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एचडीएफसी अरगो के हवाले है फसल बीमा, मुलाजिम कब आते जाते, पता नहीं
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Sun, 05 Apr 2015 11:45 PM IST
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फसल बीमा कंपनी की हालत जिले में मुसाफिर जैसी है। जिले में कंपनी का कोई
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ठिकाना नहीं है। कंपनी के मुलाजिम कब आते और जाते हैं, किसान जान ही नहीं
पाते हैं। कंपनी के मुलाजिमों के न मिलने से किसान इन्हें अपना दर्द भी
नहीं सुना सकते हैं। इनके सामने मुश्किल है कि बीमा क्लेम कहां करें। बैंक
इन्हें बीमा कंपनी के लिए रेफर कर देती हैं और कंपनी का जिले में ठिकाना ही
नहीं है।
फसल बीमा का जिम्मा एचडीएफसी अरगो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को दिया गया है। कंपनी का कार्यालय लखनऊ में है। जिले में इसकी कोई शाखा नहीं है। फर्रुखाबाद कंपनी के मुलाजिम लल्लन बिहारी के हवाले है। इनके जिले में बैठने के दिन और जगह भी निर्धारित नहीं है। यह आते हैं और साहबों से मिलकर रवाना हो जाते हैं। लल्लन बिहारी को फसल बीमा
कराने वाले किसानों की भी जानकारी नहीं है। इस बावत पूछने पर जवाब होता है, अभी कई बैंकों ने घोषणा पत्र नहीं दिए हैं। इससे संख्या नहीं पता है। हमें ज्यादा कुछ बताने की इजाजत नहीं है। बड़े साहब यानी रीजनल प्रभारी सुमित से बात कर लें। बड़े साहब लगातार बिजी मिले। इन्हें भी नुकसानी के सर्वेे के बारे में भी मालुमात नहीं है।
बीमा कंपनी के इस रवैये से किसानों के लिए फसल बीमा का क्लेम दूर की कौड़ी है। जिले के किसानों का हाल यह है कि उन्हें बेमौसम बरसात ने तबाह कर दिया है। इस साल 50 करोड़ रुपये के केसीसी पर किसानों ने 30 लाख रुपया प्रीमियम भरा है। सहकारी समितियों से लोन यानी खाद, बीज लेने पर भी फसल बीमा का प्रावधान है। किसान समितियों को फसल
बीमा के लिए प्रार्थना पत्र दे सकते हैं। जिले की 70 सहकारी समितियों से 1 लाख 75 हजार किसान लेन देन करते हैं। यानी यह भी फसल बीमा के दायरे में हैं। जिले में कुल किसानों की संख्या तकरीबन 231093 है। अब फसल बीमा कराने वाले किसान भटक रहे हैं। इन्हें क्लेम को लेकर भी जानकारी देने वाला भी कोई नहीं है।
केस: 1
राजेपुर के किसान रामशंकर यादव के पास 80 बीघा जमीन है। इनके किसान क्रेडिट कार्ड की लोन लिमिट तीन लाख रु पये है। इस बार 6829 रुपया फसल बीमा का प्रीमियम दिया। इनका कहना है कि फसल में खासा नुकसान हुआ। क्लेम करना चाहते हैं। बीमा कंपनी का पता नहीं है।
केस: 2
शिववीर सिंह के पास 25 बीघा जमीन है। इनके केसीसी की लिमिट एक लाख 70 हजार रुपया है। नियम के तहत इनकी फसल का भी बीमा है। इनके खाते से एक हजार रु पया प्रीमियम काटा गया।
केस: 3
रायपुर गांव के रामसिंह की केसीसी की लिमिट एक लाख रुपया है। इनकी फसल का भी बीमा है। यह बताते हैं कि 2 एकड़ में गेहूं की फसल बोई थी। यह बर्बाद हो गई है। बीमा क्लेम के लिए बैंक गए। वहां से कह दिया कि बीमा कंपनी ने अभी सर्वे ही नहीं किया है।
वर्जन
मामला को दिखवाया जाएगा। इस संबंध में डीडी कृषि से बात की जाएगी। जो किसान पात्र होंगे उन्हें क्लेम दिलाया जाएगा।-मनोज कुमार सिंघल, एडीएम
फसल बीमा का जिम्मा एचडीएफसी अरगो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को दिया गया है। कंपनी का कार्यालय लखनऊ में है। जिले में इसकी कोई शाखा नहीं है। फर्रुखाबाद कंपनी के मुलाजिम लल्लन बिहारी के हवाले है। इनके जिले में बैठने के दिन और जगह भी निर्धारित नहीं है। यह आते हैं और साहबों से मिलकर रवाना हो जाते हैं। लल्लन बिहारी को फसल बीमा
कराने वाले किसानों की भी जानकारी नहीं है। इस बावत पूछने पर जवाब होता है, अभी कई बैंकों ने घोषणा पत्र नहीं दिए हैं। इससे संख्या नहीं पता है। हमें ज्यादा कुछ बताने की इजाजत नहीं है। बड़े साहब यानी रीजनल प्रभारी सुमित से बात कर लें। बड़े साहब लगातार बिजी मिले। इन्हें भी नुकसानी के सर्वेे के बारे में भी मालुमात नहीं है।
बीमा कंपनी के इस रवैये से किसानों के लिए फसल बीमा का क्लेम दूर की कौड़ी है। जिले के किसानों का हाल यह है कि उन्हें बेमौसम बरसात ने तबाह कर दिया है। इस साल 50 करोड़ रुपये के केसीसी पर किसानों ने 30 लाख रुपया प्रीमियम भरा है। सहकारी समितियों से लोन यानी खाद, बीज लेने पर भी फसल बीमा का प्रावधान है। किसान समितियों को फसल
बीमा के लिए प्रार्थना पत्र दे सकते हैं। जिले की 70 सहकारी समितियों से 1 लाख 75 हजार किसान लेन देन करते हैं। यानी यह भी फसल बीमा के दायरे में हैं। जिले में कुल किसानों की संख्या तकरीबन 231093 है। अब फसल बीमा कराने वाले किसान भटक रहे हैं। इन्हें क्लेम को लेकर भी जानकारी देने वाला भी कोई नहीं है।
केस: 1
राजेपुर के किसान रामशंकर यादव के पास 80 बीघा जमीन है। इनके किसान क्रेडिट कार्ड की लोन लिमिट तीन लाख रु पये है। इस बार 6829 रुपया फसल बीमा का प्रीमियम दिया। इनका कहना है कि फसल में खासा नुकसान हुआ। क्लेम करना चाहते हैं। बीमा कंपनी का पता नहीं है।
केस: 2
शिववीर सिंह के पास 25 बीघा जमीन है। इनके केसीसी की लिमिट एक लाख 70 हजार रुपया है। नियम के तहत इनकी फसल का भी बीमा है। इनके खाते से एक हजार रु पया प्रीमियम काटा गया।
केस: 3
रायपुर गांव के रामसिंह की केसीसी की लिमिट एक लाख रुपया है। इनकी फसल का भी बीमा है। यह बताते हैं कि 2 एकड़ में गेहूं की फसल बोई थी। यह बर्बाद हो गई है। बीमा क्लेम के लिए बैंक गए। वहां से कह दिया कि बीमा कंपनी ने अभी सर्वे ही नहीं किया है।
वर्जन
मामला को दिखवाया जाएगा। इस संबंध में डीडी कृषि से बात की जाएगी। जो किसान पात्र होंगे उन्हें क्लेम दिलाया जाएगा।-मनोज कुमार सिंघल, एडीएम