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इमरजेंसी में चली ओपीडी, मरीजों में धक्का-मुक्की
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लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में डॉक्टर को दिखाने के लिए बैठे मरीज। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
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फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया पुरुष अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टरों की कमी से मरीज परेशान हैं। आर्थो सर्जन के लिए घंटों इंतजार के बाद मरीजों को इमरजेंसी भेजा गया। वहां भीड़ इतनी कि धक्का मुक्की होने लगी। बमुश्किल डॉक्टर ने मरीजों को देखा। बुजुर्ग और बच्चे घंटोें यहां भी जमीन पर बैठे रहे।
बुधवार को लोहिया अस्पताल की ओपीडी की जिम्मेदारी एक डाक्टर के सुपुर्द रही। आर्थो सर्जन डॉ. रिषि कनौजिया ने इमरजेंसी में नाइट ड्यूटी की, लिहाजा उनका दिन में उनका विश्राम था। आर्थो सर्जन डॉ. योगेंद्र मिश्रा ओटी ड्यूटी कर रहे थे। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज पांडेय वीआईपी ड्यूटी में भेजे गए, लिहाजा फिजीनिशयन डॉ. अशोक कुमार के सहारे ही ओपीडी चलती रही।
ओपीडी में 600 से अधिक मरीज पहुंचे। सुबह से ही मरीज आर्थो सर्जन के कमरे के बाहर मरीज घंटों जमीन पर बैठे रहे। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. किरीटी कनौजिया की इमरजेंसी में ड्यूटी लगाई गई। लिहाजा वे भी ओपीडी में नहीं बैठे। ऐसे में सवा 11 बजे सीएमएस के निर्देश पर ओपीडी कर्मियों ने इंतजार में बैठे मरीजों को इमरजेंसी भेज दिया, तो धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
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इस दौरान इमरजेंसी में आए मरीजों को फार्मासिस्ट व वार्ड ब्वाय ही देखते रहे। इमरजेंसी में भी डाक्टर को दिखाने के लिए बुजुर्ग और बच्चे जमीन पर बैठकर घंटों इंतजार करते रहे। सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त ने बताया कि डॉक्टरों की कमी है। काम सभी जगह चलाना है। लिहाजा इमरजेंसी में भी मरीजों को देखा जा रहा है।
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बुधवार को लोहिया अस्पताल की ओपीडी की जिम्मेदारी एक डाक्टर के सुपुर्द रही। आर्थो सर्जन डॉ. रिषि कनौजिया ने इमरजेंसी में नाइट ड्यूटी की, लिहाजा उनका दिन में उनका विश्राम था। आर्थो सर्जन डॉ. योगेंद्र मिश्रा ओटी ड्यूटी कर रहे थे। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज पांडेय वीआईपी ड्यूटी में भेजे गए, लिहाजा फिजीनिशयन डॉ. अशोक कुमार के सहारे ही ओपीडी चलती रही।
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ओपीडी में 600 से अधिक मरीज पहुंचे। सुबह से ही मरीज आर्थो सर्जन के कमरे के बाहर मरीज घंटों जमीन पर बैठे रहे। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. किरीटी कनौजिया की इमरजेंसी में ड्यूटी लगाई गई। लिहाजा वे भी ओपीडी में नहीं बैठे। ऐसे में सवा 11 बजे सीएमएस के निर्देश पर ओपीडी कर्मियों ने इंतजार में बैठे मरीजों को इमरजेंसी भेज दिया, तो धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
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इस दौरान इमरजेंसी में आए मरीजों को फार्मासिस्ट व वार्ड ब्वाय ही देखते रहे। इमरजेंसी में भी डाक्टर को दिखाने के लिए बुजुर्ग और बच्चे जमीन पर बैठकर घंटों इंतजार करते रहे। सीएमएस डॉ. राजकुमार गुप्त ने बताया कि डॉक्टरों की कमी है। काम सभी जगह चलाना है। लिहाजा इमरजेंसी में भी मरीजों को देखा जा रहा है।