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मेला शुरू, साधु संतों ने गंगा स्नान व धार्मिक अनुष्ठान किए
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Mon, 05 Jan 2015 11:30 PM IST
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आस्था, आध्यात्म और लोक संस्कृति को समेटे मां भागीरथी के तट पर लगने वाली
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श्री रामनगरिया का शुभारंभ पौषी पूर्णिमा से सोमवार को हो गया है। साधु
संतों ने गंगा स्नान व धार्मिक अनुष्ठान किए तो जिलाधिकारी ने अधिकारियाें
के साथ फीता काटकर मेला का उद्घाटन किया।
गंगा में दीपदान कर कल्पवास व मेले के सकुशल संपन्न होने व सभी के मंगल के लिए गंगा व देवाें से कामनाएं की गईं। प्रशासनिक अधिकारियों व साधु-संतों ने पुण्य सलिला की आरती उतारी। माघ मास के पहले स्नान पर दूरदराज से आए हजारों स्नानार्थियों ने गंगा में डुबकी लगाई। कल्पवास इलाके में कथा, भागवत, दानपुण्य के कार्यक्रम दिन भर चलते रहे। सत्यनरायन की कथाएं सुनी गईं।
गंगा को पहरावन चढ़ाई गई। आश्रमों में साधु-संतों का भोज कराया गया। ... हर कोई आस्था के रंग में डूबा दिखा। दिन में खिली धूप ने माहौल खुशनुमा कर दिया। सैकड़ों वर्षों से वैदिक संस्कृति को समेटे राम की नगरिया को वर्ष 1985 में मेले से जोड़ दिया गया।
पहली बार मेला का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री नरायनदत्त तिवारी ने किया था। तब से यहां साधना और मेला का सिलसिला साथ चलता है। सांस्कृतिक व लोक कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है। कई प्रांताें से श्रद्धालु यहां शिरकत करते हैं।
गंगा में दीपदान कर कल्पवास व मेले के सकुशल संपन्न होने व सभी के मंगल के लिए गंगा व देवाें से कामनाएं की गईं। प्रशासनिक अधिकारियों व साधु-संतों ने पुण्य सलिला की आरती उतारी। माघ मास के पहले स्नान पर दूरदराज से आए हजारों स्नानार्थियों ने गंगा में डुबकी लगाई। कल्पवास इलाके में कथा, भागवत, दानपुण्य के कार्यक्रम दिन भर चलते रहे। सत्यनरायन की कथाएं सुनी गईं।
गंगा को पहरावन चढ़ाई गई। आश्रमों में साधु-संतों का भोज कराया गया। ... हर कोई आस्था के रंग में डूबा दिखा। दिन में खिली धूप ने माहौल खुशनुमा कर दिया। सैकड़ों वर्षों से वैदिक संस्कृति को समेटे राम की नगरिया को वर्ष 1985 में मेले से जोड़ दिया गया।
पहली बार मेला का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री नरायनदत्त तिवारी ने किया था। तब से यहां साधना और मेला का सिलसिला साथ चलता है। सांस्कृतिक व लोक कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है। कई प्रांताें से श्रद्धालु यहां शिरकत करते हैं।