फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   Deteriorating soil health due to increase in yield

उत्पादन बढ़ाने के चक्कर में खराब हो रही मिट्टी की सेहत

Tue, 23 Aug 2022 12:10 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 23 Aug 2022 12:10 AM IST
विज्ञापन
Deteriorating soil health due to increase in yield
फर्रुखाबाद। फसलों की पैदावार बढ़ाने के चक्कर में किसान मिट्टी की सेहत खराब कर रहे हैं। यूूरिया के अधिक उपयोग से मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ रही है, जबकि पोटाश घट रही है। इससे मिट्टी का भविष्य में ऊसर की ओर बढ़ रहा है। यूरिया का उपयोग कम न हुआ तो किसानों के लिए यह हानिकारक होगा।
विज्ञापन

उपकृषि निदेशक कार्यालय की लैब में पहले नि:शुल्क मृदा परीक्षण होता था। इसके लिए कृषि विभाग को करीब 18 हजार नमूनों की जांच करने का लक्ष्य दिया जाता था। वर्ष 2019 से मृदा परीक्षण निजी स्तर से कर दिया गया। अब किसानों को मिट्टी की प्राइमरी न्यूट्रीन की जांच के लिए 42 रुपये व सूक्ष्म तत्वों की जांच के लिए 102 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इससे नमूनों की जांच में बड़े स्तर पर गिरावट आई है।
विज्ञापन

अब वर्ष में बमुश्किल 40 से 50 मिट्टी के नमूनों की जांच कराई जा रही है। मृदा परीक्षण करने वाले टेक्नीशियन प्रदीप कुमार का कहना है कि मिट्टी की जांच में नाइट्रोजन की मात्रा अधिक मिल रही है। जबकि फास्फोरस व पोटाश की मात्र घट रही है। उत्पादन बढ़ाने के चक्कर में फसलों में यूरिया का अधिक इस्तेमाल किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

जांच के लिए कानपुर भेजे जाते नमूने
टेक्नीशियन प्रदीप कुमार ने बताया कि पिछले कुछ दिन से लैब की मशीन सही काम नहीं कर रही है। इससे प्राइमरी न्यूट्रीन व सूक्ष्म तत्वों की जांच के लिए नमूने कानपुर भेजे जाते हैं। करीब 15 दिन में जांच रिपोर्ट मिल जाती है। वर्ष 2021 में कुल 44 नमूनों की जांच हुई। जबकि इस बार 42 नमूनों की जांच कराई गई है। सात नमूने अभी जांच के लिए रखे हैं।
48 किलो प्रति एकड़ कम मिली पोटाश
कायमगंज के गांव रौकरी निवासी जुगराज सिंह ने बताया कि उन्होंने धान की रोपाई से पहले मिट्टी की जांच कराई थी। इसमें 48 किलो प्रति एकड़ पोटाश की कमी मिली। नाइट्रोजन की मात्रा कम पाई गई। इससे उन्होंने यूरिया की जगह गोबर की खाद का अधिक इस्तेमाल किया। इससे धान की फसल अच्छी है।

प्राकृतिक खेती अपनाएं किसान
कृषि वैज्ञानिक डॉ. वीके शर्मा ने बताया कि किसान प्राकृतिक खेती अपनाएं। यूरिया कम डालें। गोबर की खाद के साथ यूरिया मिलाकर डालें। नैनो यूरिया का स्प्रे और बेहतर है। एनपीके का भी स्प्रे कर सकते हैं। प्राकृतिक खेती पर ध्यान दें। गोबर की खाद का अधिक इस्तेमाल करें। वर्ष में एक बार ढेंचा की फसल अवश्य लें। इससे खेत की उर्वरक क्षमता में वृद्धि होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed