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Farrukhabad News: डीएल की फीस 1000, खर्च करने पड़ रहे 8000 रुपये
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फर्रुखाबाद। एआरटीओ दफ्तर में ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर फिटनेस और वाहन पंजीकरण तक में बड़ा खेल चल रहा है। ड्राइविंग लाइसेंस की फीस भले ही 1000 रुपये है, मगर टेस्ट ट्रैक पर पास कराने और दफ्तर के खर्च के नाम पर 8000 रुपये तक लिए जा रहे हैं।
ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक एक अगस्त से शुरू हुआ है। इसके बाद ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना पांच हजार रुपये महंगा हो गया। परमानेंट लाइसेंस के लिए 1000 रुपये शुल्क, 1500 रुपये दफ्तर खर्च और 500 से 1000 रुपये दलाल लेता था। अब दलाल 5000 रुपये टेस्ट में पास कराने के ले रहे हैं।
मंगलवार को बीबीगंज का एक युवक अपने भाई का ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने गया। फोटो खिंचवाते समय एक ठेका कर्मचारी ने 9000 रुपये खर्च बताया। बताया कि दलाल ने उससे टेस्ट में पास करवाने के 5000 रुपये लिए। ट्रैक पर पहुंचने पर एक कार की सीट पर बैठाकर फोटो खींचकर बाहर निकाल लिया।
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एक दलाल ने नाम व फोटो न छापने की शर्त पर पूरे खेल की विस्तृत जानकारी दी। बताया कि फिटनेस कराने में बड़े वाहन पर 2500 और छोटे पर 1500 रुपये, टेंपो व ऑटो पर 1000 रुपये दफ्तर खर्च देना ही होगा। बाइक रजिस्ट्रेशन में 200, कार पर 500, कामर्शियल वाहन पर 1000 और हैवी वाहन पर पांच से 15 हजार रुपये तक देने पड़ते हैं। यह रकम वाहनों की एजेंसी से आने वाले एजेंट से ली जाती है।
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हिसाब-किताब की अलग जिम्मेदारी
कई सालों से दफ्तर में काम वाले एक ठेका कर्मचारी को पिछले साल सितंबर में कन्नौज के एआरटीओ दफ्तर में तैनात कर दिया गया था। वहां की महिला कर्मचारी यहां तैनात हुई थी। मगर न तो महिला कर्मी यहां आई और न ही यह कर्मचारी कन्नौज गया। जिम्मेदारों की शह पर वह कर्मी एआरटीओ की केबिन के नीचे भूतल पर बनी केबिन में एकांत में बैठता है। उस पर ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन रजिस्ट्रेशन का हिसाब-किताब करने की जिम्मेदारी है। फिटनेस के वाहनों की वसूली फिटनेस लिपिक के मुंह लगे और कुछ महीने पहले तक उन्हीं की सीट पर काम करने वाले लिपिक पर है। वही सभी दलालों की फाइलों का लेखाजोखा तैयार करके हिसाब करता है।
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केबिन में घुसकर काम करवाते हैं दलाल
एआरटीओ प्रशासन के निर्देश हैं कि कोई भी कर्मचारी अपनी केबिन में किसी को भी नहीं घुसाएगा। मगर लिपिक से सेटिंग वाले दलाल केबिनों में घुसकर फाइलों को पास करवाते हैं। यही नहीं कुर्सी पर जमे रहना भी आम बात है। दलालों के काम के समय आम जनता का काम रोक दिया जाता है।
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एआरटीओ प्रशासन कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि मैं तो हर आवेदक को रिश्वत देने से मना करता हूं। ट्रैक पर टेस्ट देने जाना होगा। मैं चाहता हूं कि एक ऑपरेशन हो जाए यहां पर। सब को उठाकर बंद किया जाए। जिस तरह बच्चे स्कूल की मैडम की बात मानते हैं, माता-पिता की नहीं। मैं कितना भी कहूं, मगर आवेदक इन लोगों की ही बात मानते हैं। अंदर घुसना बंद करवा दिया है। यदि ऐसा हो रहा है, तो वह और कड़ाई से निगरानी करेंगे। दबाव इतना ज्यादा है कि कह नहीं सकते। बड़ी कार्रवाई प्रस्तावित है, मगर अभी हुई नहीं। सब सही हो जाएगा।
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ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक एक अगस्त से शुरू हुआ है। इसके बाद ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना पांच हजार रुपये महंगा हो गया। परमानेंट लाइसेंस के लिए 1000 रुपये शुल्क, 1500 रुपये दफ्तर खर्च और 500 से 1000 रुपये दलाल लेता था। अब दलाल 5000 रुपये टेस्ट में पास कराने के ले रहे हैं।
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मंगलवार को बीबीगंज का एक युवक अपने भाई का ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने गया। फोटो खिंचवाते समय एक ठेका कर्मचारी ने 9000 रुपये खर्च बताया। बताया कि दलाल ने उससे टेस्ट में पास करवाने के 5000 रुपये लिए। ट्रैक पर पहुंचने पर एक कार की सीट पर बैठाकर फोटो खींचकर बाहर निकाल लिया।
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एक दलाल ने नाम व फोटो न छापने की शर्त पर पूरे खेल की विस्तृत जानकारी दी। बताया कि फिटनेस कराने में बड़े वाहन पर 2500 और छोटे पर 1500 रुपये, टेंपो व ऑटो पर 1000 रुपये दफ्तर खर्च देना ही होगा। बाइक रजिस्ट्रेशन में 200, कार पर 500, कामर्शियल वाहन पर 1000 और हैवी वाहन पर पांच से 15 हजार रुपये तक देने पड़ते हैं। यह रकम वाहनों की एजेंसी से आने वाले एजेंट से ली जाती है।
हिसाब-किताब की अलग जिम्मेदारी
कई सालों से दफ्तर में काम वाले एक ठेका कर्मचारी को पिछले साल सितंबर में कन्नौज के एआरटीओ दफ्तर में तैनात कर दिया गया था। वहां की महिला कर्मचारी यहां तैनात हुई थी। मगर न तो महिला कर्मी यहां आई और न ही यह कर्मचारी कन्नौज गया। जिम्मेदारों की शह पर वह कर्मी एआरटीओ की केबिन के नीचे भूतल पर बनी केबिन में एकांत में बैठता है। उस पर ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन रजिस्ट्रेशन का हिसाब-किताब करने की जिम्मेदारी है। फिटनेस के वाहनों की वसूली फिटनेस लिपिक के मुंह लगे और कुछ महीने पहले तक उन्हीं की सीट पर काम करने वाले लिपिक पर है। वही सभी दलालों की फाइलों का लेखाजोखा तैयार करके हिसाब करता है।
केबिन में घुसकर काम करवाते हैं दलाल
एआरटीओ प्रशासन के निर्देश हैं कि कोई भी कर्मचारी अपनी केबिन में किसी को भी नहीं घुसाएगा। मगर लिपिक से सेटिंग वाले दलाल केबिनों में घुसकर फाइलों को पास करवाते हैं। यही नहीं कुर्सी पर जमे रहना भी आम बात है। दलालों के काम के समय आम जनता का काम रोक दिया जाता है।
एआरटीओ प्रशासन कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि मैं तो हर आवेदक को रिश्वत देने से मना करता हूं। ट्रैक पर टेस्ट देने जाना होगा। मैं चाहता हूं कि एक ऑपरेशन हो जाए यहां पर। सब को उठाकर बंद किया जाए। जिस तरह बच्चे स्कूल की मैडम की बात मानते हैं, माता-पिता की नहीं। मैं कितना भी कहूं, मगर आवेदक इन लोगों की ही बात मानते हैं। अंदर घुसना बंद करवा दिया है। यदि ऐसा हो रहा है, तो वह और कड़ाई से निगरानी करेंगे। दबाव इतना ज्यादा है कि कह नहीं सकते। बड़ी कार्रवाई प्रस्तावित है, मगर अभी हुई नहीं। सब सही हो जाएगा।