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उखड़ने लगे पानी की टंकियों की सीढ़ियों पर लगे गेट
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सातनपुर में टंकी का टूटा पड़ा गेट।
- फोटो : FARRUKHABAD
उखड़ने लगे टंकियों की सीढ़ियों पर लगे गेट
फर्रुखाबाद। सुरक्षा को ध्यान में रखकर पानी की टंकियों की सीढ़ियों पर चंद दिन पहले लगाए गए गेट उखड़ने लगे हैं। कई गेटों को तो सीढ़ियों के एंगलों से तार से बांधा गया है। पालिका ने 16 स्थानों पर गेट लगवाए हैं। इनकी कीमत 72000 रुपये बताई गई है। गेटों की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा हो गया है।
नवंबर में फतेहगढ़ की एक पानी की टंकी पर शमसाबाद के गांव किसरौली निवासी चाचा-भतीजा चढ़ गए थे। डीएम और एसपी ने पहुंचकर आश्वासन देकर दोनों को नीचे उतारा था। इसके बाद महसूस किया गया कि बिना गेट वाली टंकियों की सीढ़ियों से कोई अराजकतत्व भी चढ़ सकता है। इस पर अंकुश लगाने के लिए डीएम ने नगर पालिका को सभी टंकियों की सीढ़ियों पर गेट लगवाने के निर्देश दिए थे। नगर पालिका ने 20 नवंबर तक 14 क्रियाशील, एक कंडम और सातनपुर मंडी की एक टंकी की सीढ़ियों पर गेट लगा दिए थे।
कुछ टंकियों के गेट तारों से बांधे गए थे, वह तार टूटने से लटकने लगे हैं। 15 दिन भी नहीं बीते और सातनपुर गांव के सामने वाली टंकी समेत कई अन्य के गेट उखड़कर जमीन पर गिर पड़े हैं। इससे उनकी गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। बमुश्किल 10 किलो वजन वाले एक गेट की कीमत 4500 रुपये दिखाते हुए बिल लगाए गए हैं। इससे सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है। ईओ रविंद्र कुमार ने बताया, वह खुद सभी टंकियों के गेट चेक करेंगे। जो भी कमी मिलेगी, उसे पूरा कराया जाएगा। यदि गुणवत्ता ठीक नहीं है, तो भुगतान में कटौती होगी।
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फर्रुखाबाद। सुरक्षा को ध्यान में रखकर पानी की टंकियों की सीढ़ियों पर चंद दिन पहले लगाए गए गेट उखड़ने लगे हैं। कई गेटों को तो सीढ़ियों के एंगलों से तार से बांधा गया है। पालिका ने 16 स्थानों पर गेट लगवाए हैं। इनकी कीमत 72000 रुपये बताई गई है। गेटों की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा हो गया है।
नवंबर में फतेहगढ़ की एक पानी की टंकी पर शमसाबाद के गांव किसरौली निवासी चाचा-भतीजा चढ़ गए थे। डीएम और एसपी ने पहुंचकर आश्वासन देकर दोनों को नीचे उतारा था। इसके बाद महसूस किया गया कि बिना गेट वाली टंकियों की सीढ़ियों से कोई अराजकतत्व भी चढ़ सकता है। इस पर अंकुश लगाने के लिए डीएम ने नगर पालिका को सभी टंकियों की सीढ़ियों पर गेट लगवाने के निर्देश दिए थे। नगर पालिका ने 20 नवंबर तक 14 क्रियाशील, एक कंडम और सातनपुर मंडी की एक टंकी की सीढ़ियों पर गेट लगा दिए थे।
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कुछ टंकियों के गेट तारों से बांधे गए थे, वह तार टूटने से लटकने लगे हैं। 15 दिन भी नहीं बीते और सातनपुर गांव के सामने वाली टंकी समेत कई अन्य के गेट उखड़कर जमीन पर गिर पड़े हैं। इससे उनकी गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। बमुश्किल 10 किलो वजन वाले एक गेट की कीमत 4500 रुपये दिखाते हुए बिल लगाए गए हैं। इससे सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है। ईओ रविंद्र कुमार ने बताया, वह खुद सभी टंकियों के गेट चेक करेंगे। जो भी कमी मिलेगी, उसे पूरा कराया जाएगा। यदि गुणवत्ता ठीक नहीं है, तो भुगतान में कटौती होगी।
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