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Farrukhabad News: जियोट्यूब लगाए गए, सैकड़ों बीघा जमीन का रुक जाएगा कटान
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कमालगंज। हरदोई मार्ग पर गंगा नदी में निर्माणाधीन दो अरब रुपये की सेतु परियोजना से आवागमन सुविधा के साथ ही किसानों को कटान की समस्या से भी निजात मिलेगी। इसके लिए परियोजना स्थल पर गंगा किनारे 20 व 30 मीटर लंबे जियोट्यूब लगाए जा रहे हैं।
भाजपा सरकार की क्षेत्र में बड़ी सौगात के रूप में मानी जा रही कमालगंज-हरदोई मार्ग की सेतु परियोजना का काम तेजी से चल रहा है। पिलर के ऊपर कुल 49 छतों में से 37 छतें ढल चुकी हैं। बची हुई छतों में तेरा अकबरपुर हरदोई की ओर वाली छत ढालने के लिए शटरिंग का काम शुरू हो गया है। इसके बाद गंगा की धार के ऊपर वाली छत ढाली जाएंगी।
इस बार बारिश और बाढ़ में भी काम जारी रखने की तैयारी है। परियोजना के पूर्ण होने पर आवागमन के द्वार तो खुलेंगे ही, इसके साथ ही गंगा का कटान भी रुकेगा। हर साल गंगा से कटान होता है। इससे खेत की मिट्टी कट कर बह जाती। गंगा खेतों में बालू छोड़ देतीं। बड़ी नाली बन जाती। किसानों की सैकड़ों बीघा जमीन बर्बाद हो जाती है।
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अब सेतु परियोजना की ओर से जियोट्यूब लगाकर कटान रोकने की दिशा में भी काम किया जा रहा। गंगा के किनारे 20 मीटर व 30 मीटर लंबे जियोट्यूब लगाए जा रहे हैं। एक स्थान पर तीन स्तरीय जियोट्यूब लग रहे हैं। नीचे की ओर दो जियोट्यूब के बाद ऊपर एक जियोट्यूब लग रहा है। एक जियोट्यूब की चौड़ाई-ऊंचाई चार मीटर है।
जियोट्यूब में भरा जाता रेत और सीमेंट
जियोट्यूब काले रंग का बैग होता है। इसमें गीला रेत और सीमेंट भरा जाता। फूलने पर इसे किनारे की ओर स्थापित किया जाता। यह पानी के तेज बहाव में मिट्टी को कटने से बचाता है और तटबंध को मजबूत बनाए रखता। बैग के अंदर भरी रेत व सीमेंट पानी में नहीं घुलती। इससे किनारे की मिट्टी मजबूत बनी रहती। परियोजना के तकनीकी कर्मचारियों की मानें तो जियोट्यूब लग जाने पर गंगा का पानी व धार सेतु परियोजना के पहुंच मार्ग (मिट्टी के बंधा) तक नहीं पहुंचेगी। पहुंच मार्ग सुरक्षित बना रहेगा और किसानों की खेती वाली जमीन भी कटान व बाढ़ के प्रकोप से बच जाएगी।
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भाजपा सरकार की क्षेत्र में बड़ी सौगात के रूप में मानी जा रही कमालगंज-हरदोई मार्ग की सेतु परियोजना का काम तेजी से चल रहा है। पिलर के ऊपर कुल 49 छतों में से 37 छतें ढल चुकी हैं। बची हुई छतों में तेरा अकबरपुर हरदोई की ओर वाली छत ढालने के लिए शटरिंग का काम शुरू हो गया है। इसके बाद गंगा की धार के ऊपर वाली छत ढाली जाएंगी।
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इस बार बारिश और बाढ़ में भी काम जारी रखने की तैयारी है। परियोजना के पूर्ण होने पर आवागमन के द्वार तो खुलेंगे ही, इसके साथ ही गंगा का कटान भी रुकेगा। हर साल गंगा से कटान होता है। इससे खेत की मिट्टी कट कर बह जाती। गंगा खेतों में बालू छोड़ देतीं। बड़ी नाली बन जाती। किसानों की सैकड़ों बीघा जमीन बर्बाद हो जाती है।
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अब सेतु परियोजना की ओर से जियोट्यूब लगाकर कटान रोकने की दिशा में भी काम किया जा रहा। गंगा के किनारे 20 मीटर व 30 मीटर लंबे जियोट्यूब लगाए जा रहे हैं। एक स्थान पर तीन स्तरीय जियोट्यूब लग रहे हैं। नीचे की ओर दो जियोट्यूब के बाद ऊपर एक जियोट्यूब लग रहा है। एक जियोट्यूब की चौड़ाई-ऊंचाई चार मीटर है।
जियोट्यूब में भरा जाता रेत और सीमेंट
जियोट्यूब काले रंग का बैग होता है। इसमें गीला रेत और सीमेंट भरा जाता। फूलने पर इसे किनारे की ओर स्थापित किया जाता। यह पानी के तेज बहाव में मिट्टी को कटने से बचाता है और तटबंध को मजबूत बनाए रखता। बैग के अंदर भरी रेत व सीमेंट पानी में नहीं घुलती। इससे किनारे की मिट्टी मजबूत बनी रहती। परियोजना के तकनीकी कर्मचारियों की मानें तो जियोट्यूब लग जाने पर गंगा का पानी व धार सेतु परियोजना के पहुंच मार्ग (मिट्टी के बंधा) तक नहीं पहुंचेगी। पहुंच मार्ग सुरक्षित बना रहेगा और किसानों की खेती वाली जमीन भी कटान व बाढ़ के प्रकोप से बच जाएगी।