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Farrukhabad News: बिजली गुल होने पर नहीं चलता जेनरेटर, स्टाफ व मरीज परेशान
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फर्रुखाबाद। लोहिया अस्पताल की बिजली गुल होने के बाद जेनरेटर नहीं चलाया जाता है। वार्डों में मरीज और ड्यूटी स्टाफ अंधेरे में मोबाइल की रोशनी में काम करने को मजबूर है। मरीज और तीमारदार गैलरी में टहल कर समय गुजारते हैं।
अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए तीन बड़े जेनरेटर लगे हैं। उनको चलाने के लिए हर माह 45 हजार रुपये डीजल के लिए भी शासन से आते हैं। इसके बावजूद जेनरेटर नहीं चलाया जाता है। रात करीब पौने नौ बजे बिजली गुल हो गई। इसके बाद वार्डों के पंखे और बल्ब बंद हो गए। कुछ वार्डों में इन्वर्टर से एक-एक बल्ब जलता रहा। स्टाफ रूम में अंधेरा होने के कारण ड्यूटी स्टाफ नर्स मोबाइल की रोशनी में कागजी कार्रवाई पूरी करने को मजबूर हो गईं।
बिजली गुल होने के बाद वार्डों में भर्ती मरीज गर्मी से परेशान हो गए। आर्थो के मरीजों को छोड़ अन्य मरीज व तीमारदार बेड से उठकर गैलरी में टहलने को मजबूर हो गए। करीब एक घंटे बाद बिजली आने पर ही मरीजों, तीमारदारों और स्टाफ ने राहत की सांस ली। सीएमएस डॉ. जगमोहन शर्मा ने बताया कि बिजली जाने पर जेनरेटर न चलने की जानकारी नहीं है।
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अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए तीन बड़े जेनरेटर लगे हैं। उनको चलाने के लिए हर माह 45 हजार रुपये डीजल के लिए भी शासन से आते हैं। इसके बावजूद जेनरेटर नहीं चलाया जाता है। रात करीब पौने नौ बजे बिजली गुल हो गई। इसके बाद वार्डों के पंखे और बल्ब बंद हो गए। कुछ वार्डों में इन्वर्टर से एक-एक बल्ब जलता रहा। स्टाफ रूम में अंधेरा होने के कारण ड्यूटी स्टाफ नर्स मोबाइल की रोशनी में कागजी कार्रवाई पूरी करने को मजबूर हो गईं।
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बिजली गुल होने के बाद वार्डों में भर्ती मरीज गर्मी से परेशान हो गए। आर्थो के मरीजों को छोड़ अन्य मरीज व तीमारदार बेड से उठकर गैलरी में टहलने को मजबूर हो गए। करीब एक घंटे बाद बिजली आने पर ही मरीजों, तीमारदारों और स्टाफ ने राहत की सांस ली। सीएमएस डॉ. जगमोहन शर्मा ने बताया कि बिजली जाने पर जेनरेटर न चलने की जानकारी नहीं है।
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