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Farrukhabad News: नियंत्रण अभियान के बीच फल-फूल रहे संचारी रोग
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फर्रुखाबाद। जनपद में चल रहे संचारी रोग नियंत्रण अभियान के बीच शहर से लेकर गांव तक रोगों को बढ़ावा मिलता दिख रहा है। कीचड़, गंदगी व जलभराव से लोग त्रस्त हैं। सीएमओ कार्यालय के सामने खड़ी बड़ी-बड़ी घायल अभियान की हकीकत बयां कर रही है। इससे जमीनी स्तर पर अभियान का असर तक नहीं नजर आ रहा है।
बारिश के मौसम में संचारी रोग न फैलें, इसके लिए सभी विभागों के सहयोग से संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। इसकी मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है। एक जुलाई से शुरू हुए इस अभियान के 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन कहीं भी इसका असर नहीं दिख रहा है। हालात यह हैं कि माॅनीटरिंग करने वाले सीएमओ कार्यालय के सामने टीबी अस्पताल बड़ी-बड़ी घास, झाड़ी व गंदगी से घिरा है। बारिश में परिसर में जलभराव हो जाता है। पेयजल के लिए हैंडपंप खराब है। पास में ही डीएसओ कार्यालय व फतेहगढ़ सीएचसी परिसर में भी झाड़ियां व घास खड़ी है। एएनएम ट्रेनिंग सेंटर में घास व झाड़ियां होने से सांप निकल रहे हैं। जबकि यहां हास्टल में छात्राएं भी रहती हैं। नगर स्वास्थ्य अधिकारी को तो अपने निजी कार्याें से ही फुरसत नहीं है तो अभियान कौन देखे। सफाई और छिड़काव तो दूर की बात, घास व झाड़ियां कटवाने की भी जिम्मेदार सुधि नहीं ले रहे हैं। इसके अलावा शहर के कई मोहल्लों में नाले चोक होने से बारिश में अक्सर कई घंटे तक जलभराव रहता है।
कमालगंज क्षेत्र के गांव जहानगंज में तो अभियान के बीच हालात और बदतर हो गए। यहां गंदगी से पटा तालाब उफना रहा है। गलियों में गंदा पानी भरा है। गांव में पीएचसी होने के बावजूद ग्रामीणों को न तो कोई जागरूक करते दिख रहा है और न ही ग्राम पंचायत से सफाई, छिड़काव व झाड़ी काटने के कार्य किए जा रहे हैं। मंगलवार को श्री आदर्श रामस्वरूप इंटर कॉलेज के बच्चे गली में जलभराव से होकर पढ़ने जाते दिखे। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में न तो नाला का निर्माण कराया गया और न ही पानी के निकास का कोई इंतजाम है। कई रास्ते भी अवैध कब्जे के चलते बंद हैं। भाजपा के पूर्व क्षेत्रीय उपाध्यक्ष युवा मोर्चा शैलेंद्र राजपूत ने बताया कि जलभराव से गांव आलूपुर, बरुआनगला, बरुआ ताल, छगे नगला आदि का रास्ता बंद है। रास्तों पर कब्जे के संबंध में वह कई बार अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन सुनवाई ही नहीं होती है। इससे गांवों में नारकीय स्थिति बनी हुई है। ऐसे में संचारी रोग फैलने की आशंका बढ़ गई है। पिछले दो-तीन वर्ष से गांव में डेंगू जैसी घातक बीमारी फैल रही है।
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डिप्टी सीएमओ डॉ. आरसी माथुर ने बताया कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान की उन्हें जो मॉनीटरिंग रिपोर्ट मिली है, उसमें अधिकांश ग्राम पंचायतें अपने कार्यों में रुचि नहीं ले रही हैं। मच्छर मारने के लिए वह सभी सीएचसी व ब्लाकों को छिड़काव के लिए दवा उपलब्ध करा चुके हैं। नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ.यूसी वर्मा ने बताया कि कार्यालय के सामने घास साफ करने के संबंध में ईओ को पत्र भेजा गया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। सोमवार को हुई समीक्षा में अभियान की स्थिति खराब मिलने पर डीएम ने नाराजगी जताई। दो दिन बाद फिर बैठक बुलाई है। अन्य विभाग काम में रुचि नहीं ले रहे हैं।
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बारिश के मौसम में संचारी रोग न फैलें, इसके लिए सभी विभागों के सहयोग से संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। इसकी मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है। एक जुलाई से शुरू हुए इस अभियान के 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन कहीं भी इसका असर नहीं दिख रहा है। हालात यह हैं कि माॅनीटरिंग करने वाले सीएमओ कार्यालय के सामने टीबी अस्पताल बड़ी-बड़ी घास, झाड़ी व गंदगी से घिरा है। बारिश में परिसर में जलभराव हो जाता है। पेयजल के लिए हैंडपंप खराब है। पास में ही डीएसओ कार्यालय व फतेहगढ़ सीएचसी परिसर में भी झाड़ियां व घास खड़ी है। एएनएम ट्रेनिंग सेंटर में घास व झाड़ियां होने से सांप निकल रहे हैं। जबकि यहां हास्टल में छात्राएं भी रहती हैं। नगर स्वास्थ्य अधिकारी को तो अपने निजी कार्याें से ही फुरसत नहीं है तो अभियान कौन देखे। सफाई और छिड़काव तो दूर की बात, घास व झाड़ियां कटवाने की भी जिम्मेदार सुधि नहीं ले रहे हैं। इसके अलावा शहर के कई मोहल्लों में नाले चोक होने से बारिश में अक्सर कई घंटे तक जलभराव रहता है।
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कमालगंज क्षेत्र के गांव जहानगंज में तो अभियान के बीच हालात और बदतर हो गए। यहां गंदगी से पटा तालाब उफना रहा है। गलियों में गंदा पानी भरा है। गांव में पीएचसी होने के बावजूद ग्रामीणों को न तो कोई जागरूक करते दिख रहा है और न ही ग्राम पंचायत से सफाई, छिड़काव व झाड़ी काटने के कार्य किए जा रहे हैं। मंगलवार को श्री आदर्श रामस्वरूप इंटर कॉलेज के बच्चे गली में जलभराव से होकर पढ़ने जाते दिखे। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में न तो नाला का निर्माण कराया गया और न ही पानी के निकास का कोई इंतजाम है। कई रास्ते भी अवैध कब्जे के चलते बंद हैं। भाजपा के पूर्व क्षेत्रीय उपाध्यक्ष युवा मोर्चा शैलेंद्र राजपूत ने बताया कि जलभराव से गांव आलूपुर, बरुआनगला, बरुआ ताल, छगे नगला आदि का रास्ता बंद है। रास्तों पर कब्जे के संबंध में वह कई बार अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन सुनवाई ही नहीं होती है। इससे गांवों में नारकीय स्थिति बनी हुई है। ऐसे में संचारी रोग फैलने की आशंका बढ़ गई है। पिछले दो-तीन वर्ष से गांव में डेंगू जैसी घातक बीमारी फैल रही है।
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डिप्टी सीएमओ डॉ. आरसी माथुर ने बताया कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान की उन्हें जो मॉनीटरिंग रिपोर्ट मिली है, उसमें अधिकांश ग्राम पंचायतें अपने कार्यों में रुचि नहीं ले रही हैं। मच्छर मारने के लिए वह सभी सीएचसी व ब्लाकों को छिड़काव के लिए दवा उपलब्ध करा चुके हैं। नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ.यूसी वर्मा ने बताया कि कार्यालय के सामने घास साफ करने के संबंध में ईओ को पत्र भेजा गया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। सोमवार को हुई समीक्षा में अभियान की स्थिति खराब मिलने पर डीएम ने नाराजगी जताई। दो दिन बाद फिर बैठक बुलाई है। अन्य विभाग काम में रुचि नहीं ले रहे हैं।