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Farrukhabad News: नीबकरोरी धाम में मुंबई, दिल्ली से भी आ रहे भक्त
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मोहम्मदाबाद/कमालगंज। बीसवीं सदी के चमत्कारी संतों में शुमार बाबा नीबकरोरी महाराज की प्रथम तपस्थली नीबकरोरी में अब मुंबई, नोएडा व दिल्ली जैसे महानगरों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मंगलवार व शनिवार के अलावा अन्य दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ी है। बाबा की तपस्थली में श्रद्धा और उल्लास का वैभव दमक रहा है।
फर्रुखाबाद शहर से 30 किलोमीटर की दूरी पर मोहम्मदाबाद ब्लॉक में नीबकरोरी धाम है। यहां से बौद्ध तीर्थस्थली संकिसा का भी रास्ता है। बाबा नीबकरोरी महाराज के जीवन व उनकी आध्यात्मिक चमत्कारिक यात्रा पर बनी फिल्म की चर्चा यहां लगातार बढ़ रही है। जगह-जगह पूजा पंडालों व सभागारों में भी फिल्म का प्रदर्शन हो रहा है।
इन सबके बीच यहां का नीबकरोरी धाम नव दुर्गा पर्व में भी हनुमान जी व बाबा के प्रति भक्ति में डूबा है। मंगलवार व शनिवार को मोहम्मदाबाद-संकिसा रोड से मंदिर परिसर तक आने वाले दोनों रास्तों से भक्तों की संख्या बढ़ी है। दोनों दिन यहां मेला लगता है।
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अब पूरे देश से आ रहे श्रद्धालु
- नीबकरोरी धाम मंदिर के पुजारी रामलखन वाजपेयी ने बताया कि पहले फर्रुखाबाद व निकटवर्ती जिलों मैनपुरी, फिरोजाबाद, हरदोई, शाहजहांपुर आदि के श्रद्धालु आते थे। फिल्म के बाद पूरे देश से श्रद्धालु आने लगे हैं। मुंबई, दिल्ली, नोएडा से भी श्रद्धालु आते हैं। इसके अनुरूप श्रद्धालुओं के रुकने की, अच्छे शौचालय की, पार्किंग की सुविधा की जरूरत है। मेले के दिनों को छोड़ दें तो अन्य दिनों में हजार-दो हजार श्रद्धालु आते थे। अब चार हजार-पांच हजार संख्या पहुंच जाती है।
मंदिर परिसर के बाहर स्थित कच्ची गुफा के बाहर श्रद्धालुओं का तांता लगता है। परिसर के अलावा कच्ची गुफा के बाहर भी लोग पन्नी में पुष्प आदि रखकर मनौती के लिए पन्नी बांध देते हैं। इस कच्ची गुफा से अंदर-अंदर ही परिसर स्थित पक्की गुफा तक बाबा बाबा विचरण व तपस्या करते थे। दोनों गुफाओं के बीच की दूरी 100 मीटर है।
गुफाओं में बाबा के कंबल ओढ़े चित्र विग्रह के पास अखंड दीपक जलता है। बाबा यहां नीबकरोरी में 1912 में आए थे और 1935 तक साधना की थी। यहां तपस्या करके उन्होंने सिद्धि प्राप्त की और अन्य स्थानों पर गए। यहां के गांव के नाम से ही वह बाबा नीबकरोरी के नाम से विश्वभर में प्रसिद्ध हुए। यहां के लोग बाबा के कई चमत्कारों से रूबरू हुए।
1984 में खोदाई के बाद विग्रह की स्थापना
- वाराणसी में शिक्षा पाने वाले रेलवे में अधिकारी रहे पुजारी त्यागी जी महाराज ने बताया कि 1984 में बाबा के विग्रह की स्थापना हुई। हनुमान अंश फिल्म मंदिर के हाल में भी दिखाई गई। बाबा ने अपने हाथ से गोबर व मिट्टी से नीबकरोरी धाम में हनुमान जी की जो प्रतिमा बनाई थी, वह प्रतिमा भी फिल्म में दिखाई गई है। फिल्म में रेलवे स्टेशन का सीन दूसरे स्टेशन का है। नीबकरोरी की बाबा लक्ष्मणदासपुरी स्टेशन से सीन फिल्माया जाता तो और अच्छा होता। फिल्म में सर्पों का सीन भी है। बाबा यहां गुफा में तपस्या करते थे, तो सर्प विचरते थे। सर्पों का दृश्य भी यहां फिल्माया जाता तो ठीक रहता। बाबा की आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ीं सिद्धिमा माता के कक्ष में भी अखंड दीपक प्रज्ज्वलित रहता है।
दुकानों पर फिल्म का भी जिक्र करते हैं बाहर से आने वाले श्रद्धालु
फोटो-19 आमोद दुबे। संवाद
बाबा लक्ष्मणदास स्टेशन पर जमीन पर सामान रखकर दुकान चलाने वाले आमोद दुबे ने बताया कि हनुमान अंश फिल्म के बाद श्रद्धालु लगातार बढ़ रहे हैं। दुकानों पर सामान लेने के दौरान कई बार श्रद्धालु फिल्म से जुड़े प्रसंगों की बात करते हैं। दुकानों पर भी चहल-पहल व बिक्री बढ़ रही है।
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फर्रुखाबाद शहर से 30 किलोमीटर की दूरी पर मोहम्मदाबाद ब्लॉक में नीबकरोरी धाम है। यहां से बौद्ध तीर्थस्थली संकिसा का भी रास्ता है। बाबा नीबकरोरी महाराज के जीवन व उनकी आध्यात्मिक चमत्कारिक यात्रा पर बनी फिल्म की चर्चा यहां लगातार बढ़ रही है। जगह-जगह पूजा पंडालों व सभागारों में भी फिल्म का प्रदर्शन हो रहा है।
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इन सबके बीच यहां का नीबकरोरी धाम नव दुर्गा पर्व में भी हनुमान जी व बाबा के प्रति भक्ति में डूबा है। मंगलवार व शनिवार को मोहम्मदाबाद-संकिसा रोड से मंदिर परिसर तक आने वाले दोनों रास्तों से भक्तों की संख्या बढ़ी है। दोनों दिन यहां मेला लगता है।
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अब पूरे देश से आ रहे श्रद्धालु
- नीबकरोरी धाम मंदिर के पुजारी रामलखन वाजपेयी ने बताया कि पहले फर्रुखाबाद व निकटवर्ती जिलों मैनपुरी, फिरोजाबाद, हरदोई, शाहजहांपुर आदि के श्रद्धालु आते थे। फिल्म के बाद पूरे देश से श्रद्धालु आने लगे हैं। मुंबई, दिल्ली, नोएडा से भी श्रद्धालु आते हैं। इसके अनुरूप श्रद्धालुओं के रुकने की, अच्छे शौचालय की, पार्किंग की सुविधा की जरूरत है। मेले के दिनों को छोड़ दें तो अन्य दिनों में हजार-दो हजार श्रद्धालु आते थे। अब चार हजार-पांच हजार संख्या पहुंच जाती है।
मंदिर परिसर के बाहर स्थित कच्ची गुफा के बाहर श्रद्धालुओं का तांता लगता है। परिसर के अलावा कच्ची गुफा के बाहर भी लोग पन्नी में पुष्प आदि रखकर मनौती के लिए पन्नी बांध देते हैं। इस कच्ची गुफा से अंदर-अंदर ही परिसर स्थित पक्की गुफा तक बाबा बाबा विचरण व तपस्या करते थे। दोनों गुफाओं के बीच की दूरी 100 मीटर है।
गुफाओं में बाबा के कंबल ओढ़े चित्र विग्रह के पास अखंड दीपक जलता है। बाबा यहां नीबकरोरी में 1912 में आए थे और 1935 तक साधना की थी। यहां तपस्या करके उन्होंने सिद्धि प्राप्त की और अन्य स्थानों पर गए। यहां के गांव के नाम से ही वह बाबा नीबकरोरी के नाम से विश्वभर में प्रसिद्ध हुए। यहां के लोग बाबा के कई चमत्कारों से रूबरू हुए।
1984 में खोदाई के बाद विग्रह की स्थापना
- वाराणसी में शिक्षा पाने वाले रेलवे में अधिकारी रहे पुजारी त्यागी जी महाराज ने बताया कि 1984 में बाबा के विग्रह की स्थापना हुई। हनुमान अंश फिल्म मंदिर के हाल में भी दिखाई गई। बाबा ने अपने हाथ से गोबर व मिट्टी से नीबकरोरी धाम में हनुमान जी की जो प्रतिमा बनाई थी, वह प्रतिमा भी फिल्म में दिखाई गई है। फिल्म में रेलवे स्टेशन का सीन दूसरे स्टेशन का है। नीबकरोरी की बाबा लक्ष्मणदासपुरी स्टेशन से सीन फिल्माया जाता तो और अच्छा होता। फिल्म में सर्पों का सीन भी है। बाबा यहां गुफा में तपस्या करते थे, तो सर्प विचरते थे। सर्पों का दृश्य भी यहां फिल्माया जाता तो ठीक रहता। बाबा की आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ीं सिद्धिमा माता के कक्ष में भी अखंड दीपक प्रज्ज्वलित रहता है।
दुकानों पर फिल्म का भी जिक्र करते हैं बाहर से आने वाले श्रद्धालु
फोटो-19 आमोद दुबे। संवाद
बाबा लक्ष्मणदास स्टेशन पर जमीन पर सामान रखकर दुकान चलाने वाले आमोद दुबे ने बताया कि हनुमान अंश फिल्म के बाद श्रद्धालु लगातार बढ़ रहे हैं। दुकानों पर सामान लेने के दौरान कई बार श्रद्धालु फिल्म से जुड़े प्रसंगों की बात करते हैं। दुकानों पर भी चहल-पहल व बिक्री बढ़ रही है।