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Farrukhabad News: फाइनेंस कंपनी ने पांच हजार देकर खत्म कराया 15 साल पुराना विवाद
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फर्रुखाबाद। वैन ऋण चुकाने के बाद अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी न करने के मामले में महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंस कंपनी ने परिवादी को पांच हजार रुपये का भुगतान कर 15 साल पुराने विवाद का निस्तारण करा लिया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ।
मोहल्ला कादरीगेट निवासी शिवचरन लाल हंस ने वर्ष 2011 में महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंस के प्रबंधक के खिलाफ परिवाद दायर किया था। बताया था कि उन्होंने कंपनी के कर्मचारी के माध्यम से मारुति वैन खरीदने के लिए 1.30 लाख रुपये का ऋण लिया था। उन्होंने निर्धारित किस्तों के साथ ब्याज की पूरी रकम समय से चुका दी थी। अंतिम किस्त के अतिरिक्त कंपनी की ओर से बताए गए 6,400 रुपये का भी भुगतान कर दिया था।
27 दिसंबर 2009 को एनओसी जारी कराने के लिए कंपनी के कर्मचारी ने छह हजार रुपये शुल्क जमा कराया। इसकी रसीद भी दी गई। इसके बावजूद उन्हें एनओसी नहीं मिली। कई बार संपर्क और 12 मई 2010 को नोटिस भेजने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। शनिवार को पत्रावली राष्ट्रीय लोक अदालत में पेश होने पर दोनों पक्ष उपस्थित हुए। कंपनी की ओर से पांच हजार रुपये का डिमांड ड्राफ्ट परिवादी को दिया गया। परिवादी ने परिवाद समाप्त करने की सहमति जताई।
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मोहल्ला कादरीगेट निवासी शिवचरन लाल हंस ने वर्ष 2011 में महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंस के प्रबंधक के खिलाफ परिवाद दायर किया था। बताया था कि उन्होंने कंपनी के कर्मचारी के माध्यम से मारुति वैन खरीदने के लिए 1.30 लाख रुपये का ऋण लिया था। उन्होंने निर्धारित किस्तों के साथ ब्याज की पूरी रकम समय से चुका दी थी। अंतिम किस्त के अतिरिक्त कंपनी की ओर से बताए गए 6,400 रुपये का भी भुगतान कर दिया था।
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27 दिसंबर 2009 को एनओसी जारी कराने के लिए कंपनी के कर्मचारी ने छह हजार रुपये शुल्क जमा कराया। इसकी रसीद भी दी गई। इसके बावजूद उन्हें एनओसी नहीं मिली। कई बार संपर्क और 12 मई 2010 को नोटिस भेजने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। शनिवार को पत्रावली राष्ट्रीय लोक अदालत में पेश होने पर दोनों पक्ष उपस्थित हुए। कंपनी की ओर से पांच हजार रुपये का डिमांड ड्राफ्ट परिवादी को दिया गया। परिवादी ने परिवाद समाप्त करने की सहमति जताई।
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