{"_id":"a58e124f58d28bf46c87f71879d9b3b3","slug":"fallen-earth-village-mudha-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहीदों की धरती है गांव मौधा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहीदों की धरती है गांव मौधा
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Fri, 03 Jul 2015 11:57 PM IST
विज्ञापन
मोहम्मदाबाद की ग्राम सभा मौधा को शहीदों की धरती कहा जा सकता है। वैसे तो
विज्ञापन
विकास खंड क्षेत्र के 42 जवानों ने देश की खातिर अपने प्राण न्यौछावर कर
दिए। पर इनमें सबसे ज्यादा संख्या 18 मौधा के शहीदों की है। प्रथम विश्व
युद्ध के बाद वर्ष 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी मौधा के
जवानों ने दुश्मनों से लोहा लिया। शहीदों की याद में ही यहां
स्मारक बनाया गया है, जिसका लोकार्पण 5 जुलाई को गृहमंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। मौधा की आबादी लगभग चार हजार है। 1900 मतदाता हैं। गांव के जानकारों की मानें तो प्रथम विश्वयुद्ध में यहां के 10 जवान अहिबरन सिंह प्रथम, सुतुआ सिंह, बरनाम सिंह, शिवपाल सिंह, जगन्नाथ सिंह, गोकरन सिंह, अजय सिंह, सरजू सिंह, छोटे सिंह व अहिबरन सिंह द्वितीय शहीद हुए थे। द्वितीय विश्वयुद्ध में तीन जवानों रामेश्वर सिंह, चंद्रपाल सिंह और हरबख्श सिंह ने प्राणों की आहुति दी थी। वर्ष 1962
में भारत-चीन युद्ध में रामऔतार सिंह, कुंजल सिंह और वर्ष 1965 में भारत-चीन युद्ध में राजबहादुर सिंह दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे। वर्ष 1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध में कन्हई सिंह और ज्ञानेंद्र सिंह ने दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे। दुश्मनों की गोली से दोनों शहीद हो गए थे। मौधा गांव के 18 शहीदों समेत हैदरपुर, गोसरपुर, मुड़गांव, करनपुर,
अरसानी, ईसेपुर, गढ़ी बनकटी, सहसपुर, मॉडलशंकरपुर, जिंजौटा पहाड़पुर, संकिसा, सिरौली, न्यामतपुर ठाकुराना और मुरान गांव के 42 जवानों ने देश के लिए जान दी थी। इन सभी के नाम मौधा में बने शहीद स्मारक में अंकित हैं। मौधा के ग्रामीणों का कहना है कि उनकी पूरी ग्राम सभा के करीब 150 लोग सेना में शामिल होकर देश की सेवा कर रहे हैं। वहीं 210 पूर्व सैनिक पेंशन पा रहे हैं।
पूर्व सैनिकों में देश सेवा का जज्बा
ग्राम सभा मौधा के चित्रपाल सिंह, राजबहादुर सिंह, विश्वनाथ सिंह और इंद्रपाल सिंह विभिन्न युद्धों में घायल हो गए थे। मौजूदा समय में यह लोग रिटायर होकर पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। पर देश सेवा का जज्बा अभी भी इनके अंदर है। चित्रपाल सिंह और राजबहादुर सिंह कहते हैं कि अभी भी वह लोग दुश्मनों के दांत खट्टे करने में पीछे नहीं रहेंगे।
इन शहीदों की पत्नियों का होगा सम्मान
शहीद कन्हई सिंह की पत्नी कुसमा देवी, शहीद रामऔतार की पत्नी रोशनी देवी, शहीद कुंजल सिंह की पत्नी शांति देवी और शहीद नरेंद्र सिंह की पत्नी आशा देवी गांव में ही रह रही हैं। गृहमंत्री इनका सम्मान करेंगे।
जगदीश सिंह की पहल पर बना स्मारक
शहीद स्मारक बनवाने में मेजर जगदीश सिंह राठौर सबसे पहले आगे आए। ये बताते हैं कि आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा देने के उद्देश्य से शहीद स्मारक के निर्माण का विचार आया। इसके बाद वह मुहिम में जुट गए। इसके लिए उन्होंने पूर्व सैनिकों, समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया। सभी ने पूरा मदद करने का आश्वासन दिया। वर्ष 2013 में नींव रखी।
वर्ष 2015 में शहीद स्मारक बनकर तैयार हो गया। बताया कि शहीद स्मारक के निर्माण में करीब 20 लाख रुपये की लागत आई है। इसके निर्माण कार्य में कैप्टन लालबहादुर सिंह, इंद्रपाल सिंह, हवलदार संभर सिंह, मेजर जगदीश सिंह समेत आधा सैकड़ा पूर्व सैनिकों, प्रधानों, पूर्व सांसद चंद्रभूषण सिंह मुन्नूबाबू और राजपूताना ग्रुप के चेयरमैन वीरेंद्र सिंह राठौर ने सहयोग किया।
डीएम व एसपी ने सभास्थल का लिया जायजा
गृहमंत्री की सभा को लेकर जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने मौधा स्थित सभास्थल पर पहुंचकर तैयारियों की जायजा लिया। उन्होंने सेफ हाउस और बैरीकेडिंग कराए जाने के निर्देश मातहतों को दिए। शुक्रवार दोपहर करीब 1.30 बजे जिलाधिकारी एनकेएस चौहान और एसपी विजय कुमार कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। उन्होंने तैयारियों का जायजा लिया।
जिलाधिकारी ने लग रहे पंडाल, पार्किंग स्थल और बैरीकेडिंग आदि के बारे में आयोजक अभय सिंह से जानकारी की। जिलाधिकारी ने पीडब्लूडी अफसरों को निर्देश दिए कि मोहम्मदाबाद से मौधा के बीच में पड़ने वाले ब्रेकर समतल कराए जाएं। एसपी विजय यादव ने सीओ मोहम्मदाबाद लेखराज सिंह को निर्देश दिए कि सभास्थल से पहले अरसानी गांव और
मौधा गांव से 200 मीटर पहले बैरीकेडिंग करवाएं। इन बैरीकेडिंग पर वाहनों को रोका जाएगा। एसपी ने पूरे सभास्थल की बैरीकेडिंग कराए जाने के निर्देश दिए। वीआईपी गाड़ियों की पार्किंग शक्ति सैनिक इंटर कालेज के पास होगी। सेफ हाउस भी बनाया जा रहा है। सभास्थल तक लोग पैदल ही जाएंगे। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी मनोज सिंघल, एसडीएम सुनील वर्मा, अपर पुलिस अधीक्षक रामभुवन चौरसिया और सीओ मोहम्मदाबाद लेखराज सिंह आदि मौजूद रहे।
स्मारक बनाया गया है, जिसका लोकार्पण 5 जुलाई को गृहमंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। मौधा की आबादी लगभग चार हजार है। 1900 मतदाता हैं। गांव के जानकारों की मानें तो प्रथम विश्वयुद्ध में यहां के 10 जवान अहिबरन सिंह प्रथम, सुतुआ सिंह, बरनाम सिंह, शिवपाल सिंह, जगन्नाथ सिंह, गोकरन सिंह, अजय सिंह, सरजू सिंह, छोटे सिंह व अहिबरन सिंह द्वितीय शहीद हुए थे। द्वितीय विश्वयुद्ध में तीन जवानों रामेश्वर सिंह, चंद्रपाल सिंह और हरबख्श सिंह ने प्राणों की आहुति दी थी। वर्ष 1962
में भारत-चीन युद्ध में रामऔतार सिंह, कुंजल सिंह और वर्ष 1965 में भारत-चीन युद्ध में राजबहादुर सिंह दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे। वर्ष 1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध में कन्हई सिंह और ज्ञानेंद्र सिंह ने दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे। दुश्मनों की गोली से दोनों शहीद हो गए थे। मौधा गांव के 18 शहीदों समेत हैदरपुर, गोसरपुर, मुड़गांव, करनपुर,
अरसानी, ईसेपुर, गढ़ी बनकटी, सहसपुर, मॉडलशंकरपुर, जिंजौटा पहाड़पुर, संकिसा, सिरौली, न्यामतपुर ठाकुराना और मुरान गांव के 42 जवानों ने देश के लिए जान दी थी। इन सभी के नाम मौधा में बने शहीद स्मारक में अंकित हैं। मौधा के ग्रामीणों का कहना है कि उनकी पूरी ग्राम सभा के करीब 150 लोग सेना में शामिल होकर देश की सेवा कर रहे हैं। वहीं 210 पूर्व सैनिक पेंशन पा रहे हैं।
पूर्व सैनिकों में देश सेवा का जज्बा
ग्राम सभा मौधा के चित्रपाल सिंह, राजबहादुर सिंह, विश्वनाथ सिंह और इंद्रपाल सिंह विभिन्न युद्धों में घायल हो गए थे। मौजूदा समय में यह लोग रिटायर होकर पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। पर देश सेवा का जज्बा अभी भी इनके अंदर है। चित्रपाल सिंह और राजबहादुर सिंह कहते हैं कि अभी भी वह लोग दुश्मनों के दांत खट्टे करने में पीछे नहीं रहेंगे।
इन शहीदों की पत्नियों का होगा सम्मान
शहीद कन्हई सिंह की पत्नी कुसमा देवी, शहीद रामऔतार की पत्नी रोशनी देवी, शहीद कुंजल सिंह की पत्नी शांति देवी और शहीद नरेंद्र सिंह की पत्नी आशा देवी गांव में ही रह रही हैं। गृहमंत्री इनका सम्मान करेंगे।
जगदीश सिंह की पहल पर बना स्मारक
शहीद स्मारक बनवाने में मेजर जगदीश सिंह राठौर सबसे पहले आगे आए। ये बताते हैं कि आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा देने के उद्देश्य से शहीद स्मारक के निर्माण का विचार आया। इसके बाद वह मुहिम में जुट गए। इसके लिए उन्होंने पूर्व सैनिकों, समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों से संपर्क किया। सभी ने पूरा मदद करने का आश्वासन दिया। वर्ष 2013 में नींव रखी।
वर्ष 2015 में शहीद स्मारक बनकर तैयार हो गया। बताया कि शहीद स्मारक के निर्माण में करीब 20 लाख रुपये की लागत आई है। इसके निर्माण कार्य में कैप्टन लालबहादुर सिंह, इंद्रपाल सिंह, हवलदार संभर सिंह, मेजर जगदीश सिंह समेत आधा सैकड़ा पूर्व सैनिकों, प्रधानों, पूर्व सांसद चंद्रभूषण सिंह मुन्नूबाबू और राजपूताना ग्रुप के चेयरमैन वीरेंद्र सिंह राठौर ने सहयोग किया।
डीएम व एसपी ने सभास्थल का लिया जायजा
गृहमंत्री की सभा को लेकर जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने मौधा स्थित सभास्थल पर पहुंचकर तैयारियों की जायजा लिया। उन्होंने सेफ हाउस और बैरीकेडिंग कराए जाने के निर्देश मातहतों को दिए। शुक्रवार दोपहर करीब 1.30 बजे जिलाधिकारी एनकेएस चौहान और एसपी विजय कुमार कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। उन्होंने तैयारियों का जायजा लिया।
जिलाधिकारी ने लग रहे पंडाल, पार्किंग स्थल और बैरीकेडिंग आदि के बारे में आयोजक अभय सिंह से जानकारी की। जिलाधिकारी ने पीडब्लूडी अफसरों को निर्देश दिए कि मोहम्मदाबाद से मौधा के बीच में पड़ने वाले ब्रेकर समतल कराए जाएं। एसपी विजय यादव ने सीओ मोहम्मदाबाद लेखराज सिंह को निर्देश दिए कि सभास्थल से पहले अरसानी गांव और
मौधा गांव से 200 मीटर पहले बैरीकेडिंग करवाएं। इन बैरीकेडिंग पर वाहनों को रोका जाएगा। एसपी ने पूरे सभास्थल की बैरीकेडिंग कराए जाने के निर्देश दिए। वीआईपी गाड़ियों की पार्किंग शक्ति सैनिक इंटर कालेज के पास होगी। सेफ हाउस भी बनाया जा रहा है। सभास्थल तक लोग पैदल ही जाएंगे। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी मनोज सिंघल, एसडीएम सुनील वर्मा, अपर पुलिस अधीक्षक रामभुवन चौरसिया और सीओ मोहम्मदाबाद लेखराज सिंह आदि मौजूद रहे।