{"_id":"6297b25536c3a803266f6c10","slug":"embezzlement-in-youth-punishment-in-old-age-farrukhabad-news-knp7001161164","type":"story","status":"publish","title_hn":"जवानी में किया गबन, बुढापे पर मिली सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जवानी में किया गबन, बुढापे पर मिली सजा
विज्ञापन
फर्रुखाबाद। डाकघर में गबन करने वाले सेवानिवृत्त डाकपाल को पांच मुकदमों में सात साल की सजा सुनाई है। 46 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। पुलिस ने दोषी को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर सजा भुगतने के लिए जेल भेजा गया है।
जनपद कन्नौज थाना छिबरामऊ के गांव जाफराबाद निवासी आशवेंद्र कुमार गांव में ही डाकघर में वर्ष 1979 में अतिरिक्त डाकपाल के पद पर तैनात रहे। वर्ष 1982 व 1983 में खाता धारकों से रुपये लेने के बाद पास बुक में पूरे रुपये अंकित करते थे और डाकघर में कुछ रुपये जमा करते थे।
इस प्रकार करीब नौ हजार रुपये का गबन अलग-अलग खाताधारकों से किया। इसकी शिकायत पर डाकघर निरीक्षक आरसी वर्मा ने 1984 में आशवेंद्र कुमार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पांचों मुकदमों की सुनवाई एक साथ हुई। बचाव पक्ष के वकील व अभियोजन अधिकारी अलका ने सुनवाई के दौरान दलीलें पेश कीं। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सेवानिवृत्त डाकपाल आशवेंद्र को गबन व धोखाधड़ी में दोषी पाकर पांचों मुकदमों में सजा और जुर्माने से दंडित किया।
विज्ञापन
अभियोजन अधिकारी अलका ने बताया कि पांचों मुकदमों में सबसे ज्यादा सजा सात साल की है। इसलिए दोषसिद्ध सेवानिवृत्त डाकपाल को सात साल कैद की सजा काटनी होगी।
विज्ञापन
जनपद कन्नौज थाना छिबरामऊ के गांव जाफराबाद निवासी आशवेंद्र कुमार गांव में ही डाकघर में वर्ष 1979 में अतिरिक्त डाकपाल के पद पर तैनात रहे। वर्ष 1982 व 1983 में खाता धारकों से रुपये लेने के बाद पास बुक में पूरे रुपये अंकित करते थे और डाकघर में कुछ रुपये जमा करते थे।
विज्ञापन
इस प्रकार करीब नौ हजार रुपये का गबन अलग-अलग खाताधारकों से किया। इसकी शिकायत पर डाकघर निरीक्षक आरसी वर्मा ने 1984 में आशवेंद्र कुमार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पांचों मुकदमों की सुनवाई एक साथ हुई। बचाव पक्ष के वकील व अभियोजन अधिकारी अलका ने सुनवाई के दौरान दलीलें पेश कीं। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सेवानिवृत्त डाकपाल आशवेंद्र को गबन व धोखाधड़ी में दोषी पाकर पांचों मुकदमों में सजा और जुर्माने से दंडित किया।
विज्ञापन
अभियोजन अधिकारी अलका ने बताया कि पांचों मुकदमों में सबसे ज्यादा सजा सात साल की है। इसलिए दोषसिद्ध सेवानिवृत्त डाकपाल को सात साल कैद की सजा काटनी होगी।