने की क्या वजह है, इसके लिए बीमा कंपनी के अधिकारियों को बुलाया है। उनसे बात कर समस्या का समाधान कराया जाएगा। -डॉ. धीरज कुमार शर्मा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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सरकार दुग्ध उत्पादन और गोवंश की नस्ल सुधार को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। इसमें अनुदान भी मिल रहा है। पशुपालकों को विषम परिस्थितियों से उबरने के लिए पशु बीमा कराया जा रहा है। इससे पशु की मौत पर पालक क्लेम लेकर घाटे से उबर सकें। जनपद में एचआईवीएल बीमा कंपनी पशुओं का बीमा कर रही है। जिले में करीब 2,000 पशुओं का बीमा कराया गया है। नियमानुसार बीमा होने के 21 दिन बाद पशु की मौत हो जाती है तो वह बीमा क्लेम लेने का हकदार बन जाता है। इसकी बैंक में 500 रुपये एक वर्ष की किस्त जमा होती है।
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बताया कि पशु के जीवित रहने पर यह धनराशि बीमा कंपनी की हो जाती है। पशु पालन विभाग की ओर से पशुपालकों को बीमा कराने के लिए प्रेरित किया जाता है, जिससे उन्हें पशुधन में घाटा न हो। हालात यह हैं कि जनपद के बीमित 14 पशुओं की मौत होने पर पशु पालकों ने बीमा कंपनी के कर्मचारियों को सूचना दी।
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इसके बाद बीमा कर्मियों ने सर्वे कर फोटो ली और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ पशुपालकों ने क्लेम के लिए आवेदन किया। बीमा कंपनी ने सभी आवेदन रिजेक्ट कर दिए और नो क्लेम की रिपोर्ट भेज दी। इससे पशुपालक अब क्लेम लेने के लिए पशुपालन विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। जबकि पशुपालकों ने पशुओं की टैगिंग कराने के साथ नियमित टीकाकरण और बीमार होने पर उनका उपचार कराया है। योजना के तहत गाय के लिए 60 हजार रुपये और भैंस के लिए 70 हजार रुपये क्लेम निर्धारित है।
इन पशुपालकों को नहीं मिला क्लेम
पशुपालन विभाग के रिकार्ड के अनुसार 14 पशुपालकों को बीमा क्लेम नहीं मिला। इसमें रामदास, ओमप्रकाश, अखिलेश कुमार, मुन्नू सिंह, रामवीर, आरती, नन्हीं देवी, आदर्श कुमार, विजय प्रकाश, सुमंगल दीक्षित, आदित्य पांडेय, मंजू देवी, प्रतिमा मिश्रा, नन्हीं देवी शामिल हैं। खास बात तो यह है कि अब पशु पालक पशु चिकित्सकों को बीमा क्लेम दिलाने के लिए घेर रहे हैं।
इनकी भी सुनें
एचआईवीएल बीमा कंपनी के एजेंट अभिषेक राजपूत ने बताया कि उन्हें 50 रुपये प्रति बीमा पर कमीशन मिलता है। उन्होंने तीन पशुओं का क्लेम के लिए आवेदन किया है। किसी भी पशुपालक को मुआवजा नहीं दिया है। बीमा कंपनी के जिला स्तरीय अधिकारी भानु प्रताप और प्रदेश स्तर पर कमल तिवारी बेवजह के नियम बताकर आवेदन रिजेक्ट कर नो क्लेम लिखकर भेज रहे हैं।
वर्जन
वह इन मामलों को दिखवाएंगे। औपचारिकता पूरी कराकर पशुपालकों को नियमानुसार बीमा क्लेम दिलाया जाएगा। -कमल तिवारी, स्टेट मैनेजर बीमा कंपनी।
वर्जन
पशुपालकों को बीमा योजना का लाभ न मिलने की जानकारी मिली है। टीकाकरण की रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल पर फीड की जाती है। बीमा न मिलने की क्या वजह है, इसके लिए बीमा कंपनी के अधिकारियों को बुलाया है। उनसे बात कर समस्या का समाधान कराया जाएगा। -डॉ. धीरज कुमार शर्मा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी