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डेंगू ने ली बालक की जान
ब्यूरो अमर उजाला फर्रुखाबाद।
Updated Wed, 25 Nov 2015 12:46 AM IST
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डेंगू पीड़ित सीपी विद्या निकेतन के 11 वीं के छात्र की इलाज के दौरान मौत हो गई। चार बहनों के इकलौते भाई की मौत से घर में कोहराम मच गया। वहीं इस गांव में एक दर्जन से अधिक बुखार से पीड़ित मरीजों में दहशत फैल गई।
घसिया चिलौली निवासी सुरेंद्र कुमार का इकलौता बेटा पवन सीपी विद्या निकेतन में 11वीं का छात्र था, उसे शुक्रवार को बुखार आया। हालत बिगड़ने और प्लेटलेट्स कम होने पर परिजन इलाज को कानपुर के रीजेंसी अस्पताल ले गए, यहां सोमवार शाम पवन की मौत हो गई।
ग्रामीणों ने बताया कि इस गांव में अमित पाठक, विनोद दीक्षित, विजय गोपाल, उत्कर्ष पाठक, प्रीती दुबे पत्नी दीपक, रामऔतार कश्यप, सोली पत्नी विजय, पप्पू गंगवार और उनकी पत्नी शशि गंगवार, रामवीर उसकी पुत्री रूबी, अरुण, अतुल, उज्जवल, संदेश आदि बुखार से पीड़ित हैं।
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बताया कि मलेरिया विभाग ने एक बार भी गांव में न तो दवाओं का छिड़काव कराया, न ही प्रधान और एएनएम ने ही हर साल शासन से मिलने वाले 10 हजार रुपये से दवाओं का छिड़काव कराया है। बताया कि गंाव में तैनात सफाईकर्मी के न आने से गांव की नालियां बजबजाती रहती हैं। इनमें पनपने वाले मच्छरों के कारण गांव में रोग फैल रहा है।
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घसिया चिलौली निवासी सुरेंद्र कुमार का इकलौता बेटा पवन सीपी विद्या निकेतन में 11वीं का छात्र था, उसे शुक्रवार को बुखार आया। हालत बिगड़ने और प्लेटलेट्स कम होने पर परिजन इलाज को कानपुर के रीजेंसी अस्पताल ले गए, यहां सोमवार शाम पवन की मौत हो गई।
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ग्रामीणों ने बताया कि इस गांव में अमित पाठक, विनोद दीक्षित, विजय गोपाल, उत्कर्ष पाठक, प्रीती दुबे पत्नी दीपक, रामऔतार कश्यप, सोली पत्नी विजय, पप्पू गंगवार और उनकी पत्नी शशि गंगवार, रामवीर उसकी पुत्री रूबी, अरुण, अतुल, उज्जवल, संदेश आदि बुखार से पीड़ित हैं।
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बताया कि मलेरिया विभाग ने एक बार भी गांव में न तो दवाओं का छिड़काव कराया, न ही प्रधान और एएनएम ने ही हर साल शासन से मिलने वाले 10 हजार रुपये से दवाओं का छिड़काव कराया है। बताया कि गंाव में तैनात सफाईकर्मी के न आने से गांव की नालियां बजबजाती रहती हैं। इनमें पनपने वाले मच्छरों के कारण गांव में रोग फैल रहा है।