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Farrukhabad News: मैदान के अभाव में 20 वर्ष से बंद हो गया दिन में रामलीला का मंचन
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कायमगंज। वर्ष 1950 में बनी श्री रामलीला समिति के पास 75 साल बाद भी अपना मैदान नहीं है। जगह के अभाव में 20 वर्ष से दिन की रामलीला का मंचन बंद हो गया। रामलीला की सवारी निकलने की परंपरा भी थम गई। अब सीपी ग्राउंड में रात्रिकालीन रामलीला का मंचन होता है, जबकि विजयदशमी पर मंडी समिति परिसर में रावण पुतला दहन कराया जाएगा।
वृंदावन से आए कलाकार अवधेश शर्मा के निर्देशन में सीपी ग्राउंड में रामलीला का मंचन कर रहे हैं। आकर्षक मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था, पार्श्व संगीत और गायन के बीच कलाकारों का अभिनय रामलीला के दृश्यों को जीवंत कर देता है। दृश्य के अनुरूप महल, जंगल और नदी आदि की पेंटिंग वाले पर्दों से मंच सजाया जाता है।
रामलीला मंडली के कलाकार दिन में रासलीला का मंचन भी करते हैं। इस वर्ष विजयदशमी पर रावण पुतला दहन के लिए विशेष सजावट और आतिशबाजी की व्यवस्था की गई है। भरत मिलाप का आयोजन परंपरागत तरीके से गल्ला मंडी में होगा।
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कई स्थानों पर होता रहा मंचन
समिति के महामंत्री मनोज कौशल ने बताया कि पहले नोनियमगंज के गड्ढे में रामलीला का मंचन होता था। इसके बाद कई वर्षों तक विद्या मंदिर कॉलेज और परमानंद के मील में रामलीला हुई। करीब दो दशकों से समाज सेवी सत्यप्रकाश अग्रवाल व लक्ष्मी नारायण अग्रवाल अपने ग्राउंड में रात्रिकालीन मंचन करा रहे हैं, जबकि मंडी समिति परिसर में रावण पुतला दहन होता है। समिति के पास न तो अपना रामलीला मैदान है और न ही रावण पुतला दहन के लिए स्थायी स्थल। पहले दिन और रात दोनों समय रामलीला होती थी लेकिन स्थान उपलब्ध न होने के कारण दिन का मंचन बंद करना पड़ा।
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वृंदावन से आए कलाकार अवधेश शर्मा के निर्देशन में सीपी ग्राउंड में रामलीला का मंचन कर रहे हैं। आकर्षक मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था, पार्श्व संगीत और गायन के बीच कलाकारों का अभिनय रामलीला के दृश्यों को जीवंत कर देता है। दृश्य के अनुरूप महल, जंगल और नदी आदि की पेंटिंग वाले पर्दों से मंच सजाया जाता है।
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रामलीला मंडली के कलाकार दिन में रासलीला का मंचन भी करते हैं। इस वर्ष विजयदशमी पर रावण पुतला दहन के लिए विशेष सजावट और आतिशबाजी की व्यवस्था की गई है। भरत मिलाप का आयोजन परंपरागत तरीके से गल्ला मंडी में होगा।
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कई स्थानों पर होता रहा मंचन
समिति के महामंत्री मनोज कौशल ने बताया कि पहले नोनियमगंज के गड्ढे में रामलीला का मंचन होता था। इसके बाद कई वर्षों तक विद्या मंदिर कॉलेज और परमानंद के मील में रामलीला हुई। करीब दो दशकों से समाज सेवी सत्यप्रकाश अग्रवाल व लक्ष्मी नारायण अग्रवाल अपने ग्राउंड में रात्रिकालीन मंचन करा रहे हैं, जबकि मंडी समिति परिसर में रावण पुतला दहन होता है। समिति के पास न तो अपना रामलीला मैदान है और न ही रावण पुतला दहन के लिए स्थायी स्थल। पहले दिन और रात दोनों समय रामलीला होती थी लेकिन स्थान उपलब्ध न होने के कारण दिन का मंचन बंद करना पड़ा।