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डीएम के गोद लिए गांव में कुपोषित बच्चे की मौत
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Wed, 20 May 2015 11:32 PM IST
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कायमगंज में डीएम के गोद लिए गांव में कुपोषित बच्चे ने दम तोड़ दिया।
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बच्चे का अप्रैल में 15 दिन लोहिया अस्पताल में इलाज चला था। बच्चे की मौत
से परिजनों में गुस्सा है। इनका कहना है कि किसी अन्य अस्पताल में इलाज
कराते तो बच्चा ठीक हो सकता था।
डीएम एनकेएस चौहान ने गांव ब्राहिमपुर को गोद लिया है। उन्होंने गांव के कुपोषित बच्चों कई बार गांव जाकर परीक्षण कराया था। अतिकुपोषित बच्चों का चयन कराकर उनका इलाज लोहिया अस्पताल में कराने के निर्देश दिए थे। अप्रैल में गांव में लगे शिविर में तीन बच्चों को अति कुपोेषित चुना गया था। इनमें गांव के विनोद पाल के 8 माह का पुत्र गुड्डू, अजय की 6 माह की पुत्री राधा और जयपाल का एक साल का बेटा अर्ज़ुन शामिल था। इनको डीएम ने इलाज के लिए
लोहिया अस्पताल भेजवाया था। ये 5 से 20 अप्र्रैल तक लोहिया में भर्ती रहे थे। इसके बाद परिजन गुड्डू को घर ले आए। हालत बिगड़ने पर गुड्डू का प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने लगे। बुधवार की दोपहर गुड्डू ने दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत से परिवारीजनों में लोहिया अस्पताल के प्रति गुस्सा है। गुड्डू का पिता विनोद दिल्ली में रहकर फल का ठेला लगाता है। गुड्डू के दादा सत्यप्रकाश और दादी बिट्टनदेवी ने डीएम के कहने पर 15 दिन तक लोहिया अस्पताल में रहकर उसका
इलाज कराया था। सत्यप्रकाश का कहना है कि लोहिया में भर्ती रहने के दौरान गुड्डू का वजन बढ़ने के बजाय कम हो गया था। चाचा अशोक कहना है कि 14 दिन में जब गुडडू की आंखें टंग गई थीं। खांसी से हालत खराब हो गई तो उसने डाक्टरों पर दबाव बनाकर बच्चे की छुट्टी कराई थी। इसके बाद एक निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया। यहां उसकी हालत में कुछ सुधार हुआ। सत्यप्रकाश ने आरोप लगाया कि लोहिया अस्पताल सुबह 11 बजे दिन का खाना और दोपहर 2 बजे
रात का खाना दे दिया जाता था। बच्चे का क्या इलाज हो रहा है, उसे क्या खाने को दिया जा रहा है। यह बताने वाला कोई नहीं है। कहा कि इससे अच्छा तो उसका कहीं और इलाज करा लेते। बुधवार की दोपहर परिजनों ने बच्चे का गांव के बाहर अंतिम संस्कार कर दिया।
डीएम एनकेएस चौहान ने गांव ब्राहिमपुर को गोद लिया है। उन्होंने गांव के कुपोषित बच्चों कई बार गांव जाकर परीक्षण कराया था। अतिकुपोषित बच्चों का चयन कराकर उनका इलाज लोहिया अस्पताल में कराने के निर्देश दिए थे। अप्रैल में गांव में लगे शिविर में तीन बच्चों को अति कुपोेषित चुना गया था। इनमें गांव के विनोद पाल के 8 माह का पुत्र गुड्डू, अजय की 6 माह की पुत्री राधा और जयपाल का एक साल का बेटा अर्ज़ुन शामिल था। इनको डीएम ने इलाज के लिए
लोहिया अस्पताल भेजवाया था। ये 5 से 20 अप्र्रैल तक लोहिया में भर्ती रहे थे। इसके बाद परिजन गुड्डू को घर ले आए। हालत बिगड़ने पर गुड्डू का प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने लगे। बुधवार की दोपहर गुड्डू ने दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत से परिवारीजनों में लोहिया अस्पताल के प्रति गुस्सा है। गुड्डू का पिता विनोद दिल्ली में रहकर फल का ठेला लगाता है। गुड्डू के दादा सत्यप्रकाश और दादी बिट्टनदेवी ने डीएम के कहने पर 15 दिन तक लोहिया अस्पताल में रहकर उसका
इलाज कराया था। सत्यप्रकाश का कहना है कि लोहिया में भर्ती रहने के दौरान गुड्डू का वजन बढ़ने के बजाय कम हो गया था। चाचा अशोक कहना है कि 14 दिन में जब गुडडू की आंखें टंग गई थीं। खांसी से हालत खराब हो गई तो उसने डाक्टरों पर दबाव बनाकर बच्चे की छुट्टी कराई थी। इसके बाद एक निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया। यहां उसकी हालत में कुछ सुधार हुआ। सत्यप्रकाश ने आरोप लगाया कि लोहिया अस्पताल सुबह 11 बजे दिन का खाना और दोपहर 2 बजे
रात का खाना दे दिया जाता था। बच्चे का क्या इलाज हो रहा है, उसे क्या खाने को दिया जा रहा है। यह बताने वाला कोई नहीं है। कहा कि इससे अच्छा तो उसका कहीं और इलाज करा लेते। बुधवार की दोपहर परिजनों ने बच्चे का गांव के बाहर अंतिम संस्कार कर दिया।