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डीएम के आदेश पर भी नहीं हुई प्रधानों और सचिवों पर कार्रवाई

Thu, 16 Jun 2022 12:03 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jun 2022 12:03 AM IST
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फर्रुखाबाद। विकास कार्यों में लाखों के गबन में फंसे प्रधानों और सचिवों को बचाने का प्रयास जारी है। जिलाधिकारी के आदेश के चार दिन बाद भी जिला विकास अधिकारी की ओर से इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि स्पष्ट आदेश हैं कि इनसे रिकवरी कर सचिवों को निलंबित किया जाए।
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ब्लाक राजेपुर की ग्राम पंचायत भुवनपुर ताजपुर में शौचालय निर्माण में प्रधान व सचिवों ने लाखों का गोलमाल कर दिया। जांच में गबन का खुलासा होने पर जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह ने 11 जूून को तत्कालीन प्रधान निर्दोष कुमारी से सात लाख आठ हजार रुपये, तत्कालीन सचिव (ग्राम विकास अधिकारी) देव शर्मा से छह लाख व बृजेश यादव से एक लाख आठ हजार रुपये की रिकवरी करने के आदेश दिए। इसके साथ ही दोनों सचिवों को तत्काल निलंबित कर अवगत कराने के लिए कहा था।
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आदेश के चार दिन बाद भी सचिवों को निलंबित नहीं किया गया। इसके अलावा शमसाबाद की ग्राम पंचायत कुआंखेड़ा बजीर आलम के विकास कार्यों की जांच हुई तो सामुदायिक शौचालय, पंचायत भवन, खड़ंजा, नाली व हैंडपंप मरम्मत आदि में 15 लाख 93 हजार 41 रुपये का गबन पकड़ा गया। इसमें डीएम ने तत्कालीन प्रधान अर्चना देवी व तत्कालीन सचिव मोहित यादव से सात लाख 96 हजार 520 रुपये की वसूली करने के आदेश दिए हैं।
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इसके साथ ही सचिव मोहित यादव को निलंबित करने का भी आदेश दिया है। जिलाधिकारी के आदेश के चार दिन बाद भी तीनों सचिवों को निलंबित नहीं किया गया। जिला विकास अधिकारी योगेंद्र कुमार पाठक ने बताया कि जिलाधिकारी का आदेश अभी उन्हें प्राप्त नहीं हुआ है। आदेश मिलते ही कार्रवाई की जाएगी।
मॉनीटरिंग फेल, होता रहा खेल
स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत शौचालय निर्माण व इसकी मॉनीटरिंग के लिए जिला समन्वयक लगाए गए हैं। प्रत्येक शौचालय निर्माण की ऑनलाइन फीडिंग व जियो टैगिंग भी होती है। इसके बावजूद शौचालय निर्माण में लाखों का खेल जांच में ही पकड़ में आया।

अन्य विकास कार्यों का भी अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण करते हैं। इस तरह के निरीक्षण भी कहीं और इशारा कर रहे हैं। इससे साफ है मिलीभगत के चलते मॉनीटरिंग फेल और भ्रष्टाचार का खेल बदस्तूर जारी रहता है।
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