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हर-हर गंगे के उद्घोष से गूंजे तट
ब्यूरो/अमर उजाला,फर्रुखाबाद
Updated Sun, 24 Jan 2016 11:32 PM IST
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फर्रुखाबाद। रामनगरिया में माघ के प्रारंभिक स्नान पर हर-हर गंगे के उद्घोष से पांचाल घाट गूंज उठे। भक्तों ने गंगा में डुबकी लगाकर मन्नत मांगी और मां गंगा की पूजा अर्चना कर आरती उतारी। सारे दिन गंगा तट पर भजन-कीर्तन होते रहे।
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शाहजहांपुर के रामआसरे का कहना है कि वह कई वर्षों से प्रत्येक पर्व पर गंगा स्नान के लिए आते हैं। पंडित प्रेम कुमार का कहना है कि यहां जो भक्त पूर्णिमा के दिन स्नान करता है, उनपर मां गंगा की कृपा बनी रहती है। भक्तों के लिए घाटों पर विशेष व्यवस्था की गई है। घाट के पास प्रसाद की दुकानें सजी हैं।
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कल्पवास कर रहे महंत स्वामी शक्तिस्वरूप ब्रह्मचारी का कहना है कि पौष पूर्णिमा के स्नान को ही माघ माह का प्रथम स्नान माना गया है। मान्यता है कि जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तो उसी समय से पूर्ण काल उपस्थित होता है। गंगातट पर स्नान, पूजापाठ, जप, तप और दान-पुण्य को ही कल्पवास कहा गया है।
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भक्त जितना भजन एक कल्प तक करता, उतना ही फल गंगातट पर भजन-पूजन से एक माह में प्राप्त हो जाता है। गंगा स्नान करने से दैहिक, दैविक और भौतिक ताप नष्ट हो जाते हैं। गंगाजल का सेवन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पहले संडे को खिली धूप में गमकी रामनगरिया
फर्रुखाबाद। उद्घाटन के बाद रविवार को खिली धूप में रामनगरिया गमक गई। शहर व देहात से बड़ी संख्या में लोग मेले में पहुंचे। इन्होंने जमकर खरीददारी की। पौष पूर्णिमा पर पूरे दिन गंगा स्नान होता रहा। भक्तों ने गंगा तटों पर सत्यनरायन की कथा सुनी। गंगा की आरती की गई। भंडाराें का भी आयोजन हुआ। वहीं, मेले में अभी भी दिक्कतें बरकरार हैं। रास्ते ऊबड़-खाबड़ हैं।