{"_id":"5fcd151a8ebc3ecf5a63997a","slug":"formal-of-investigation-payment-of-47-lakhs-done-farrukhabad-news-knp5984086165","type":"story","status":"publish","title_hn":"जांच की औपचारिकता के बाद हो गया 47 लाख का भुगतान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जांच की औपचारिकता के बाद हो गया 47 लाख का भुगतान
विज्ञापन
जांच की औपचारिकता, हो गया 47 लाख का भुगतान
फर्रुखाबाद। जनप्रतिनिधियों की निधि से मास्क व सैनिटाइजर की खरीद में हुई मनमानी की जांच में लीपापोती के बाद सीएमओ ने 47 लाख से अधिक का भुगतान कर दिया है। शिकायतकर्ता भाजपा नेता मांग के अनुसार टीएसी से जांच न कराए जाने से असंतुष्ट हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री के आदेश पर हुई जांच में अधिकारियों की मनमानी हावी है।
कोरोना महामारी से लोगों को सुरक्षित किया जा सके। इसके लिए सांसद ने 80 लाख, जबकि चारो विधायकों ने 65 लाख रुपये अपनी निधि से स्वास्थ्य विभाग को दिए थे। स्वास्थ्य विभाग के स्टोर से जुड़े कुछ कर्मचारियों ने खरीद की जिम्मेदारी लेकर जमकर मनमानी की। यहां तक मास्क व सैनिटाइजर अपनी चहेती फर्मों से बिना टेंडर व अनुबंध के एडवांस में बिल मंगा लिए।
घटिया गुणवत्ता के थ्री लेयर मास्क के अलावा एन-95 मास्क व सैनिटाइजर फुटकर से अधिक कीमत पर खरीद के बिल लगाए गए। इस पर भाजपा किसान मोर्चा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष अशोक कटियार ने मुख्यमंत्री से शिकायत कर शासन स्तर के अधिकारियों व टीएससी से जांच कराने की मांग की।
विज्ञापन
फिर क्या था अधिकारियों की गर्दन फंसते देख जिलास्तरीय जांच टीम गठित कर दी गई। वरिष्ठ कोषाधिकारी, एसडीएम व सीएमएस ने सौंपी जांच रिपोर्ट में कहा कि सांसद निधि से 35 लाख 28600 रुपये व विधायक निधि से 11 लाख 79877 रुपये से मास्क व सैनिटाइजर की खरीद की गई है। फिलहाल उन्हें कोई अनियमितता नहीं मिली।
बिलों का नहीं किया मिलान, 6 लाख का अधिक भुगतान
लखनऊ की फर्म ने 28 मार्च को भेजे बिल नंबर 660096 - पर 50 हजार थ्री लेयर मास्क की कीमत पांच लाख 91 हजार रुपये व एन-95 मास्क पांच लाख 51 हजार 860 रुपये लगाकर जीएसटी सहित 12 लाख का बिल भेजा था। पांच रुपये वाले मास्क की थोक में कीमत 11.82 रुपये लगाई गई थी।
गुणवत्ता देखें तो मास्क छूते ही डोरी टूट जाती थी। कमेटी ने जांच में थ्री लेयर मास्क की कीमत छह लाख 20 हजार रुपये जोड़े, लेकिन भ्रमित करने को एन-95 मास्क की खरीद को जांच में छोड़ दिया। इसका जांच रिपोर्ट में कोई जिक्र भी नहीं है। पता चला है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने की वजह से फर्म से एडवांस में बिल मंगवा लिए गए थे।
जांच से शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं
शिकायतकर्ता अशोक कटियार ने बताया कि भ्रष्टाचार से निपटना मुश्किल है। उनकी मांग के अनुसार जांच में न तो शासन स्तर के अधिकारी लगाए गए और न ही गुणवत्ता परखने को टीएसी जांच कराई गई। शिकायत के लिए मुख्यमंत्री से आगे और कहां जाएं। फिलहाल मास्क व सैनिटाइजर की खरीद की जांच से वह संतुष्ट नहीं हैं। जांच के नाम पर लीपापोती की गई है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
सीएमओ डॉ.वंदना सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट में कोई अनियमितता नहीं मिली। इसलिए पूरा भुगतान कर दिया गया है। भुगतान वाउचर किसी को दिखाए नहीं जा सकते है। भुगतान नियमानुसार ही किया गया है। कोई पेंडिंग वाउचर नहीं है।
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। जनप्रतिनिधियों की निधि से मास्क व सैनिटाइजर की खरीद में हुई मनमानी की जांच में लीपापोती के बाद सीएमओ ने 47 लाख से अधिक का भुगतान कर दिया है। शिकायतकर्ता भाजपा नेता मांग के अनुसार टीएसी से जांच न कराए जाने से असंतुष्ट हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री के आदेश पर हुई जांच में अधिकारियों की मनमानी हावी है।
कोरोना महामारी से लोगों को सुरक्षित किया जा सके। इसके लिए सांसद ने 80 लाख, जबकि चारो विधायकों ने 65 लाख रुपये अपनी निधि से स्वास्थ्य विभाग को दिए थे। स्वास्थ्य विभाग के स्टोर से जुड़े कुछ कर्मचारियों ने खरीद की जिम्मेदारी लेकर जमकर मनमानी की। यहां तक मास्क व सैनिटाइजर अपनी चहेती फर्मों से बिना टेंडर व अनुबंध के एडवांस में बिल मंगा लिए।
विज्ञापन
घटिया गुणवत्ता के थ्री लेयर मास्क के अलावा एन-95 मास्क व सैनिटाइजर फुटकर से अधिक कीमत पर खरीद के बिल लगाए गए। इस पर भाजपा किसान मोर्चा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष अशोक कटियार ने मुख्यमंत्री से शिकायत कर शासन स्तर के अधिकारियों व टीएससी से जांच कराने की मांग की।
विज्ञापन
फिर क्या था अधिकारियों की गर्दन फंसते देख जिलास्तरीय जांच टीम गठित कर दी गई। वरिष्ठ कोषाधिकारी, एसडीएम व सीएमएस ने सौंपी जांच रिपोर्ट में कहा कि सांसद निधि से 35 लाख 28600 रुपये व विधायक निधि से 11 लाख 79877 रुपये से मास्क व सैनिटाइजर की खरीद की गई है। फिलहाल उन्हें कोई अनियमितता नहीं मिली।
बिलों का नहीं किया मिलान, 6 लाख का अधिक भुगतान
लखनऊ की फर्म ने 28 मार्च को भेजे बिल नंबर 660096 - पर 50 हजार थ्री लेयर मास्क की कीमत पांच लाख 91 हजार रुपये व एन-95 मास्क पांच लाख 51 हजार 860 रुपये लगाकर जीएसटी सहित 12 लाख का बिल भेजा था। पांच रुपये वाले मास्क की थोक में कीमत 11.82 रुपये लगाई गई थी।
गुणवत्ता देखें तो मास्क छूते ही डोरी टूट जाती थी। कमेटी ने जांच में थ्री लेयर मास्क की कीमत छह लाख 20 हजार रुपये जोड़े, लेकिन भ्रमित करने को एन-95 मास्क की खरीद को जांच में छोड़ दिया। इसका जांच रिपोर्ट में कोई जिक्र भी नहीं है। पता चला है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने की वजह से फर्म से एडवांस में बिल मंगवा लिए गए थे।
जांच से शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं
शिकायतकर्ता अशोक कटियार ने बताया कि भ्रष्टाचार से निपटना मुश्किल है। उनकी मांग के अनुसार जांच में न तो शासन स्तर के अधिकारी लगाए गए और न ही गुणवत्ता परखने को टीएसी जांच कराई गई। शिकायत के लिए मुख्यमंत्री से आगे और कहां जाएं। फिलहाल मास्क व सैनिटाइजर की खरीद की जांच से वह संतुष्ट नहीं हैं। जांच के नाम पर लीपापोती की गई है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
सीएमओ डॉ.वंदना सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट में कोई अनियमितता नहीं मिली। इसलिए पूरा भुगतान कर दिया गया है। भुगतान वाउचर किसी को दिखाए नहीं जा सकते है। भुगतान नियमानुसार ही किया गया है। कोई पेंडिंग वाउचर नहीं है।