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कटरी तौफीक में घुसा बाढ़ का पानी
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Mon, 29 Jun 2015 11:22 PM IST
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शमसाबाद विकास खंड क्षेत्र के गांव कटरी तौफीक में बाढ़ ने दस्तक दे दी है।
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रविवार रात गांव में बाढ़ आने से एक ग्रामीण की झोपड़ी बह गई। बाढ़ की
आशंका को देखते हुए ग्रामीणों ने ऊंचे स्थानों पर जाने की तैयारी शुरू कर
दी है।
गांव कटरी तौफीक में रविवार शाम से ही गंगा में पानी बढ़ने लगा था। बाढ़ के भय से ग्रामीणों ने रात जागकर काटी।
गांव के गिरीशचंद्र के अनुसार उन्होंने झोपड़ी से घरेलू सामान निकालकर गांव के अंदर रामकिशन के कच्चे घर में रख दिया था। रात करीब 11.30 बजे बाढ़ के पानी से उनकी झोपड़ी बह गई। बाढ़ से गांव में कटान शुरू हो गया है। इससे ग्रामीण भयभीत हैं। सोमवार को कुछ ग्रामीणों ने ऊंचे स्थानों पर जाना शुरू कर दिया वहीं अन्य तैयारी कर रहे हैं। ग्रामीण गंगाधर
और प्रमोद कुमार ने बताया कि पिछले साल बाढ़ में उनका कच्चा मकान बह गया था। बड़ी मुश्किल से मकान बनवाया था। इस बार भी पानी आ गया है। अगर जलस्तर कम नहीं हुआ तो ऊंचे स्थान पर जाएंगे। रामतीर्थ ने बताया कि बाढ़ की चपेट में हर साल आते हैं। प्रकाशचंद्र का कहना है कि मेहनत मजदूरी कर गुजारा कर रहे हैं। बाढ़ ने कटान शुरू कर दिया
है। डर सताने लगा है कि पता नहीं कब उनका कच्चा मकान भी बाढ़ की चपेट में आ जाए। अगर कटान कम न हुआ तो एक-दो दिन में मकान खाली कर देंगे।
ग्रामीण बोले, लेखपाल ड्रामा की कह रहे बात
स्थानीय ग्रामीणों में लेखपाल कप्तान सिंह के खिलाफ खासा रोष है। इनका कहना है कि गांव में बाढ़ के कटान करने की जानकारी जब उन्होंने लेखपाल को दी तो उन्होंने कह दिया कि वह लोग ड्रामा कर रहे हैं। बाढ़ की समस्या तो हर साल की बात है। इसमें वह क्या कर सकते हैं। एक-दो दिन में आएंगे। गांव के लोगाें ने कहा कि कहा कि वह लोग बाढ़ की समस्या से जूझते हैं। ऊपर से कर्मचारी भी नहीं सुनते हैं।
गंगा में पानी बढ़ने से आठ ड्रम बहे
गंगा में पानी बढ़ने से समैचीपुर चितार में तोड़े गए अस्थायी पैंटून पुल के आठ ड्रम रविवार रात बह गए। सोमवार को जब इसकी जानकारी पीडब्लूडी कर्मचारियों को हुई तो उन्होंने खोज शुरू की। एक किलोमीटर दूर पर ड्रम मिल गए। कर्मचारियों ने आठों ड्रम रस्सी से गंगा किनारे बांध दिए हैं।
एक माह पहले समैचीपुर में बने अस्थायी पैंटून पुल को तोड़ा गया था। इसके बाद पुल के आठ ड्रमों को गंगा किनारे छोड़ दिया गया था। रविवार को गंगा में अचानक बढ़े जलस्तर के चलते आठों ड्रम बह गए। सोमवार को जानकारी पाकर पीडब्लूडी कर्मचारियों ने खोजबीन शुरू की। करीब एक किलोमीटर दूर गंगा में आठों ड्रम मिल गए। कर्मचारियों ने ड्रम गंगा
किनारे कर रस्सी से बांध दिए हैं। मेट वेदराम पाल ने बताया कि बाढ़ में आठों ड्रम बह गए थे। सभी ड्रम पकड़कर गंगा किनारे रस्सी से बांध दिए गए हैं।
गांव कटरी तौफीक में रविवार शाम से ही गंगा में पानी बढ़ने लगा था। बाढ़ के भय से ग्रामीणों ने रात जागकर काटी।
गांव के गिरीशचंद्र के अनुसार उन्होंने झोपड़ी से घरेलू सामान निकालकर गांव के अंदर रामकिशन के कच्चे घर में रख दिया था। रात करीब 11.30 बजे बाढ़ के पानी से उनकी झोपड़ी बह गई। बाढ़ से गांव में कटान शुरू हो गया है। इससे ग्रामीण भयभीत हैं। सोमवार को कुछ ग्रामीणों ने ऊंचे स्थानों पर जाना शुरू कर दिया वहीं अन्य तैयारी कर रहे हैं। ग्रामीण गंगाधर
और प्रमोद कुमार ने बताया कि पिछले साल बाढ़ में उनका कच्चा मकान बह गया था। बड़ी मुश्किल से मकान बनवाया था। इस बार भी पानी आ गया है। अगर जलस्तर कम नहीं हुआ तो ऊंचे स्थान पर जाएंगे। रामतीर्थ ने बताया कि बाढ़ की चपेट में हर साल आते हैं। प्रकाशचंद्र का कहना है कि मेहनत मजदूरी कर गुजारा कर रहे हैं। बाढ़ ने कटान शुरू कर दिया
है। डर सताने लगा है कि पता नहीं कब उनका कच्चा मकान भी बाढ़ की चपेट में आ जाए। अगर कटान कम न हुआ तो एक-दो दिन में मकान खाली कर देंगे।
ग्रामीण बोले, लेखपाल ड्रामा की कह रहे बात
स्थानीय ग्रामीणों में लेखपाल कप्तान सिंह के खिलाफ खासा रोष है। इनका कहना है कि गांव में बाढ़ के कटान करने की जानकारी जब उन्होंने लेखपाल को दी तो उन्होंने कह दिया कि वह लोग ड्रामा कर रहे हैं। बाढ़ की समस्या तो हर साल की बात है। इसमें वह क्या कर सकते हैं। एक-दो दिन में आएंगे। गांव के लोगाें ने कहा कि कहा कि वह लोग बाढ़ की समस्या से जूझते हैं। ऊपर से कर्मचारी भी नहीं सुनते हैं।
गंगा में पानी बढ़ने से आठ ड्रम बहे
गंगा में पानी बढ़ने से समैचीपुर चितार में तोड़े गए अस्थायी पैंटून पुल के आठ ड्रम रविवार रात बह गए। सोमवार को जब इसकी जानकारी पीडब्लूडी कर्मचारियों को हुई तो उन्होंने खोज शुरू की। एक किलोमीटर दूर पर ड्रम मिल गए। कर्मचारियों ने आठों ड्रम रस्सी से गंगा किनारे बांध दिए हैं।
एक माह पहले समैचीपुर में बने अस्थायी पैंटून पुल को तोड़ा गया था। इसके बाद पुल के आठ ड्रमों को गंगा किनारे छोड़ दिया गया था। रविवार को गंगा में अचानक बढ़े जलस्तर के चलते आठों ड्रम बह गए। सोमवार को जानकारी पाकर पीडब्लूडी कर्मचारियों ने खोजबीन शुरू की। करीब एक किलोमीटर दूर गंगा में आठों ड्रम मिल गए। कर्मचारियों ने ड्रम गंगा
किनारे कर रस्सी से बांध दिए हैं। मेट वेदराम पाल ने बताया कि बाढ़ में आठों ड्रम बह गए थे। सभी ड्रम पकड़कर गंगा किनारे रस्सी से बांध दिए गए हैं।