{"_id":"13a5c2950626caa239069cffe1956090","slug":"discussion-on-simplification-of-sanskrit-language-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"संस्कृत भाषा के सरलीकरण पर चर्चा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संस्कृत भाषा के सरलीकरण पर चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो फर्रुखाबाद।
Updated Sun, 30 Aug 2015 12:21 AM IST
विज्ञापन
संस्कृत दिवस पर शनिवार को लोहाई रोड स्थित भारतीय संस्कृति सद्भाव विद्यापीठ में आयोजित गोष्ठी में संस्कृत भाषा के सरलीकरण पर चर्चा हुई।
विज्ञापन
कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि वेद व्यास के चित्र पर दीप जलाकर किया गया। गोष्ठी में दिवाकरनंद दुबे ने कहा कि संस्कृत भाषा कल्पलता के समान है। इसको जानने वाला कभी बेरोजगार नहीं रहता है। वीके श्रीमाली ने संस्कृत भाषा की मधुरता और व्याकरण पर प्रकाश डाला।
विज्ञापन
ज्योति स्वरूप अग्निहोत्री ने संस्कृत साहित्य के विषय में लोगों को अवगत कराया। संस्कृत भाषा पर विदेशों में किए गए शोध के बारे में डॉ. रुद्र नरायन त्रिपाठी ने जानकारी दी। प्रवक्ता डॉ. रमाकांत तिवारी ने संस्कृत के पठन पाठन में तेजी लाने पर बल दिया।
विज्ञापन
संस्कृत विद्यालय के पूर्व प्राचार्य आचार्य विष्णु नारायण शुक्ल ने संस्कृत विद्यालयों में गिरती छात्र संख्या पर चिंता जताई। डॉ. कृष्णकांत अक्षर ने कहा कि संस्कृत व्याकरण को सरल बनाने के लिए सारिणी पद्धति पर कार्य चल रहा है।
उन्होंने कहा कि सारणी को मानचित्र की तरह दीवार पर टांग कर सरलता से इस भाषा को सीखा जा सकता है। इस मौके पर आयोजित काव्य गोष्ठी में संस्कृत के कवियों ने रचनाएं सुनाकर वाहवाही लूटी।
गोष्ठी में रामशंकर अवस्थी अबोध, महेश सिंह उपकारी, उपकार मणि, भारती मिश्रा, स्मृति अग्निहोत्री, निमिष टंडन, मनोज मिश्रा, हरीकांत, विवेक मिश्रा, अमर सक्सेना, नंदन त्रिपाठी, मेघा मिश्रा, अमित मिश्रा, संतोष कुमारी आदि मौजूद रहे।