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Farrukhabad News: आचार संहिता उल्लंघन के मामले में दोषमुक्त हुए पूर्व एमएलसी
Thu, 27 Nov 2025 12:44 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Thu, 27 Nov 2025 12:44 AM IST
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फोटो-28 पूर्व एमएलसी मनोज अग्रवाल। स्रोत: जागरूक पाठक
फर्रुखाबाद। पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष एवं पूर्व एमएलसी मनोज अग्रवाल को एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने आचार संहिता उल्लंघन के मामले में दोषमुक्त कर दिया है। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर पाया।
लोकसभा चुनाव के दौरान 15 अप्रैल 2019 का यह मामला है। एआरओ एवं एसडीएम सदर ने बसपा प्रत्याशी रहे मनोज अग्रवाल को दोपहर 2 बजे से शाम 9 बजे तक मेजर एसडी सिंह मेडिकल कॉलेज बेवर रोड पर कार्यकर्ता सम्मेलन की अनुमति दी थी। सम्मेलन में कार्यकर्ताओं को नाश्ते के पैकेट बांटे जाने का आरोप लगाया गया। वीडियो अवलोकन टीम के प्रभारी शिवप्रकाश की तहरीर पर थाना मऊदरवाजा में एनसीआर दर्ज की गई।
विवेचक ने जांच कर आरोप सही मानते हुए कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि जिस सीडी के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, उसे कोर्ट में पेश ही नहीं किया गया। न ही किसी वीडियो में मनोज अग्रवाल को नाश्ते के पैकेट बांटते हुए दिखाया गया है। गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने मनोज अग्रवाल को दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने मामले की जांच में लापरवाही पाए जाने पर पुलिस अधीक्षक को विवेचक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए पत्र भेजा है।
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लोकसभा चुनाव के दौरान 15 अप्रैल 2019 का यह मामला है। एआरओ एवं एसडीएम सदर ने बसपा प्रत्याशी रहे मनोज अग्रवाल को दोपहर 2 बजे से शाम 9 बजे तक मेजर एसडी सिंह मेडिकल कॉलेज बेवर रोड पर कार्यकर्ता सम्मेलन की अनुमति दी थी। सम्मेलन में कार्यकर्ताओं को नाश्ते के पैकेट बांटे जाने का आरोप लगाया गया। वीडियो अवलोकन टीम के प्रभारी शिवप्रकाश की तहरीर पर थाना मऊदरवाजा में एनसीआर दर्ज की गई।
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विवेचक ने जांच कर आरोप सही मानते हुए कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि जिस सीडी के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, उसे कोर्ट में पेश ही नहीं किया गया। न ही किसी वीडियो में मनोज अग्रवाल को नाश्ते के पैकेट बांटते हुए दिखाया गया है। गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने मनोज अग्रवाल को दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने मामले की जांच में लापरवाही पाए जाने पर पुलिस अधीक्षक को विवेचक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए पत्र भेजा है।
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