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Farrukhabad News: कस्तूरबा विद्यालयों में नहीं पहुंचा राशन, छात्राओं के भोजन का संकट
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फोटो-3 शमसाबाद स्थित कस्तूरबा गांधी विद्यालय। संवाद
- फोटो : रामदासपुरा में निर्माणाधीन सेतु का निरीक्षण करते डीएम। स्रोत प्रशासन
फर्रुखाबाद। पांचों कस्तूरबा गांधी विद्यालयों की हालत खराब है। विद्यालय खुले चार दिन बीत चुके हैं पर दो में अभी तक राशन ही नहीं पहुंचा है। रसोइया रखे हुए चावल उबाल कर छात्राओं को खिलाने को मजबूर है। पंजीकरण के सापेक्ष बहुत कम छात्राएं विद्यालय पहुंचीं।
विद्यालयों में राशन पहुंचने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग ने ठेकेदार को दी है। लेकिन कमालगंज व शमसाबाद के कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में राशन शनिवार दोपहर तक नहीं पहुंचा। वार्डन ने छात्राओं के लिए किसी तरह भोजन की व्यवस्था की। ।
कमालगंज कस्तूरबा गांधी विद्यालय की वार्डन रश्मि ने बताया कि उनके यहां 100 छात्राएं पंजीकृत हैं। शनिवार को 22 छात्राएं विद्यालय में पहुंचीं। राशन न आने से उनके भोजन के लिए खुद के रुपये से चावल व आटा बाजार से मंगाया था। राजेपुर में 100 के पंजीकरण होने के बाद 12 छात्राएं ही पहुंचीं। नवाबगंज में 95 में से 10 छात्राएं ही उपस्थित रहीं। इन दोनों विद्यालयों में शुक्रवार शाम को राशन पहुंचा। शमसाबाद में 100 में से पहुंचीं पांच छात्राओं के लिए राशन न होने पर वार्डन संध्या ने बाजार से राशन मंगवाया। कायमगंज कस्तूरबा विद्यालय की वार्डन रेचन कटियार का कहना है कि उन्होंने दो जुलाई को राशन मंगवा लिया था। उनके यहां 100 में से 7 छात्राएं ही अभी आई हैं।
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बीएसए विश्वनाथ प्रताप सिंह ने बताया कि राशन पहुंचाने का टेंडर 30 जून को हुआ था। एक सप्ताह में राशन पहुंचाना होता है। सभी विद्यालयों में आपात स्थिति के लिए 20 हजार रुपये अलग से दिए जाते हैं। यदि कहीं राशन नहीं पहुंचा है तो वहां उस मद से खरीदा जा सकता है। अधिकांश जगह शनिवार को राशन पहुंच गया है।
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विद्यालयों में राशन पहुंचने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग ने ठेकेदार को दी है। लेकिन कमालगंज व शमसाबाद के कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में राशन शनिवार दोपहर तक नहीं पहुंचा। वार्डन ने छात्राओं के लिए किसी तरह भोजन की व्यवस्था की। ।
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कमालगंज कस्तूरबा गांधी विद्यालय की वार्डन रश्मि ने बताया कि उनके यहां 100 छात्राएं पंजीकृत हैं। शनिवार को 22 छात्राएं विद्यालय में पहुंचीं। राशन न आने से उनके भोजन के लिए खुद के रुपये से चावल व आटा बाजार से मंगाया था। राजेपुर में 100 के पंजीकरण होने के बाद 12 छात्राएं ही पहुंचीं। नवाबगंज में 95 में से 10 छात्राएं ही उपस्थित रहीं। इन दोनों विद्यालयों में शुक्रवार शाम को राशन पहुंचा। शमसाबाद में 100 में से पहुंचीं पांच छात्राओं के लिए राशन न होने पर वार्डन संध्या ने बाजार से राशन मंगवाया। कायमगंज कस्तूरबा विद्यालय की वार्डन रेचन कटियार का कहना है कि उन्होंने दो जुलाई को राशन मंगवा लिया था। उनके यहां 100 में से 7 छात्राएं ही अभी आई हैं।
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बीएसए विश्वनाथ प्रताप सिंह ने बताया कि राशन पहुंचाने का टेंडर 30 जून को हुआ था। एक सप्ताह में राशन पहुंचाना होता है। सभी विद्यालयों में आपात स्थिति के लिए 20 हजार रुपये अलग से दिए जाते हैं। यदि कहीं राशन नहीं पहुंचा है तो वहां उस मद से खरीदा जा सकता है। अधिकांश जगह शनिवार को राशन पहुंच गया है।