{"_id":"629a5348908875271677dd7d","slug":"farrukhabad-news-kabja-talab-farrukhabad-news-knp7004682170","type":"story","status":"publish","title_hn":"तालाब पर कब्जा कर तान दिए मकान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तालाब पर कब्जा कर तान दिए मकान
विज्ञापन
कंपिल। गांव बिल्हा का तालाब अस्तित्व खोने की कगार पर है। लोगों ने इसे पाटकर मकान खड़े कर लिए हैं और रास्ते बना लिए हैं। 20 बीघे का तालाब सिमटकर अब एक बीघे का भी नहीं बचा है।
दो दशक पूर्व तक कंपिल क्षेत्र में कई तालाब और छोटे-छोटे पोखर पानी से लबालब दिखाई देते थे। बढ़ती आबादी से जमीन की कीमतें आसमान पर पहुंच गईं। इससे लोगों ने तालाबों की जमीनों को अपने खेतों में समेटकर लूटना शुरू कर दिया। कई तालाबों को पाटकर उन पर मकान खड़े कर लिए गए। बरखेड़ा, पुरौरी सहित कई गांवों में बड़े-बड़े तालाब हुआ करते थे, पर अब नजर नहीं आ रहे हैं।
गांव बिल्हा में भी सड़क से सटा 20 बीघे का तालाब हुआ करता था। ग्रामीणों ने बताया कि आसपास के गांव के पशु-पक्षी भी यहां के तालाब में पानी पीने आते थे। गांव का पानी इसी तालाब में पहुंचता था। महिलाएं शादी के बाद इसी तालाब में मंडप विसर्जित करतीं थीं। वर्तमान में तालाब का पानी सूख गया है। जमीन पाटकर मकान बन गए हैं। तालाब की जमीन पर ही रास्ते बना लिए गए हैं।
विज्ञापन
अब यहां छोटी से तलैया दिखती है, जो एक बीघे में भी नहीं है। बची हुई जमीन पर भी लोगों ने ट्रैक्टर व घूरा डालकर कब्जा कर लिया है। ग्राम सभा बिल्हा के प्रधान अरविंद यादव ने बताया कि तालाब की नापजोख लेखपाल को करनी है। यदि कब्जा है तो उसे मुक्त कराकर तालाब में पानी भरवाने की व्यवस्था की जाएगी।
विज्ञापन
दो दशक पूर्व तक कंपिल क्षेत्र में कई तालाब और छोटे-छोटे पोखर पानी से लबालब दिखाई देते थे। बढ़ती आबादी से जमीन की कीमतें आसमान पर पहुंच गईं। इससे लोगों ने तालाबों की जमीनों को अपने खेतों में समेटकर लूटना शुरू कर दिया। कई तालाबों को पाटकर उन पर मकान खड़े कर लिए गए। बरखेड़ा, पुरौरी सहित कई गांवों में बड़े-बड़े तालाब हुआ करते थे, पर अब नजर नहीं आ रहे हैं।
विज्ञापन
गांव बिल्हा में भी सड़क से सटा 20 बीघे का तालाब हुआ करता था। ग्रामीणों ने बताया कि आसपास के गांव के पशु-पक्षी भी यहां के तालाब में पानी पीने आते थे। गांव का पानी इसी तालाब में पहुंचता था। महिलाएं शादी के बाद इसी तालाब में मंडप विसर्जित करतीं थीं। वर्तमान में तालाब का पानी सूख गया है। जमीन पाटकर मकान बन गए हैं। तालाब की जमीन पर ही रास्ते बना लिए गए हैं।
विज्ञापन
अब यहां छोटी से तलैया दिखती है, जो एक बीघे में भी नहीं है। बची हुई जमीन पर भी लोगों ने ट्रैक्टर व घूरा डालकर कब्जा कर लिया है। ग्राम सभा बिल्हा के प्रधान अरविंद यादव ने बताया कि तालाब की नापजोख लेखपाल को करनी है। यदि कब्जा है तो उसे मुक्त कराकर तालाब में पानी भरवाने की व्यवस्था की जाएगी।