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Farrukhabad News: गांवों में गंदगी बरकरार और कूड़ा निस्तारण पर 29 करोड़ खर्च
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फर्रुखाबाद। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 579 ग्राम पंचायतों में करीब 29 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए कूड़ा निस्तारण केंद्र निष्प्रयोज्य साबित हो रहे हैं। इन केंद्रों का संचालन न होने से गांवों में गंदगी जस की तस है। कई केंद्रों पर तो मजदूर भोजन बनाते देखे गए, जबकि गांवों की गलियों में कूड़े के ढेर लगे हैं।
सरकार ने गांवों में स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए इन केंद्रों के निर्माण का आदेश दिया था। इसका उद्देश्य घरों से कूड़ा एकत्र कर निस्तारण केंद्र तक पहुंचाना था, जिससे गांव साफ रहें और बीमारियों का खतरा कम हो। 580 ग्राम पंचायतों में से 579 में ये केंद्र बनाए गए हैं। प्रत्येक केंद्र पर 75 हजार रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक खर्च हुए हैं, जिसका औसत पांच लाख रुपये प्रति केंद्र है। कुल मिलाकर करीब 29 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की गई है। लेकिन कूड़ा कलेक्शन न होने के कारण अधिकांश केंद्र खाली पड़े हैं।
उपयोग से पहले निष्प्रयोज्य हुए केंद्र शमसाबाद क्षेत्र के दलेलगंज गांव में बना कूड़ा निस्तारण केंद्र कभी उपयोग में नहीं लाया गया। यह केंद्र क्षतिग्रस्त होकर खुद ही कूड़े में बदल गया है। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद ग्रामीणों को इसका कोई लाभ नहीं मिला। साफ-सुथरे पड़े इस केंद्र में गांव का कूड़ा नहीं पहुंचा। वहीं, गांव कुइयांधीर में भी केंद्र साफ-सुथरा पड़ा है, जबकि गांव की गलियों में कूड़े के ढेर लगे हैं।
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गांव में कूड़े के ढेर
मोहम्मदाबाद क्षेत्र की ग्राम पंचायत मौधा में भी लाखों रुपये खर्च कर कूड़ा निस्तारण केंद्र बनाया गया है। यहां भी कूड़ा न पहुंचने के कारण केंद्र चमक रहा है। मजदूर इन केंद्रों में अपना भोजन बनाते हैं। वहीं, गांव की गलियों और किनारों पर कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। कुछ केंद्र गांवों से काफी दूर बनाए गए हैं, जिससे वे लोगों के लिए अनुपयोगी साबित हो रहे हैं।
जांच का आश्वासन
जिला पंचायत राज अधिकारी अविनाश चंद्र ने बताया कि विभाग यह जांच करवाएगा कि कितने कूड़ा निस्तारण केंद्र वर्तमान में संचालित हैं। साथ ही, उन केंद्रों की भी जानकारी ली जाएगी जिनका संचालन अभी तक शुरू नहीं हो सका है। अविनाश चंद्र ने आश्वासन दिया कि सभी कूड़ा निस्तारण केंद्रों को जल्द संचालित कराने का प्रयास किया जाएगा।
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सरकार ने गांवों में स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए इन केंद्रों के निर्माण का आदेश दिया था। इसका उद्देश्य घरों से कूड़ा एकत्र कर निस्तारण केंद्र तक पहुंचाना था, जिससे गांव साफ रहें और बीमारियों का खतरा कम हो। 580 ग्राम पंचायतों में से 579 में ये केंद्र बनाए गए हैं। प्रत्येक केंद्र पर 75 हजार रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक खर्च हुए हैं, जिसका औसत पांच लाख रुपये प्रति केंद्र है। कुल मिलाकर करीब 29 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की गई है। लेकिन कूड़ा कलेक्शन न होने के कारण अधिकांश केंद्र खाली पड़े हैं।
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उपयोग से पहले निष्प्रयोज्य हुए केंद्र शमसाबाद क्षेत्र के दलेलगंज गांव में बना कूड़ा निस्तारण केंद्र कभी उपयोग में नहीं लाया गया। यह केंद्र क्षतिग्रस्त होकर खुद ही कूड़े में बदल गया है। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद ग्रामीणों को इसका कोई लाभ नहीं मिला। साफ-सुथरे पड़े इस केंद्र में गांव का कूड़ा नहीं पहुंचा। वहीं, गांव कुइयांधीर में भी केंद्र साफ-सुथरा पड़ा है, जबकि गांव की गलियों में कूड़े के ढेर लगे हैं।
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गांव में कूड़े के ढेर
मोहम्मदाबाद क्षेत्र की ग्राम पंचायत मौधा में भी लाखों रुपये खर्च कर कूड़ा निस्तारण केंद्र बनाया गया है। यहां भी कूड़ा न पहुंचने के कारण केंद्र चमक रहा है। मजदूर इन केंद्रों में अपना भोजन बनाते हैं। वहीं, गांव की गलियों और किनारों पर कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। कुछ केंद्र गांवों से काफी दूर बनाए गए हैं, जिससे वे लोगों के लिए अनुपयोगी साबित हो रहे हैं।
जांच का आश्वासन
जिला पंचायत राज अधिकारी अविनाश चंद्र ने बताया कि विभाग यह जांच करवाएगा कि कितने कूड़ा निस्तारण केंद्र वर्तमान में संचालित हैं। साथ ही, उन केंद्रों की भी जानकारी ली जाएगी जिनका संचालन अभी तक शुरू नहीं हो सका है। अविनाश चंद्र ने आश्वासन दिया कि सभी कूड़ा निस्तारण केंद्रों को जल्द संचालित कराने का प्रयास किया जाएगा।