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नावालिग से दुष्कर्म में युवक को बीस साल की सजा
Updated Tue, 17 Jul 2018 11:12 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फर्रुखाबाद। विशेष अदालत पाक्सो एक्ट के न्यायाधीश छाया नैन ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को दोषी पाकर बीस साल की सजा सुनाई है। साथ ही 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतने का प्रावधान किया है।
कमालगंज थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी ग्रामीण ने गांव निशान नगला निवासी रामू के खिलाफ 24 मार्च 2016 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया कि उसकी 14 वर्षीय पुत्री भैंस को बांधने गई थी। वहां युवक रामू ने उसे पकड़ लिया और छेड़छाड़ व दुष्कर्म किया। पुलिस ने जांच कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने दलीलें पेश कीं।
सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश ने आरोपी रामू को दुष्कर्म के अपराध में दोषी पाकर 20 साल की सजा सुनाई और 20 हजार रुपये जुर्माना किया। वहीं, धारा चार लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के तहत दोषी पाकर सात साल की सजा सुनाई और 20 हजार रुपये का जुर्माना किया। जुर्माना अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतने का आदेश दिया है। न्यायाधीश ने दोनों सजाएं एक साथ चलने और आरोपी द्वारा जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित करने का आदेश दिया है।
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फर्रुखाबाद। विशेष अदालत पाक्सो एक्ट के न्यायाधीश छाया नैन ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को दोषी पाकर बीस साल की सजा सुनाई है। साथ ही 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतने का प्रावधान किया है।
कमालगंज थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी ग्रामीण ने गांव निशान नगला निवासी रामू के खिलाफ 24 मार्च 2016 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया कि उसकी 14 वर्षीय पुत्री भैंस को बांधने गई थी। वहां युवक रामू ने उसे पकड़ लिया और छेड़छाड़ व दुष्कर्म किया। पुलिस ने जांच कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने दलीलें पेश कीं।
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सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश ने आरोपी रामू को दुष्कर्म के अपराध में दोषी पाकर 20 साल की सजा सुनाई और 20 हजार रुपये जुर्माना किया। वहीं, धारा चार लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के तहत दोषी पाकर सात साल की सजा सुनाई और 20 हजार रुपये का जुर्माना किया। जुर्माना अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतने का आदेश दिया है। न्यायाधीश ने दोनों सजाएं एक साथ चलने और आरोपी द्वारा जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित करने का आदेश दिया है।
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