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जांबाजों के आगे पाक ने 14 दिन में ही घुटने टेके
ब्यूरो/अमर उजाला,फर्रुखाबाद
Updated Tue, 15 Dec 2015 11:48 PM IST
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फर्रुखाबाद। भारतीय सेना के जांबाजों ने अपनी बेमिसाल बहादुरी और शहादत से 1971 के युद्ध में 14 दिन में ही पाकिस्तानी सेना को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था।
युद्ध में फतेहगढ़ स्थित सिखलाई रेजीमेंट के 102 जवान और अफसर शहीद हुए थे। इनमें 32 रणबांकुरे पूर्वी सेक्टर में पाकिस्तानियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे। भारतीय सैनिकों की दिलेरी और बलिदान की बदौलत ही 16 दिसंबर को ढाका में 93 पाकिस्तानी फौजियों ने लेफ्टीनेंट जरनल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने हथियार डाले थे।
फतेहगढ़ स्थित सिखलाई रेजीमेंट की कई यूनिटों ने 1971 के ऐतिहासिक युद्ध में भाग लिया था। रेजीमेंट के बहादुर अफसरों और जवानों ने कई मोर्चों पर पाक सेना को धूल चटाकर बांगलादेश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। लेफ्टिनेंट जरनल जगजीत सिंह अरोड़ा के नेतृत्व में पाक सेना पर भारतीय जवान कहर बनकर टूट पड़े थे। सिखलाई रेजीमेंट की 8वीं व 10 वीं यूनिट के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए फतेहपुर और पर्वतअली सेक्टर को कब्जे में लेकर पाक सेना की कमर तोड़ दी।
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वहीं 7वी रेजीमेंट ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जयश्री पोस्ट पर कब्जा कर बहादुरी की मिसाल पेश की। सिखलाई रेजीमेंट के 102 जवान युद्ध में शहीद हुए थे। इनमें 32 जवान पूर्वी सेक्टर में शहीद हुए थे। इसके अलावा सैकडो़ं जवान घायल हुए थे।
पूर्व सैनिक धूमधाम से मनाएंगे विजय दिवस
फर्रुखाबाद। पूर्व सैनिक सेवा परिषद ने विजय दिवस धूमधाम से मनाने की तैयारी की है। परिषद के पदाधिकारी कैप्टन डीएस राठौर कहते हैं सीमित संसाधनों के बावजूद इंफेट्री की बहादुरी और ऊंचे मनोबल की वजह से पाकिस्तानी फौजी कई जगह मोर्चा छोड़ कर ही भाग गए थे। इस जीत ने भारत को दुनिया में अलग मुकाम दिलाया। विजय दिवस पर युद्ध में शहीद हुए साथियों को याद कर सिर फख्र से ऊंचा हो जाता है। इस ऐतिहासिक जीत की याद में ही देश खास तौर पर भारतीय सेना के तीनों अंग विजय दिवस पर शहीदों को याद करते हैं।
पूर्वी व पश्चिमी क्षेत्र में लड़ गया था यूद्ध
सिखलाई रेजीमेंट सेंटर के एडज्यूटेंट लेफ्टिनेंट कर्नल इंद्रजीत सिंह बताते हैं 1971 का युद्ध मुख्य रूप से पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्र में लड़ा गया था। पूर्वी क्षेत्र में सिखलाई रेजीमेंट की दूसरी, चौथी और छठी यूनिट के जवान तैनात किए गए थे। ब्रिगेडियर संत सिंह की अगुवाई में जवानों ने दुश्मन के छक्के छुडा दिए थे। अदम्य साहस के धनी ब्रिगेडियर संत सिंह भारतीय सैनिकों के साथ ढाका तक जा पहंचे थे।
सरकार ने उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया था। 1965 की लड़ाई में ऑबहादुरी के लिए उन्हें पहली बार महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। एडज्यूटेंट ने बताया युद्ध के दौरान पाक फौजों के बंकरों से काफी तादाद में सामान बरामद किया गया था। यह सामान फतेहगढ़ स्थित संग्रहालय में यहां आने वाले दर्शकों को भारतीय सैनिकों की बहादुरी की याद दिलाता है।
10 सिखलाई को मिला था बैटिल आनर
सिखलाई रेजीमेंट सेंटर के एडज्यूटेंट लेफ्टिनेंट कर्नल इंद्रजीत सिंह के मुताबिक दो सिखलाई रेजीमेंट को चार सेना मेडल, चार सिखलाई रेजीमेंट को वीरता पदक, छह सिखलाई रेजीमेंट को एक सेना मेडल, तीन सिखलाई रेजीमेंट को दो वीर चक्र और सेना मेडल, सात सिखलाई को एक सेना मेडल, आठ सिखलाई को एक महावीर चक्र, पांच वीर चक्र तथा दो सेना मेडल, 10 सिखलाई को तीन वीर चक्र के साथ चार सेना मेडल और 11 सिखलाई रेजीमेंट को एक सेना मेडल देकर सम्मानित किया था। इसके अलावा आठ और 10 सिखलाई रेजीमेंट को बैटिल आनर का खिताब दिया गया था। आठ सिखलाई रेजीमेंट को फतेहपुर तथा 10 सिखलाई रेजीमेंट को पर्वतअली बैटिल सम्मान दिया गया।
बहादुरी की कहानी सुनाता है वार मेमोरियल
सिखलाई रेजीमेंट सेंटर के संग्रहालय में 1971 के युद्ध में पाकिस्तानी सेना से बरामद किया गया सामान बड़े जतन से रखा गया है। इसे देख कर युद्ध में भारतीय सेना की जवानों की बहादुरी का अंदाजा लगाया जा सकता है। जंग के दौरान पाकिस्तानी बंकर में सन 1357 में छपी कुरान शरीफ के अलावा, टेलीफोन, कुफरी, सड़क के नक्शे प्रदर्शित किए गए हैं।
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युद्ध में फतेहगढ़ स्थित सिखलाई रेजीमेंट के 102 जवान और अफसर शहीद हुए थे। इनमें 32 रणबांकुरे पूर्वी सेक्टर में पाकिस्तानियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे। भारतीय सैनिकों की दिलेरी और बलिदान की बदौलत ही 16 दिसंबर को ढाका में 93 पाकिस्तानी फौजियों ने लेफ्टीनेंट जरनल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने हथियार डाले थे।
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फतेहगढ़ स्थित सिखलाई रेजीमेंट की कई यूनिटों ने 1971 के ऐतिहासिक युद्ध में भाग लिया था। रेजीमेंट के बहादुर अफसरों और जवानों ने कई मोर्चों पर पाक सेना को धूल चटाकर बांगलादेश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। लेफ्टिनेंट जरनल जगजीत सिंह अरोड़ा के नेतृत्व में पाक सेना पर भारतीय जवान कहर बनकर टूट पड़े थे। सिखलाई रेजीमेंट की 8वीं व 10 वीं यूनिट के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए फतेहपुर और पर्वतअली सेक्टर को कब्जे में लेकर पाक सेना की कमर तोड़ दी।
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वहीं 7वी रेजीमेंट ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जयश्री पोस्ट पर कब्जा कर बहादुरी की मिसाल पेश की। सिखलाई रेजीमेंट के 102 जवान युद्ध में शहीद हुए थे। इनमें 32 जवान पूर्वी सेक्टर में शहीद हुए थे। इसके अलावा सैकडो़ं जवान घायल हुए थे।
पूर्व सैनिक धूमधाम से मनाएंगे विजय दिवस
फर्रुखाबाद। पूर्व सैनिक सेवा परिषद ने विजय दिवस धूमधाम से मनाने की तैयारी की है। परिषद के पदाधिकारी कैप्टन डीएस राठौर कहते हैं सीमित संसाधनों के बावजूद इंफेट्री की बहादुरी और ऊंचे मनोबल की वजह से पाकिस्तानी फौजी कई जगह मोर्चा छोड़ कर ही भाग गए थे। इस जीत ने भारत को दुनिया में अलग मुकाम दिलाया। विजय दिवस पर युद्ध में शहीद हुए साथियों को याद कर सिर फख्र से ऊंचा हो जाता है। इस ऐतिहासिक जीत की याद में ही देश खास तौर पर भारतीय सेना के तीनों अंग विजय दिवस पर शहीदों को याद करते हैं।
पूर्वी व पश्चिमी क्षेत्र में लड़ गया था यूद्ध
सिखलाई रेजीमेंट सेंटर के एडज्यूटेंट लेफ्टिनेंट कर्नल इंद्रजीत सिंह बताते हैं 1971 का युद्ध मुख्य रूप से पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्र में लड़ा गया था। पूर्वी क्षेत्र में सिखलाई रेजीमेंट की दूसरी, चौथी और छठी यूनिट के जवान तैनात किए गए थे। ब्रिगेडियर संत सिंह की अगुवाई में जवानों ने दुश्मन के छक्के छुडा दिए थे। अदम्य साहस के धनी ब्रिगेडियर संत सिंह भारतीय सैनिकों के साथ ढाका तक जा पहंचे थे।
सरकार ने उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया था। 1965 की लड़ाई में ऑबहादुरी के लिए उन्हें पहली बार महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। एडज्यूटेंट ने बताया युद्ध के दौरान पाक फौजों के बंकरों से काफी तादाद में सामान बरामद किया गया था। यह सामान फतेहगढ़ स्थित संग्रहालय में यहां आने वाले दर्शकों को भारतीय सैनिकों की बहादुरी की याद दिलाता है।
10 सिखलाई को मिला था बैटिल आनर
सिखलाई रेजीमेंट सेंटर के एडज्यूटेंट लेफ्टिनेंट कर्नल इंद्रजीत सिंह के मुताबिक दो सिखलाई रेजीमेंट को चार सेना मेडल, चार सिखलाई रेजीमेंट को वीरता पदक, छह सिखलाई रेजीमेंट को एक सेना मेडल, तीन सिखलाई रेजीमेंट को दो वीर चक्र और सेना मेडल, सात सिखलाई को एक सेना मेडल, आठ सिखलाई को एक महावीर चक्र, पांच वीर चक्र तथा दो सेना मेडल, 10 सिखलाई को तीन वीर चक्र के साथ चार सेना मेडल और 11 सिखलाई रेजीमेंट को एक सेना मेडल देकर सम्मानित किया था। इसके अलावा आठ और 10 सिखलाई रेजीमेंट को बैटिल आनर का खिताब दिया गया था। आठ सिखलाई रेजीमेंट को फतेहपुर तथा 10 सिखलाई रेजीमेंट को पर्वतअली बैटिल सम्मान दिया गया।
बहादुरी की कहानी सुनाता है वार मेमोरियल
सिखलाई रेजीमेंट सेंटर के संग्रहालय में 1971 के युद्ध में पाकिस्तानी सेना से बरामद किया गया सामान बड़े जतन से रखा गया है। इसे देख कर युद्ध में भारतीय सेना की जवानों की बहादुरी का अंदाजा लगाया जा सकता है। जंग के दौरान पाकिस्तानी बंकर में सन 1357 में छपी कुरान शरीफ के अलावा, टेलीफोन, कुफरी, सड़क के नक्शे प्रदर्शित किए गए हैं।