{"_id":"624b37485aed15337b1f39a1","slug":"farrukhabad-news-jaam-farrukhabad-news-knp6893468108","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रमाणपत्र न बनने से नाराज दिव्यांगों ने लगाया जाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रमाणपत्र न बनने से नाराज दिव्यांगों ने लगाया जाम
विज्ञापन
सीएमओ कार्यालय के बाहर फतेहगढ-फर्रुखाबाद मार्ग पर जाम लगाकर प्रर्दशन करते दिव्यांग व उनके परिजन
- फोटो : FARRUKHABAD
फर्रुखाबाद। प्रमाणपत्र बनवाने सीएमओ कार्यालय पहुंचे दिव्यांग डॉक्टर के न पहुंचने पर भड़क गए। उन्होंने हंगामा कर सड़क पर जाम लगा दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने समझाकर शांत किया और जाम खुलवाया। दो बजे डॉक्टर के पहुंचने पर प्रमाणपत्र बनना शुरू हुए। कई दिव्यांगों को जांच के लिए रेफर कर आवेदन वापस कर दिए गए।
दिव्यांगों को प्रमाणपत्र जारी करने के लिए प्रत्येक सोमवार को सीएमओ कार्यालय में दिव्यांग बोर्ड बैठता है। बोर्ड के पटल प्रभारी सीएमओ के स्टेनो सतवीर सिंह कभी झांकने तक नहीं जाते। दिव्यांगता का परीक्षण करने के लिए डॉक्टरों के आने का भी कोई समय तय नहीं है, जबकि उन्हें सुबह नौ बजे पहुंचना होता है। सोमवार सुबह 11 बजे तक करीब 300 लोगों की भीड़ लग चुकी थी।
सुबह करीब 11:30 बजे नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मेघा श्रीवास्तव पहुंचीं और नेत्र संबंधी दो दिव्यांगों को प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अपनी रिपोर्ट लगाई। 10 दिव्यांगों को जांच के लिए लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया।
विज्ञापन
इस बीच हाथ-पैरों से निशक्त भी परीक्षण करवाने पहुंचे तो बताया गया कि हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋषिकांत वर्मा ही उनकी रिपोर्ट लगाएंगे। 12:15 बजे डॉ. मेघा सक्सेना भी चली गईं। इसके एक घंटे बाद तक डॉक्टरों के न पहुंचने से दिव्यांगों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने हंगामा कर दिया।
कार्यालय गेट के बाहर मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया। फतेहगढ़ कोतवाल जेपी पाल फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने दिव्यांगों को समझाकर शांत किया और जाम खुलवाया। दोपहर दो बजे डॉ. ऋषिकांत वर्मा पहुंचे और परीक्षण शुरू किया।
चार बजे तक हड्डी रोग से संबंधित करीब 200 दिव्यांगों का परीक्षण कर रिपोर्ट लगाई। आंख संबंधी कुल 28 लोगों को जांच के लोहिया अस्पताल और ईएनटी सर्जन न होने से इससे संबंधित 20 दिव्यांगों को कानपुर रेफर कर उनके आवेदन वापस कर दिए गए। दिव्यांग बोर्ड में प्रमाणपत्र के लिए करीब 250 आवेदन आए।
सीएमएस ने खड़े किए हाथ
डॉ. ऋषिकांत वर्मा के न पहुंचने पर लोहिया अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्ता को फोन किया गया। इस पर सीएमएस ने जवाब दिया कि डॉक्टरों की कमी से उन्हें ओपीडी चलाना मुश्किल है। ओपीडी में मारपीट तक हो गई है। दिव्यांग बोर्ड के लिए सीएमओ को डॉक्टर की व्यवस्था करनी चाहिए। वह डॉ. ऋषिकांत वर्मा को एक बजे से पहले नहीं भेज पाएंगे।
शासन में नहीं हो रही सुनवाई
सीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के पास डॉक्टरों व विशेषज्ञों की भारी कमी है। ईएनटी सर्जन, जनरल सर्जन विभाग के पास है ही नहीं। वह प्रत्येक माह शासन को पत्र लिख रहे हैं, इसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है। डॉक्टरों की कमी की वजह से सब दिक्कतें आ रही हैं।
विज्ञापन
दिव्यांगों को प्रमाणपत्र जारी करने के लिए प्रत्येक सोमवार को सीएमओ कार्यालय में दिव्यांग बोर्ड बैठता है। बोर्ड के पटल प्रभारी सीएमओ के स्टेनो सतवीर सिंह कभी झांकने तक नहीं जाते। दिव्यांगता का परीक्षण करने के लिए डॉक्टरों के आने का भी कोई समय तय नहीं है, जबकि उन्हें सुबह नौ बजे पहुंचना होता है। सोमवार सुबह 11 बजे तक करीब 300 लोगों की भीड़ लग चुकी थी।
विज्ञापन
सुबह करीब 11:30 बजे नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मेघा श्रीवास्तव पहुंचीं और नेत्र संबंधी दो दिव्यांगों को प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अपनी रिपोर्ट लगाई। 10 दिव्यांगों को जांच के लिए लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया।
विज्ञापन
इस बीच हाथ-पैरों से निशक्त भी परीक्षण करवाने पहुंचे तो बताया गया कि हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋषिकांत वर्मा ही उनकी रिपोर्ट लगाएंगे। 12:15 बजे डॉ. मेघा सक्सेना भी चली गईं। इसके एक घंटे बाद तक डॉक्टरों के न पहुंचने से दिव्यांगों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने हंगामा कर दिया।
कार्यालय गेट के बाहर मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया। फतेहगढ़ कोतवाल जेपी पाल फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने दिव्यांगों को समझाकर शांत किया और जाम खुलवाया। दोपहर दो बजे डॉ. ऋषिकांत वर्मा पहुंचे और परीक्षण शुरू किया।
चार बजे तक हड्डी रोग से संबंधित करीब 200 दिव्यांगों का परीक्षण कर रिपोर्ट लगाई। आंख संबंधी कुल 28 लोगों को जांच के लोहिया अस्पताल और ईएनटी सर्जन न होने से इससे संबंधित 20 दिव्यांगों को कानपुर रेफर कर उनके आवेदन वापस कर दिए गए। दिव्यांग बोर्ड में प्रमाणपत्र के लिए करीब 250 आवेदन आए।
सीएमएस ने खड़े किए हाथ
डॉ. ऋषिकांत वर्मा के न पहुंचने पर लोहिया अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्ता को फोन किया गया। इस पर सीएमएस ने जवाब दिया कि डॉक्टरों की कमी से उन्हें ओपीडी चलाना मुश्किल है। ओपीडी में मारपीट तक हो गई है। दिव्यांग बोर्ड के लिए सीएमओ को डॉक्टर की व्यवस्था करनी चाहिए। वह डॉ. ऋषिकांत वर्मा को एक बजे से पहले नहीं भेज पाएंगे।
शासन में नहीं हो रही सुनवाई
सीएमओ डॉ. सतीश चंद्रा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के पास डॉक्टरों व विशेषज्ञों की भारी कमी है। ईएनटी सर्जन, जनरल सर्जन विभाग के पास है ही नहीं। वह प्रत्येक माह शासन को पत्र लिख रहे हैं, इसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है। डॉक्टरों की कमी की वजह से सब दिक्कतें आ रही हैं।