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जिला पंचायत के विकास कार्यों में नीचे से ऊपर तक कमीशन का खेल
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फर्रुखाबाद। जिला पंचायत से होने वाले विकास कार्यों में नीचे से लेकर ऊपर तक मोटे कमीशन का खेल है। जिला पंचायत की सत्ता बदलने के बाद खेमेबाजी तूल पकड़ गई और रार बढ़ती जा रही है। लिपिक को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने से इस खेल का पर्दा उठ गया है। कई सड़कें अधूरी पड़ी होने के बावजूद पूरे भुगतान का दबाव बनाया जा रहा है। इससे कमीशन का प्रतिशत बढ़ाने को लेकर आगे और रार बढ़ने की आशंका है।
जिला पंचायत से वर्ष 2020-21 में स्वीकृत सड़कों का निर्माण अभी तक पूरा नहीं कराया जा सका है। इस बीच जिला पंचायत की सत्ता भी बदल गई। इसको लेकर अभी तक खींचतान मची है। जिला पंचायत बोर्ड की बैठकों में भी झड़पें देखने को मिलती हैं। फिलहाल काम हथियाने और चहेते ठेकेदारों को ही काम देने पर विशेष जोर रहता है। इसमें मोटा कमीशन भी वसूला जाता है।
यह कमीशन नीचे से लेकर ऊपर तक जाता है। जिला पंचायत सत्ता बदलने से पहले की कई निर्माणाधीन सड़कों का अभी तक काम पूरा नहीं किया गया है। इसके बाद भी ठेकेदार पूरा भुगतान लेने के प्रयास में हैं। बताया जा रहा है कि ठेकेदारों को भुगतान मिलने से पहले किस्तों में पूरा कमीशन देना पड़ता है। आनाकानी करने वाले ठेकेदारों का काम अमानक बताकर फेल कर दिया जाता है।
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हालांकि ठेकेदार भी आसानी से तय कमीशन देकर खुद भी कमाई कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि पिछले कार्यकाल की आधा दर्जन से अधिक सड़कों का अभी तक भुगतान नहीं हुआ है। इनकी करीब 50 लाख से अधिक की लागत बताई जा रही है। इसके अलावा भी कई करोड़ के भुगतान लंबित हैं। इससे भुगतान व उसके कमीशन को लेकर खींचतान मची है।
विभाग के ही एक जिम्मेदार ने कहा कि यदि निर्माण कार्य ईमानदारी से पूरा करा दिया जाएगा तो चुनाव पर होने वाला खर्च कहां से निकलेगा। फिलहाल निर्माण पटल देख रहे लिपिक रजनीश यादव को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते एंटी करप्शन टीम द्वारा पकड़े जाने के बाद कमीशन के खेल से पर्दा उठ गया है। शनिवार को भी जिला पंचायत कार्यालय में कोई कर्मचारी न पहुंचने से सन्नाटा पसरा रहा।
अपर मुख्य अधिकारी नरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि 2020-21 की चार सड़कें अभी अधूरी हैं। वह विधानसभा चुनाव में जोनल मजिस्ट्रेट की ड्यूटी पर हैं। लिपिक के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर की कापी मिलने और विभागीय अभिलेख देखने के बाद वह लिपिक के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। लिपिक को किस मामले में रिश्वत दी गई, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।
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जिला पंचायत से वर्ष 2020-21 में स्वीकृत सड़कों का निर्माण अभी तक पूरा नहीं कराया जा सका है। इस बीच जिला पंचायत की सत्ता भी बदल गई। इसको लेकर अभी तक खींचतान मची है। जिला पंचायत बोर्ड की बैठकों में भी झड़पें देखने को मिलती हैं। फिलहाल काम हथियाने और चहेते ठेकेदारों को ही काम देने पर विशेष जोर रहता है। इसमें मोटा कमीशन भी वसूला जाता है।
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यह कमीशन नीचे से लेकर ऊपर तक जाता है। जिला पंचायत सत्ता बदलने से पहले की कई निर्माणाधीन सड़कों का अभी तक काम पूरा नहीं किया गया है। इसके बाद भी ठेकेदार पूरा भुगतान लेने के प्रयास में हैं। बताया जा रहा है कि ठेकेदारों को भुगतान मिलने से पहले किस्तों में पूरा कमीशन देना पड़ता है। आनाकानी करने वाले ठेकेदारों का काम अमानक बताकर फेल कर दिया जाता है।
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हालांकि ठेकेदार भी आसानी से तय कमीशन देकर खुद भी कमाई कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि पिछले कार्यकाल की आधा दर्जन से अधिक सड़कों का अभी तक भुगतान नहीं हुआ है। इनकी करीब 50 लाख से अधिक की लागत बताई जा रही है। इसके अलावा भी कई करोड़ के भुगतान लंबित हैं। इससे भुगतान व उसके कमीशन को लेकर खींचतान मची है।
विभाग के ही एक जिम्मेदार ने कहा कि यदि निर्माण कार्य ईमानदारी से पूरा करा दिया जाएगा तो चुनाव पर होने वाला खर्च कहां से निकलेगा। फिलहाल निर्माण पटल देख रहे लिपिक रजनीश यादव को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते एंटी करप्शन टीम द्वारा पकड़े जाने के बाद कमीशन के खेल से पर्दा उठ गया है। शनिवार को भी जिला पंचायत कार्यालय में कोई कर्मचारी न पहुंचने से सन्नाटा पसरा रहा।
अपर मुख्य अधिकारी नरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि 2020-21 की चार सड़कें अभी अधूरी हैं। वह विधानसभा चुनाव में जोनल मजिस्ट्रेट की ड्यूटी पर हैं। लिपिक के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर की कापी मिलने और विभागीय अभिलेख देखने के बाद वह लिपिक के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। लिपिक को किस मामले में रिश्वत दी गई, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।