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गंगा की शरहद में नहीं लगेंगे उद्योग व कारखाने
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पांचाल घाट पर गंगा किनारे लगाया गया पोल। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। स्वच्छ गंगा अभियान को आगे बढ़ाने के लिए नदी के करीब उद्योग लगाने पर सख्त की जाएगी। पिछले 25 वर्षों में जहां तक गंगा की बाढ़ का पानी पहुंचा है वहां तक कारखाने और उद्योग नहीं लगाए जा सकेंगे। हरिद्वार से कोलकाता तक गंगा के दोनों किनारों पर खंभे लगाए जा रहे हैं। जिले में खंभे लगाने का काम शुरू कर दिया गया है।
शहरों में गंगा किनारे उद्योग व कारखाने खोले जाने से इनका गंदा पानी सीधे गंगा में ही गिर रहा है। इससे कभी अमृत कहा जाने वाला गंगा का जल प्रदूषित हो रहा है। केंद्र सरकार गंगा स्वच्छता पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। इसके बावजूद जल प्रदूषण मुक्त नहीं हो पा रहा है। अब भविष्य में जल और प्रदूषित न हो इसके लिए गंगा सुरक्षा का काम शुरू कर दिया गया है। इसके तहत गंगा के प्रारंभिक छोर उत्तराखंड हरिद्वार से अंतिम छोर कोलकाता तक गंगा के किनारों को दो जोन में बांटा गया है। आबादी वाले रेगुलेटरी जोन व खाली पड़े नो डेवलपमेंट जोन में खंभे लगाने का काम किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में गंगा की धारा करीब 2000 किमी दूरी में बहती है। इस बीच की दूरी में खंभे लगाने में आठ करोड़ रुपये खर्च होंगे। 25 वर्ष में बाढ़ के दौरान गंगा का पानी जहां तक पहुंचा है, वहां तक खंभे लगाकर चिह्नांकन किया जा रहा है।
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जनपद की सीमा में लगेंगे 1587 खंभे
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता द्रुण कुमार ने बताया कि जिले में गंगा की धारा की 85 किमी लंबाई में है। इस बीच 1587 खंभे लगाए जाएंगे। इस पर करीब 25 लाख रुपये खर्च होंगे। उन्होंने बताया कि 25 वर्ष में गंगा का जहां तक पानी पहुंचा है, उस क्षेत्र में कोई भी उद्योग, कारखाना या भवन का निर्माण नहीं हो सकेगा। अतिक्रमण रोकने, गंगा सुरक्षा व स्वच्छता के लिए गंगा मैटर के तहत एनजीटी की ओर से सिंचाई विभाग को खंभे लगाने का काम सौंपा गया है।
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शहरों में गंगा किनारे उद्योग व कारखाने खोले जाने से इनका गंदा पानी सीधे गंगा में ही गिर रहा है। इससे कभी अमृत कहा जाने वाला गंगा का जल प्रदूषित हो रहा है। केंद्र सरकार गंगा स्वच्छता पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। इसके बावजूद जल प्रदूषण मुक्त नहीं हो पा रहा है। अब भविष्य में जल और प्रदूषित न हो इसके लिए गंगा सुरक्षा का काम शुरू कर दिया गया है। इसके तहत गंगा के प्रारंभिक छोर उत्तराखंड हरिद्वार से अंतिम छोर कोलकाता तक गंगा के किनारों को दो जोन में बांटा गया है। आबादी वाले रेगुलेटरी जोन व खाली पड़े नो डेवलपमेंट जोन में खंभे लगाने का काम किया जा रहा है।
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उत्तर प्रदेश में गंगा की धारा करीब 2000 किमी दूरी में बहती है। इस बीच की दूरी में खंभे लगाने में आठ करोड़ रुपये खर्च होंगे। 25 वर्ष में बाढ़ के दौरान गंगा का पानी जहां तक पहुंचा है, वहां तक खंभे लगाकर चिह्नांकन किया जा रहा है।
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जनपद की सीमा में लगेंगे 1587 खंभे
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता द्रुण कुमार ने बताया कि जिले में गंगा की धारा की 85 किमी लंबाई में है। इस बीच 1587 खंभे लगाए जाएंगे। इस पर करीब 25 लाख रुपये खर्च होंगे। उन्होंने बताया कि 25 वर्ष में गंगा का जहां तक पानी पहुंचा है, उस क्षेत्र में कोई भी उद्योग, कारखाना या भवन का निर्माण नहीं हो सकेगा। अतिक्रमण रोकने, गंगा सुरक्षा व स्वच्छता के लिए गंगा मैटर के तहत एनजीटी की ओर से सिंचाई विभाग को खंभे लगाने का काम सौंपा गया है।