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चाइना में एमबीबीएस कर रहे युवक को कोरोना के लक्षण
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फर्रुखाबाद। जिले में भी कोरोना वायरस ने दस्तक दे दी है। चीन में एमबीबीएस कर रहा एक छात्र यहां पहुंचा। उसकी तबीयत खराब होने पर जब अस्पताल पहुंचा, तो डाक्टरों ने लक्षण के आधार पर उसे कोरोना होने की आशंका जताई। इसके बाद घबराए परिजन उसे लेकर लखनऊ रवाना हो गए हैं।
शहर निवासी एक शख्स का पुत्र चीन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। वह बीते दिन यहां पहुंचा, उसे सर्दी, जुकाम, खांसी, सीने में अकड़न आदि की शिकायत हुई। मां पूर्वाह्न करीब साढ़े 11 बजे उसे लेकर लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी पहुंची। उन्होंने मौजूद डाक्टर को लक्षण बताए।
डाक्टर ने उसे गंभीरता से देखा और फिजीशियन को दिखाया। जिस तरह से उसमें लक्षण थे, वह कोरोना वायरस में ही होते हैं। ऐसे में डाक्टरों ने परिजनों को हायर सेंटर दिखाने की सलाह दे दी। परिजन उसे लेकर लखनऊ रवाना हो गए हैं। डा. प्रज्ञा मिश्रा ने बताया कि अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। जब तक जांच में फाइनल न हो, तब तक कोराना की पुष्टि नहीं हो सकती। हां लक्षण कुछ ऐसे ही थे।
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अस्पताल प्रशासन ने साइसोलेशन वार्ड को कोरोना वायरस का वार्ड बनाने की कवायद की। उसमें तीन-चार किटें रख दी गईं। मरीज के रहते कोई भी बिना किट पहने नहीं घुसेगा। मगर इस वार्ड की कुछ खिड़कियां खुली हुई हैं। इससे साफ है कि इसमें वायरस रोकने की कोई व्यवस्था नहीं है। छह बेड के इस वार्ड के पास ही शौचालय में बदबू से रुकना मुश्किल है।
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शहर निवासी एक शख्स का पुत्र चीन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। वह बीते दिन यहां पहुंचा, उसे सर्दी, जुकाम, खांसी, सीने में अकड़न आदि की शिकायत हुई। मां पूर्वाह्न करीब साढ़े 11 बजे उसे लेकर लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी पहुंची। उन्होंने मौजूद डाक्टर को लक्षण बताए।
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डाक्टर ने उसे गंभीरता से देखा और फिजीशियन को दिखाया। जिस तरह से उसमें लक्षण थे, वह कोरोना वायरस में ही होते हैं। ऐसे में डाक्टरों ने परिजनों को हायर सेंटर दिखाने की सलाह दे दी। परिजन उसे लेकर लखनऊ रवाना हो गए हैं। डा. प्रज्ञा मिश्रा ने बताया कि अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। जब तक जांच में फाइनल न हो, तब तक कोराना की पुष्टि नहीं हो सकती। हां लक्षण कुछ ऐसे ही थे।
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अस्पताल प्रशासन ने साइसोलेशन वार्ड को कोरोना वायरस का वार्ड बनाने की कवायद की। उसमें तीन-चार किटें रख दी गईं। मरीज के रहते कोई भी बिना किट पहने नहीं घुसेगा। मगर इस वार्ड की कुछ खिड़कियां खुली हुई हैं। इससे साफ है कि इसमें वायरस रोकने की कोई व्यवस्था नहीं है। छह बेड के इस वार्ड के पास ही शौचालय में बदबू से रुकना मुश्किल है।