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अस्पताल में गंदी चादरों से हुआ सामना
farrukhabad
Updated Fri, 14 Sep 2018 12:39 AM IST
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लोहिया अस्पताल में गंदी चादरें देख नाराजगी जताते नोडल अधिकारी।
- फोटो : amarujala
जनपद के नोडल अधिकारी लखनऊ से सीधे लोहिया अस्पताल पहुंचे। यहां के निरीक्षण में उन्हें अव्यवस्थाओं की भरमार मिली। उन्होंने दो घंटे से ज्यादा समय लोहिया अस्पताल में गुजारा। बारीकी से एक एक चीज को चेक किया। इस दौरान एक महिला ने उनसे शिकायत कर बताया कि उसकी नसबंदी फेल हो गई थी। उसे अभी तक रुपये नहीं मिले हैं। रुपये दिलाने के नाम पर एक एएनएम 15 हजार रुपये उससे वसूल चुकी है।
जनपद के नोडल अधिकारी सचिव नगर विकास जीएस प्रियदर्शी दोपहर को सीधे लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे। यहां पर ईएमओ से ऑक्सीजन आदि की उपलब्धता पूछने के बाद उन्होंने उपकरण भी देखे। इसके बाद मरीजों से जानकारी ली। वार्ड में चादरें गंदी देख नाराजगी जताई और पूछा कि यह बदली क्यों नहीं गईं। कर्मियों ने बताया कि रोज कलर के हिसाब से बिछाई जाती हैं। प्रतिदिन बदली जाती हैं। एक मरीज से पूछा तो पता चला कि बुधवार को ही चादर बदली गई थीं। गुरुवार को नहीं बदली गईं। बताया गया कि सिस्टर छुट्टी पर है इसलिए बदली नहीं गई। उन्होंने कहा कि यह कोई भी बदल सकता है।
इसी दौरान वार्ड में भर्ती एक लड़की की तबियत बिगड़ी तो उन्होंने उसे तत्काल देखने के निर्देश दिए। पानी के ओवरहेड टैंक पर सफाई करवाने की तिथि लिखवाने के साथ ही ब्लड डोनर की सूची बाहर लगवाने को कहा। ब्लड बैंक के पास ही नए बने एक्सरे रूम को देखा तो वह खाली था। बताया गया कि एक्सरे ऊपर किए जाते हैं। यहां शिफ्ट किया जाना है। एंटी रैबीज के इंजेक्शन कक्ष को महिला व पुरुष का अलग-अलग करने के निर्देश दिए। पूछताछ केंद्र अंदर बने होने पर उसे बाहर की ओर ले जाने को कहा। वह लोहिया के महिला अस्पताल पहुंचे। वहां उन्हें सीएमएस को ढूंढना पड़ा। करीब पांच मिनट बाद वह दौड़ते हुए आए। ब्रेस्ट फीडिंग के लिए बनाई गई जगह में धूल भरी थी। बताया गया कि यहां पर कोई नहीं बैठता है। उन्होंने कहा कि इतनी गंदगी में कौन बैठेगा। अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लटका देखा तो बताया गया कि डॉक्टर नहीं है।
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जनपद के नोडल अधिकारी सचिव नगर विकास जीएस प्रियदर्शी दोपहर को सीधे लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे। यहां पर ईएमओ से ऑक्सीजन आदि की उपलब्धता पूछने के बाद उन्होंने उपकरण भी देखे। इसके बाद मरीजों से जानकारी ली। वार्ड में चादरें गंदी देख नाराजगी जताई और पूछा कि यह बदली क्यों नहीं गईं। कर्मियों ने बताया कि रोज कलर के हिसाब से बिछाई जाती हैं। प्रतिदिन बदली जाती हैं। एक मरीज से पूछा तो पता चला कि बुधवार को ही चादर बदली गई थीं। गुरुवार को नहीं बदली गईं। बताया गया कि सिस्टर छुट्टी पर है इसलिए बदली नहीं गई। उन्होंने कहा कि यह कोई भी बदल सकता है।
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इसी दौरान वार्ड में भर्ती एक लड़की की तबियत बिगड़ी तो उन्होंने उसे तत्काल देखने के निर्देश दिए। पानी के ओवरहेड टैंक पर सफाई करवाने की तिथि लिखवाने के साथ ही ब्लड डोनर की सूची बाहर लगवाने को कहा। ब्लड बैंक के पास ही नए बने एक्सरे रूम को देखा तो वह खाली था। बताया गया कि एक्सरे ऊपर किए जाते हैं। यहां शिफ्ट किया जाना है। एंटी रैबीज के इंजेक्शन कक्ष को महिला व पुरुष का अलग-अलग करने के निर्देश दिए। पूछताछ केंद्र अंदर बने होने पर उसे बाहर की ओर ले जाने को कहा। वह लोहिया के महिला अस्पताल पहुंचे। वहां उन्हें सीएमएस को ढूंढना पड़ा। करीब पांच मिनट बाद वह दौड़ते हुए आए। ब्रेस्ट फीडिंग के लिए बनाई गई जगह में धूल भरी थी। बताया गया कि यहां पर कोई नहीं बैठता है। उन्होंने कहा कि इतनी गंदगी में कौन बैठेगा। अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लटका देखा तो बताया गया कि डॉक्टर नहीं है।
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