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कायाकल्प के नाम पर की खानापूरी
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प्राथमिक विद्यालय महमदपुर गढिया में अधूरा पड़ा हैंडवॉश यूनिट। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
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अमृतपुर। क्षेत्र के गांव महमदपुर गढ़िया स्थित प्राथमिक विद्यालय में कायाकल्प के तहत कराए कार्यअधूरे पड़े हैं। इससे रुपये खर्च होने के बाद भी बच्चों को उनका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
वर्ष 2020-21 में ग्राम पंचायतों से बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों का कायाकल्प कराया गया। स्कूलों की हालत सुधारने के लिए लाखों रुपये खर्च किए गए। इसके बाद भी कई स्कूलों की सूरत नहीं सुधर सकी है। विकास खंड राजेपुर के प्राथमिक विद्यालय महमदपुर गढ़िया में ग्राम पंचायत से कायाकल्प के तहत काम कराया गया है। यहां हैंडवॉश सिस्टम व शौचालय अधूरे पड़े हैं। रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाने के नाम पर गड्ढा खोद कर छोड़ दिया गया।
उन्हें बंद करने के लिए पटियां रखी दी गईं। उन्हें भी सीमेंट से जाम नहीं किया गया है। विद्यालय के परिसर में इंटरलॉकिंग ईंटें भी नहीं बिछाई गई हैं। गांव का गंदा पानी स्कूल में आ रहा है। पानी निकालने के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं कराई गई।
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प्राथमिक विद्यालय में बने पांच कमरे जर्जर हैं। कमरों की दीवारें चारों ओर से चटकी हुई हैं। ईंटें व प्लास्टर नीचे गिर रहा है। उन्हीं कमरों के सामने रसोई घर से बच्चे एमडीएम लेने जाते हैं। जर्जर कमरे कभी भी गिर सकते हैं। इससे हादसा हो सकता है। विद्यालय का खंड शिक्षा अधिकारी व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कई बार निरीक्षण भी कर चुके हैं।
विद्यालय की प्रधानाचार्य अंजना कुमारी भी जर्जर कमरों को ध्वस्त कराए जाने के लिए अधिकारियों को कई बार प्रार्थना पत्र दे चुकी हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सभी कमरे वर्ष 2009, 2010 व 2011 के बने थे। इस विद्यालय में 107 छात्र छात्राएं पंजीकृत है। बच्चों के बैठने के लिए कमरे नहीं हैं।
‘कायाकल्प का अधूरा काम पूरा कराने के लिए डीपीआरओ को पत्र लिखा जाएगा। जर्जर कमरों को नीलाम कराने की प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाएगी।’
- लालजी यादव, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी फर्रुखाबाद
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वर्ष 2020-21 में ग्राम पंचायतों से बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों का कायाकल्प कराया गया। स्कूलों की हालत सुधारने के लिए लाखों रुपये खर्च किए गए। इसके बाद भी कई स्कूलों की सूरत नहीं सुधर सकी है। विकास खंड राजेपुर के प्राथमिक विद्यालय महमदपुर गढ़िया में ग्राम पंचायत से कायाकल्प के तहत काम कराया गया है। यहां हैंडवॉश सिस्टम व शौचालय अधूरे पड़े हैं। रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाने के नाम पर गड्ढा खोद कर छोड़ दिया गया।
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उन्हें बंद करने के लिए पटियां रखी दी गईं। उन्हें भी सीमेंट से जाम नहीं किया गया है। विद्यालय के परिसर में इंटरलॉकिंग ईंटें भी नहीं बिछाई गई हैं। गांव का गंदा पानी स्कूल में आ रहा है। पानी निकालने के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं कराई गई।
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प्राथमिक विद्यालय में बने पांच कमरे जर्जर हैं। कमरों की दीवारें चारों ओर से चटकी हुई हैं। ईंटें व प्लास्टर नीचे गिर रहा है। उन्हीं कमरों के सामने रसोई घर से बच्चे एमडीएम लेने जाते हैं। जर्जर कमरे कभी भी गिर सकते हैं। इससे हादसा हो सकता है। विद्यालय का खंड शिक्षा अधिकारी व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कई बार निरीक्षण भी कर चुके हैं।
विद्यालय की प्रधानाचार्य अंजना कुमारी भी जर्जर कमरों को ध्वस्त कराए जाने के लिए अधिकारियों को कई बार प्रार्थना पत्र दे चुकी हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सभी कमरे वर्ष 2009, 2010 व 2011 के बने थे। इस विद्यालय में 107 छात्र छात्राएं पंजीकृत है। बच्चों के बैठने के लिए कमरे नहीं हैं।
‘कायाकल्प का अधूरा काम पूरा कराने के लिए डीपीआरओ को पत्र लिखा जाएगा। जर्जर कमरों को नीलाम कराने की प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाएगी।’
- लालजी यादव, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी फर्रुखाबाद

प्राथमिक विद्यालय महमदपुर गढिया का जर्जर अतिरिक्त कक्ष। संवाद- फोटो : FARRUKHABAD